संजू सैमसन का तूफान, वैभव सूर्यवंशी को मौका देने की मांग पर लगा विराम
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Sanju Samson vs Vaibhav Sooryavanshi debate: संजू सैमसन ने क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ 226 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार अर्धशतकीय पारी खेली. उन्होंने अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए महज 5.5 ओवर में 93 रन जोड़कर टीम को धमाकेदार शुरुआत दिलाई. संजू की 33 गेंदों पर 67 रन कीह तूफानी और जिम्मेदार पारी ने वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की चल रही तमाम चर्चाओं और बहस पर पूरी तरह विराम लगा दिया है.
वैभव सूर्यवंशी से तुलना पर संजू सैमसन ने लगाया विराम. (BCCI/X)
नई दिल्ली. भारतीय टीम क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल मैदान पर जब 226 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी, तो क्रिकेट गलियारों में एक बार फिर उस युवा प्रतिभा को लेकर चर्चाएं गर्म थीं जिसे हर कोई मैदान पर देखना चाहता था. न्यूजीलैंड की धरती पर यह मुकाबला ऐतिहासिक था क्योंकि कीवी टीम ने भारत के खिलाफ टी20 क्रिकेट में पहली बार इतना बड़ा स्कोर खड़ा किया था. जवाब में भारतीय टीम के सामने भी यह पहली बार था जब वह न्यूजीलैंड के खिलाफ किसी टी20 मैच में इतने बड़े लक्ष्य का दबाव झेल रही थी. ऐसे में पारी की शुरुआत करने उतरे संजू सैमसन ने अपनी धमाकेदार बैटिंग से सभी आलोचकों और समर्थकों को करारा जवाब दिया. पिछले कुछ समय से यह बहस लगातार चल रही थी कि क्या संजू सैमसन की जगह युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना चाहिए. लेकिन क्राइस्टचर्च की इस मुश्किल और उछाल भरी पिच पर संजू ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने इस पूरी बहस को फिलहाल के लिए पूरी तरह शांत कर दिया.
संजू सैमसन (Sanju Samson) और अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) की ओपनिंग जोड़ी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. कीवी गेंदबाजों के पास 225 रन का बचाव करने का आत्मविश्वास था, लेकिन संजू के इरादे कुछ और ही थे. उन्होंने क्रीज पर कदम रखते ही अपने ट्रेडमार्क शॉट्स खेलने शुरू किए और मैदान के चारों ओर रन बटोरे. संजू ने अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए महज 5.5 ओवर में 93 रन की तूफानी साझेदारी कर डाली. संजू ने अपनी पारी के दौरान सिर्फ 23 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. उन्होंने 33 गेंदों पर 8 चौकों और चार छक्कों की मदद से 67 रन की पारी खेली. यह पारी केवल रनों के लिहाज से ही खास नहीं थी, बल्कि यह दबाव की स्थिति में खेली गई एक ऐसी पारी थी जो बड़े खिलाड़ियों की पहचान होती है. न्यूजीलैंड की विदेशी परिस्थितियों में जहां बड़े-बड़े धुरंधर संघर्ष करते नजर आते हैं, वहां संजू ने शॉर्टपिच गेंदों और स्विंग का बखूबी सामना किया.
अनुभव और युवाओं की रेस पर लगा विराम
इस शानदार प्रदर्शन के बाद संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी की तुलना को लेकर चल रही बहस पर विराम लगना लाजिमी है. पिछले कुछ हफ्तों से घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी आक्रामक बैटिंग से तहलका मचाने वाले युवा वैभव सूर्यवंशी को लेकर सोशल मीडिया से लेकर एक्सपर्ट्स के बीच यह मांग उठ रही थी कि उन्हें भारत की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना चाहिए. वैभव की बेखौफ बल्लेबाजी शैली ने हर कोई को प्रभावित किया है और भविष्य के सुपरस्टार के रूप में उनकी चर्चा आम है. लेकिन अनुभव और मौजूदा फॉर्म के बीच का अंतर तब साफ दिखाई देता है जब टीम के सामने 226 रन जैसा पहाड़ जैसा लक्ष्य हो. क्राइस्टचर्च की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक युवा खिलाड़ी को उतारना जोखिम भरा हो सकता था, और टीम प्रबंधन ने संजू के अनुभव पर भरोसा जताकर जो फैसला लिया, उसे संजू ने अपनी इस यादगार पारी से पूरी तरह सही साबित कर दिखाया.
संजू की निरंतरता और टीम की रणनीति
संजू सैमसन के करियर की यह खूबी रही है कि वह जब भी लय में होते हैं, तो उनकी बल्लेबाजी देखने लायक होती है. हालांकि उन्हें अपनी निरंतरता को लेकर अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, और यही वजह है कि जब भी उनका बल्ला खामोश होता है, तो वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों के नाम पर चर्चा शुरू हो जाती है. यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट के लिए एक सकारात्मक संकेत है जहां बेंच पर बैठे युवा खिलाड़ी मुख्य खिलाड़ियों पर दबाव बनाए रखते हैं. लेकिन जब बड़े मैचों की बात आती है, तो इंटरनेशनल स्टेज का अनुभव और दबाव से निपटने की कला ही काम आती है. संजू ने जिस तरह से क्राइस्टचर्च के मैदान पर कीवी गेंदबाजों के खिलाफ रन बटोरे, उसने यह साबित कर दिया कि वह अभी भी टीम की प्राथमिक योजनाओं में सबसे आगे हैं और उनकी काबिलियत पर सवाल उठाने वालों को उन्होंने अपने बल्ले से जवाब दे दिया है.
भविष्य के लिए उज्ज्वल संकेत
वैभव सूर्यवंशी का भविष्य भारतीय क्रिकेट में बेहद उज्ज्वल है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि आने वाले समय में वह देश के लिए बड़े मैच विनर साबित होंगे. उनकी आक्रामक शैली और निडर रवैया उन्हें आधुनिक टी20 क्रिकेट का आदर्श खिलाड़ी बनाता है. लेकिन अनुभव का अपना एक अलग महत्व होता है जो एक रात में नहीं आता. संजू सैमसन ने अपने लंबे इंटरनेशनल करियर में उतार-चढ़ाव देखे हैं और वह दबाव की परिस्थितियों से निकलना अच्छी तरह जानते हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ इस मैच में जिस तरह से उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और अपनी पारी को आगे बढ़ाया, वह इस बात का सुबूत था कि बड़े मंच पर अनुभवी खिलाड़ियों की क्या अहमियत होती है. इस पारी ने संजू को न सिर्फ आलोचकों के जवाब देने का मौका दिया बल्कि टीम में उनकी जगह को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर भी पूरी तरह विराम लगा दिया.