पटना: आज की इस स्टोरी में बकरी पालन करने वाले लोगों के लिए बड़े काम की और जरूरी सीख मिलेगी. दरअसल, बकरी पालन करने वाले लोग एक बड़ी गलती करते हैं. लोग महंगे से महंगे नस्ल की बकरी तो खऱीद लाते हैं लेकिन, जानकारी के अभाव में बकरी का घर बनवाने में कंजूसी कर जाते हैं. बकरी पालन करने वालों को इस बात का खास ध्यान रखने की जरूरत है कि बकरियों को किस तरह के शेड में रखा जा रहा है, वहां साफ-सफाई कैसी है और हवा आने-जाने की व्यवस्था कितनी बेहतर है. सफल पशुपालन के लिए पशुओं और जानवरों के रहने की जगह को बेहतरीन रखना बहुत जरूरी है. पशुओं के रहने की जगह में लापरवाही करने से पशुपालकों को भारी नुकसान पहुंच सकता है. बकरियां बीमार पड़ सकती हैं और कहें कि उनकी मौत भी हो सकती है. इस बारे में बिहार वेटनरी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत यादव ने लोकल 18 से महत्वपूर्ण बातें साझा की है.
उन्होंने बताया कि बकरी पालन शुरू करने वाले किसान अक्सर बकरियों के आवास प्रबंधन में कुछ गलतियां कर देते हैं. उन्होंने बकरियों के आवास प्रबंधन से जुड़ी कई अहम बातें बताई हैं, जिन्हें अपनाकर पशुपालक जानवरों में बीमारियों का जोखिम कम करने, साफ-सफाई बेहतर बनाने और अपने श्रम के साथ खर्च को कंट्रोल करने की दिशा में काम कर सकते हैं.
1. ऊंची जगह पर बनाएं बकरियों का शेड, नमी और बाढ़ वाले इलाकों से बचें
बकरियों के लिए आवास बनाते समय सबसे पहले जमीन का चुनाव करना चाहिए. शेड ऐसी जगह पर होना चाहिए जहां बारिश का पानी जमा न हो और बाढ़ आने की आशंका कम हो. निचले और नम इलाकों में घोंघे जैसे मध्यवर्ती पोषक जीवों के जरिए कुछ परजीवियों का प्रसार हो सकता है. ऐसे परजीवी बकरियों के पेट में पहुंचकर उन्हें बीमार कर सकते हैं. कुछ संक्रमणों में खून की कमी और गंभीर स्थिति में मौत का खतरा भी रहता है. इसलिए शेड के लिए ऊंची, सूखी और पानी की निकासी वाली जगह चुनना जरूरी है.
2. जमीन पर नहीं, रेज्ड प्लेटफॉर्म पर रखें बकरियां
डॉ. दुष्यंत यादव की मानें तो बकरियों को ऊंचे प्लेटफॉर्म पर रखना आवास प्रबंधन का एक उपयोगी तरीका है. इसके लिए बांस की मजबूत संरचना बनाई जा सकती है. इसे रेज्ड प्लेटफॉर्म कहा जाता है. प्लेटफॉर्म के नीचे पर्याप्त जगह छोड़ने से गोबर और गंदगी की सफाई करना आसान हो जाता है. ऊंचे प्लेटफॉर्म का फायदा यह है कि बकरियों का मल-मूत्र सीधे उनके रहने की जगह पर जमा नहीं होता. इससे सफाई में लगने वाला समय और मेहनत कम की जा सकती है. इसके अलावा लोहे के फ्रेम या बाजार में उपलब्ध प्लास्टिक प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, प्लेटफॉर्म मजबूत, सुरक्षित और बकरियों के पैरों के अनुकूल होना चाहिए.
3. गोबर और पेशाब की निकासी के लिए बनाएं अलग व्यवस्था
सिर्फ शेड को ऊंचा बना देना पर्याप्त नहीं है. उसके नीचे गोबर और पेशाब की निकासी का भी उचित इंतजाम होना चाहिए. इसके लिए ढलानदार फर्श या उचित निकासी व्यवस्था बनाई जा सकती है. इससे पेशाब एक ओर बहकर निकल जाए और गोबर को एक जगह इकट्ठा किया जा सके.
जहां ऐसी व्यवस्था संभव न हो, वहां प्लेटफॉर्म के नीचे नियमित सफाई की जानी चाहिए. शेड में गंदगी जमा रहने से दुर्गंध, नमी और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए आवास बनाते समय ही सफाई की सुविधा को ध्यान में रखना चाहिए.
