हमारी आकाशगंगा के केंद्र में सोने और लोहे का भंडार, मिला भारी धातुओं का खजाना
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अमेरिकी स्पेस एजेंसी के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने हमारी आकाशगंगा के विशालकाय ब्लैक होल सैजिटेरियस ए स्टार के चारों तरफ भारी धातुओं का बड़ा भंडार देखा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक गैस के रूप में मौजूद यह धातु सुपरनोवा विस्फोट से निकली है. इसमें सोना, लोहा, ऑक्सीजन और कार्बन शामिल हैं. इस खोज से पृथ्वी पर मौजूद भारी तत्वों के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी.
मिल्की वे के ब्लैक होल के पास मिला धातुओं का खजाना (AI Generared Image)
नई दिल्ली: हमारी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास भारी धातुओं का बड़ा जखीरा मिला है. जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के नए ऑब्जर्वेशन से वैज्ञानिकों को यह अनूठी जानकारी मिली है. मिल्की वे के इस विशालकाय ब्लैक होल को सैजिटेरियस ए स्टार के नाम से जाना जाता है. टेलीस्कोप ने ब्लैक होल के पास तैर रहे गैस के बादलों में भारी मात्रा में मेटल तत्वों की पहचान की है. खगोल विज्ञान में हाइड्रोजन और हीलियम से भारी हर तत्व को मेटल माना जाता है. इसमें ऑक्सीजन और कार्बन के साथ लोहे और सोने जैसे तत्व शामिल हैं.
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उन्होंने बताया कि इस रहस्य को समझने के लिए ब्लैक होल के आसपास मौजूद गैस और तारों के गुणों को समझना जरूरी है. यह ब्लैक होल अपने आकार के हिसाब से बहुत सुस्त माना जाता है.
ब्लैक होल के मुहाने पर मौजूद गैस के बादलों में आखिर क्या मिला है?
- जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज पॉइंट 2 पर चक्कर लगा रहा है. इस शक्तिशाली ऑब्जर्वेटरी ने ब्लैक होल के पास उठ रहे गैस के बादलों के हीट सिग्नेचर की बारीकी से पड़ताल की है. इस एनालिसिस से गैस बादलों में मौजूद भारी तत्वों की संरचना सामने आई है.
- रिसर्च में पता चला है कि गैस में मौजूद धातुओं का कंपोजिशन पास के कई तारों से बिल्कुल मेल खाता है. इससे साफ संकेत मिलता है कि ये तारे और गैस के बादल एक ही समय में पैदा हुए थे.
- जब कोई विशालकाय तारा अपनी उम्र पूरी करके सुपरनोवा बनता है, तो उसके भीतर न्यूक्लियर फ्यूजन से बनी भारी धातुएं अंतरिक्ष में बिखर जाती हैं. वही धातुएं बाद में नई पीढ़ी के तारों और ग्रहों का हिस्सा बनती हैं.
क्या पृथ्वी पर मौजूद सोने और लोहे का इस ब्लैक होल से कोई कनेक्शन है?
मैकगिल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है कि यह खोज दूर की आकाशगंगाओं में धातुओं के फैलाव को समझने में नया रास्ता खोलेगी. इससे यह राज भी खुलेगा कि पृथ्वी पर सोना और लोहे जैसे भारी तत्व कैसे पहुंचे. वैज्ञानिकों के मुताबिक भारी धातुओं की मौजूदगी गैस के ठंडा होने की रफ्तार को तय करती है. गैस जितनी जल्दी ठंडी होगी, ब्लैक होल उसे उतनी ही आसानी से अपने भीतर खींच सकेगा.
द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपी पिछली रिसर्च ने इस मामले में एक नई उलझन भी खड़ी कर दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि गैस का उत्सर्जन स्थानीय बादलों की स्थिति पर निर्भर करता है. इसलिए सिर्फ इस गैस के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि यह ब्लैक होल अतीत में कितनी बार एक्टिव रहा है.