शिमला. राजधानी शिमला में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्टूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. मामले की जांच जारी है. हाल ही में डीआईजी रहे आईपीएस गांधी अधिकारी संजीव कुमार गांधी को हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा के प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्त किया था. वह 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.
पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उन्हें सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं के लिए सामान जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके लिए उन्हें आश्वासन दिया गया था कि पहले अपनी जेब से खर्च की गई राशि का बाद में भुगतान कर दिया जाएगा. कांस्टेबल ने व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए और संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए. शिकायत के मुताबिक, जांच के बाद बिलों को भुगतान के लिए स्वीकृति भी मिल गई थी.
वाउचर पर हस्ताक्षर करवाने के बाद भी नहीं मिला भुगतान
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने उन्हें बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए. उन्हें बताया गया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी. हालांकि, आरोप है कि हस्ताक्षर करने के बावजूद उन्हें पैसे नहीं मिले.
जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद जब कांस्टेबल ने अकाउंट ब्रांच से जानकारी ली, तो उन्हें पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में जमा नहीं हुई. इसके चलते उन्हें अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी.
फंड से ₹2.35 लाख की निकासी का आरोप
शिकायत के बाद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में जिला पुलिस के एक फंड से लगभग दो वर्षों के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया. आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है और फंड में धन की कमी हो गई थी.रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण होने के दौरान कथित तौर पर फंड की कमी पूरी करने के लिए कांस्टेबल के स्वीकृत बिलों की राशि संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दी गई. आरोप है कि यह राशि कांस्टेबल को देने के बजाय फंड में जमा की गई, जिससे उन्हें स्वीकृत भुगतान नहीं मिल सका.
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजों से संबंधित अनियमितताओं के तथ्य सामने आने के बाद पुलिस थाना सदर शिमला में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल मामले की जांच जारी है. आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होगी.