Moong Mandi Rate: खेतों में पककर तैयार हुई मूंग की फसल, किसानों की नजर अब पैदावार के साथ मंडी के भाव पर

Moong Mandi Rate: खेतों में पककर तैयार हुई मूंग की फसल, किसानों की नजर अब पैदावार के साथ मंडी के भाव पर


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खेतों में पककर तैयार हुई मूंग की फसल, किसानों की नजर अब मंडी के भाव पर

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Jalore Moong Harvesting Tips : जालोर में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही मूंग की फसल पककर तैयार हो चुकी है. किसान खेतों में कटाई में जुट गए हैं और उन्हें अच्छी पैदावार के साथ बेहतर बाजार भाव मिलने की उम्मीद है. मानाराम ने बताया कि कटाई के समय मौसम साफ रहे तो फसल को संभालना आसान होता है और समय पर काम पूरा किया जा सकता है. मूंग की कटाई के बाद किसान फसल को सुखाने और दाने अलग करने की प्रक्रिया पूरी करते हैं.

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जालोर. अक्टूबर का महीना आते ही खेतों में मूंग की फसल पककर कटाई के लिए तैयार नजर आने लगी है. जालोर के कई इलाकों में किसान मूंग की कटाई में जुटे हैं. खेतों में कहीं फसल हरी तो कहीं सुनहरे रंग में नजर आ रही है. फसल पकने के साथ ही किसानों की निगाह अब समय पर कटाई और इसके बाद मिलने वाले बाजार भाव पर टिकी है. फसल तैयार होने के बाद खेतों में किसानों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं. किसान मौसम को देखते हुए समय पर कटाई पूरी करने में जुटे हैं.

मूंग कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है. यही वजह है कि कम पानी वाले इलाकों में किसान इसे खरीफ सीजन की उपयोगी फसल के तौर पर लेते हैं. फसल तैयार होने के बाद सही समय पर कटाई करना जरूरी होता है, ताकि ज्यादा पकने पर फलियों से दाने खेत में गिरने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. कटाई के बाद किसान फसल को अच्छी तरह सुखाते हैं और फिर दानों को अलग करने का काम किया जाता है.

किसानों को अच्छी पैदावार और बेहतर भाव की उम्मीद
किसान मानाराम ने लोकल 18 को बताया कि इस बार उन्होंने अपने खेत में मूंग की फसल बोई थी. अब फसल पककर तैयार हो गई है और कटाई का काम चल रहा है. उनके अनुसार, मूंग में दूसरी कई फसलों की तुलना में पानी की जरूरत कम रहती है. यही वजह है कि क्षेत्र के किसान इसे पसंद करते हैं. अब किसानों की उम्मीद अच्छी पैदावार के साथ मंडी में बेहतर भाव मिलने पर टिकी है.

किस आधार पर मिलता है किसानों को भाव
मानाराम ने बताया कि कटाई के समय मौसम साफ रहे तो फसल को संभालना आसान होता है और समय पर काम पूरा किया जा सकता है. मूंग की कटाई के बाद किसान फसल को सुखाने और दाने अलग करने की प्रक्रिया पूरी करते हैं. इसके बाद तैयार मूंग को मंडी तक पहुंचाया जाता है. मंडी में मूंग की गुणवत्ता, नमी और बाजार की स्थिति के आधार पर किसानों को भाव मिलता है. इसलिए किसान कटाई के साथ-साथ फसल की साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण पर भी ध्यान देते हैं. अच्छी तरह सूखी और साफ मूंग को बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाली फसल माना जाता है.

नमी और बारिश से फसल बचाने की चुनौती
अक्टूबर में मौसम में बदलाव भी देखने को मिलता है. ऐसे में तैयार फसल को नमी और अचानक होने वाली बारिश से बचाना किसानों के लिए जरूरी हो जाता है. कटाई के बाद मूंग को खुले में लंबे समय तक छोड़ने के बजाय किसान इसे सूखी और सुरक्षित जगह पर रखने की कोशिश करते हैं. समय पर कटाई और सही तरीके से भंडारण करने से फसल खराब होने की आशंका कम रहती है.



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