कौन से 4 कैच छूटे? भारतीय जर्नलिस्ट पर गुस्सा हुए ग्लेन फिलिप्स, बोले-कैच पकड़ने के लिए गेंद पर हाथ लगना भी जरूरी

कौन से 4 कैच छूटे? भारतीय जर्नलिस्ट पर गुस्सा हुए ग्लेन फिलिप्स, बोले-कैच पकड़ने के लिए गेंद पर हाथ लगना भी जरूरी


नई दिल्ली. न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर ग्लेन फिलिप्स ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन की खुलकर सराहना की. 226 रनों के बड़े लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करने का श्रेय भारतीय टीम की आक्रामक और स्थिति के अनुकूल बल्लेबाजी को देते हुए फिलिप्स ने स्वीकार किया कि बीच के ओवरों में न्यूजीलैंड के गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे, जिसकी वजह से मैच उनके हाथ से निकल गया. इसके साथ ही उन्होंने मैच के दौरान न्यूजीलैंड की ओर से कैच छूटने के मुद्दों और मीडिया के आकलनों पर अपनी टीम का बचाव भी किया.

इस बड़े स्कोर वाले मुकाबले में दोनों ही टीमों की ओर से आक्रामक बल्लेबाजी देखने को मिली. पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने एक विशाल स्कोर खड़ा किया था, लेकिन भारतीय टीम ने सूझबूझ और आक्रामक रवैये के साथ लक्ष्य को हासिल कर लिया. ग्लेन फिलिप्स (Glenn Phulips) ने स्पष्ट किया कि मैच से पहले न्यूजीलैंड की टीम ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम से निपटने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की थी, लेकिन खेल के मैदान पर उसे सही तरीके से लागू करना ही सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है.

मैच के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिलिप्स ने कहा कि रणनीति बनाने के स्तर पर हमारी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी गई थी. हमने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ हर तरह के विकल्प पर विचार किया था, लेकिन अंततः मैदान पर उन योजनाओं को प्रभावी ढंग से अंजाम देना सबसे ज्यादा मायने रखता है. भारत ने जिस तरह से लक्ष्य का पीछा किया, वह दिखाता है कि उन्होंने हमारी हर योजना को नाकाम करने का तरीका खोज लिया था.

भारतीय बल्लेबाजों का तालमेल और आक्रामक रवैया
न्यूजीलैंड की ओर से नाबाद 82 रनों की शानदार और सर्वाधिक व्यक्तिगत पारी खेलने वाले फिलिप्स ने भारतीय बल्लेबाजों की मानसिकता की विशेष रूप से तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाजों ने पिच और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को बहुत तेजी से ढाला. न्यूजीलैंड और भारत की पिचों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की पिचें बल्लेबाजों के लिए बेहतरीन होती हैं, हालांकि यहां उछाल भारत की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है. इसके बावजूद भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने मैदान की स्थितियों और अतिरिक्त उछाल के साथ बहुत जल्दी तालमेल बिठा लिया. उनके सकारात्मक दृष्टिकोण ने मैच को भारत के पक्ष में मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई.

बीच के ओवरों का गणित और बढ़ता दबाव
मैच का रुख किस तरह बदला, इस पर चर्चा करते हुए फिलिप्स ने माना कि न्यूजीलैंड के पास बीच के ओवरों में मैच पर पकड़ बनाने का मौका था. अगर टीम उस दौरान भारतीय रन गति पर लगाम लगाने में सफल होती, तो परिणाम अलग हो सकता था. फिलिप्स ने कहा कि अगर हम मध्य ओवरों में एक या दो अतिरिक्त विकेट निकालने में सफल हो जाते या लगातार कुछ डॉट गेंदें फेंक पाते, तो भारतीय टीम पर दबाव बनाया जा सकता था. ऐसे बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय यदि रन गति रुकती है, तो बल्लेबाजी करने वाली टीम दबाव में आ जाती है. यदि हम वह दबाव बनाने में सफल होते, तो शायद भारत इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाता और मैच की तस्वीर बिल्कुल अलग होती. फिर भी, 226 जैसे बड़े लक्ष्य का पीछा करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और भारत ने इसे बेहद शानदार और योजनाबद्ध तरीके से हासिल किया.

कैच छूटने के विवाद पर फिलिप्स का बचाव
संवाददाता सम्मेलन के दौरान जब फिलिप्स से भारतीय पारी के दौरान छूटे कैचों और उनके मैच पर पड़े प्रभाव के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कैच छूटने की संख्या के आकलन पर ही सवाल उठा दिए. जब उनसे पूछा गया कि क्या चार कैच छोड़ना हार का मुख्य कारण रहा, तो उन्होंने पलटकर पूछा, “कैच छूटते हैं, लेकिन चार कैच? कौन-कौन से?’ उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन मौकों को कैच छूटने की श्रेणी में गिना जा रहा है, उनमें से कई मौकों पर क्षेत्ररक्षक गेंद को छू भी नहीं पाए थे. फिलिप्स ने कहा कि डैरिल मिचेल और फिन एलेन से कैच छूटने के मौके जरूर बने थे, लेकिन बाकी दो अवसरों को कैच छूटने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि कैच छूटने के लिए कम से कम गेंद का हाथ से संपर्क होना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कैच पकड़े भी जाते हैं और छूटते भी हैं, जो कि खेल का एक स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन ऐसे आंकड़ों की सही गिनती और सही आकलन होना बहुत आवश्यक है. पूरी टीम फील्डिंग में अपना शत-प्रतिशत देती है और एक-दो मौकों को पूरी हार की वजह मानना सही नहीं है.



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