बागेश्वर: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रुद्रनाथ धाम पंच केदारों में से एक है. समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यहां भगवान शिव के मुख की पूजा की जाती है. प्राकृतिक सौंदर्य, ऊंचे पहाड़ों, हरे-भरे बुग्यालों और हिमालय के खूबसूरत नजारों के बीच बसा ये धाम श्रद्धालुओं और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए खास है. हालांकि यहां की यात्रा आसान नहीं है. लंबा पैदल रास्ता, तेजी से बदलता मौसम, नो नेटवर्क और ऊंचाई के कारण कई परेशानियां होती हैं.
करीब 20 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर
वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे ने लोकल 18 को बताया कि रुद्रनाथ का पैदल रास्ता सागर गांव से शुरू होता है. सागर से रुद्रनाथ तक की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है. चढ़ाई, उतराई और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण यात्रा में अच्छी शारीरिक क्षमता की जरूरत होती है. ट्रैक पर जाने से कुछ हफ्ते पहले रोजाना 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलना और हल्का कार्डियो करना यूजफुल है. साथ ही सुबह जल्दी यात्रा शुरू करने से दिन की रोशनी में अधिक दूरी तय करने में मदद मिलती है.
परमिशन और पंजीकरण के बारे में जाने
यात्रा की योजना बनाने से पहले चमोली जिला प्रशासन, स्थानीय वन विभाग और संबंधित पर्यटन कार्यालय से वर्तमान ट्रेक मार्ग, प्रवेश अनुमति, पंजीकरण और लागू नियमों की जानकारी जरूर लें. मौसम, वन क्षेत्र के नियमों और प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं कभी-कभी बदल जाती हैं. पहचान पत्र, पंजीकरण का पर्चा और जरूरी संपर्क नंबर अपने पास रखें. नेटवर्क हर जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार को अपने यात्रा कार्यक्रम और संभावित वापसी की तारीख की जानकारी पहले ही दे दें.
मौसम में अचानक बदलाव से रहें सतर्क
रुद्रनाथ का मौसम तेजी से बदलता है. दिन में धूप रहने के बाद बारिश, तेज हवा, ठंड और कोहरा छा जाता हैं. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान नीचे जाता है. इसलिए रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, गर्म कपड़े, टोपी, दस्ताने और मोजे साथ रखना जरूरी है. यात्रा से पहले मौसम का पूर्वानुमान देखें और खराब मौसम या प्रशासन की चेतावनी के दौरान जोखिम न लें. रुद्रनाथ ट्रेक को पूरा करने में 3 से 4 दिन का समय लगता है. पहले दिन सागर गांव से ल्यूती बुग्याल या पनार बुग्याल तक पहुंचकर विश्राम करें. अगले दिन मौसम और अपनी क्षमता के अनुसार मंदिर तक पहुंचकर दर्शन करें. वापसी के लिए पर्याप्त समय रखें.अनुभवी और फिट ट्रेकर्स कम समय में यात्रा कर सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
ठहरने और खाने की क्या है व्यवस्था
यात्रा के दौरान सागर गांव, ल्यूती बुग्याल में स्थानीय आवास और कैंपिंग टेंट मिल जाते हैं. मंदिर के पास ठहरने की सीमित व्यवस्था है, टेंट और स्लीपिंग बैग वहां मिल जाते हैं. खाने के लिए ड्राई फ्रूट्स, भुने चने, गुड़, एनर्जी बार, बिस्कुट, चॉकलेट साथ रखें. ओआरएस भी यूजफुल हो सकता है. कचरा वापस लाने के लिए बैग रखें और प्राकृतिक जलस्रोतों को गंदा न करें. ट्रेकिंग शूज, रेनकोट, गर्म कपड़े, टॉर्च, पावर बैंक, प्राथमिक उपचार किट, व्यक्तिगत दवाइयां, पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेज बैग में रखें. मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल भुगतान कम होता है, इसलिए पर्याप्त नकदी रखें. ऊंचाई पर सांस फूलने, तेज सिरदर्द या चक्कर आने जैसी परेशानी होने पर आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकें और जरूरत पड़ने पर सहायता लें.
दिल्ली-देहरादून से रूट प्लान
दिल्ली से यहां की दूरी लगभग 450 से 500 किलोमीटर है. यात्री दिल्ली से बस या ट्रेन के जरिए ऋषिकेश पहुंच सकते हैं. इसके बाद देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और चमोली होते हुए गोपेश्वर पहुंचना होगा. गोपेश्वर से सागर गांव की दूरी करीब पांच किलोमीटर है, जहां टैक्सी उपलब्ध होती है. देहरादून से भी बस या टैक्सी के जरिए गोपेश्वर पहुंचा जाता है.