4. शेड में हवा का रास्ता खुला रखें, गर्मी और अमोनिया से बचाएं
बकरियों के आवास में पर्याप्त हवा का आना-जाना जरूरी है. इसके लिए दरवाजे और खिड़कियां जालीदार रखी जा सकती हैं. शेड के सामने और पीछे हवा निकलने की व्यवस्था होने से क्रॉस वेंटिलेशन बेहतर होता है. अगर शेड में हवा का प्रवाह ठीक नहीं होगा, तो गोबर और पेशाब से निकलने वाली अमोनिया जैसी गैसें जमा हो सकती हैं. इससे बकरियों को सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
मच्छरों और दूसरे कीटों से बचाव के लिए जाली या मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, सर्दियों में ठंडी हवा से बचाने के लिए बाहर की ओर पर्दे लगाए जा सकते हैं. पर्दे इस तरह लगने चाहिए कि बकरियां उन्हें चबा न सकें और हवा का जरूरी प्रवाह पूरी तरह बंद भी न हो.
5. शेड के आसपास सफाई रखें, सांप-बिच्छू और शिकारी जानवरों से करें बचाव
बकरियों की सुरक्षा केवल शेड के अंदर तक सीमित नहीं होनी चाहिए. आसपास का इलाका भी साफ-सुथरा रखना जरूरी है. झाड़ियों, कूड़े और अनावश्यक सामान के ढेर में सांप-बिच्छू जैसे जीव छिप सकते हैं. इसके साथ ही शेड को इस तरह सुरक्षित बनाना चाहिए कि आवारा कुत्तों और अन्य शिकारी जानवरों से बकरियों को खतरा न हो. रात में पर्याप्त रोशनी और मजबूत घेराबंदी भी सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी है.
6. फर्श ऐसा बनाएं कि बकरियां फिसलें नहीं और गंदगी न फंसे
बकरियों के चलने वाले फर्श पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. फर्श बहुत चिकना नहीं होना चाहिए, क्योंकि फिसलने से बकरियों को चोट लग सकती है. साथ ही, उसमें गहरी दरारें भी नहीं होनी चाहिए. दरारों में गंदगी और कुछ परजीवियों के अंडे या अन्य संक्रमणकारी तत्व छिपे रह सकते हैं. इससे सफाई करना मुश्किल हो जाता है. अगर फर्श में दरारें हैं, तो उनकी मरम्मत कराना बेहतर है. जरूरत के अनुसार सफाई और पशु-चिकित्सक की सलाह से कीटाणुशोधन किया जा सकता है.
7. चूना, कीटाणुशोधन और जूतों की सफाई पर भी दें ध्यान
शेड की नियमित सफाई के साथ-साथ उचित कीटाणुशोधन भी जरूरी है. डॉ. दुष्यन्त यादव ने चूने और ब्लीचिंग पाउडर जैसी चीजों का उपयोग करने की सलाह दी. बाहरी लोगों या दूसरे पशु-आवासों से संक्रमण आने की आशंका को कम करने के लिए प्रवेश द्वार पर जूतों की सफाई की व्यवस्था भी की जा सकती है. इसके लिए पोटेशियम परमैंगनेट का घोल दरवाजे पर लगा सकते हैं.
8. एक शेड में जरूरत से ज्यादा बकरियां न रखें
बकरी पालन में एक और बड़ी गलती है, कम जगह में बहुत ज्यादा बकरियां रखना. अधिक भीड़ होने से बकरियों के आराम, हवा के प्रवाह, साफ-सफाई और बीमार पशुओं को अलग रखने में परेशानी होती है. इससे बीमारी फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है. इसलिए शेड में बकरियों की संख्या उसकी उपलब्ध जगह, उम्र, आकार और पालन पद्धति के अनुसार तय करनी चाहिए. केवल ज्यादा बकरियां रखने से मुनाफा नहीं बढ़ता. अगर जगह कम है और प्रबंधन ठीक नहीं है, तो बीमारी, मृत्यु और इलाज पर होने वाला खर्च कमाई को प्रभावित कर सकता है. इससे आप कम जगह में ज्यादा बकरियां रखकर जहां ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के बारे में सोच रहे थे वहीं आपकी इस लापरवाही से अगर बकरियां बीमार होने पाई तो उनके दवाई के खर्च में आपको उतना घाटा हो जाएगा. अगर कहीं बीमारी से जानवर मरने लगे तो समझिए की पूरा घाटा ही घाटा है. इस घाटे की रिकवरी भी मुश्किल होगी.