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Dubai love story Uttarakhand marriage: सरहदों की बंदिशें प्रेम के आगे हमेशा छोटी साबित हुई हैं, और इसकी एक बेहद खूबसूरत नज़ीर पेश की है बागेश्वर के नवीन परिहार और थाईलैंड की मोरियां ने. सात समंदर पार दुबई के एक होटल में शुरू हुई दोस्ती जब मोहब्बत में बदली, तो दोनों ने जीवनभर के सफर के लिए देवभूमि की पावन धरा को चुना. विजयदशमी के पावन पर्व पर हल्द्वानी में कुमाऊंनी रीति-रिवाज, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोनों परिणय सूत्र में बंध गए. विदेशी दुल्हन और पहाड़ी दूल्हे के इस अनूठे मिलन की चर्चा अब हर जुबान पर है.
Dubai love story Uttarakhand marriage: कहते हैं कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती है. दो अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के बीच भी प्रेम हो सकता है. इसकी खूबसूरत मिसाल बागेश्वर जिले के उड़लगांव निवासी नवीन परिहार और थाईलैंड की रहने वाली मोरियां ने पेश की है. दुबई में शुरू हुई दोनों की प्रेम कहानी अब शादी के बंधन में बंध चुकी है. विजयदशमी के मौके पर दोनों ने कुमाऊंनी रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे लिए, और जीवनभर साथ रहने का फैसला लिया. अब इस शादी की चर्चा पूरे जिले में हो रही है. शादी के बाद नवदंपती का गांव में जोरदार स्वागत हुआ, अब गांव में पार्टी की तैयारियां चल रही हैं.
दुबई में हुई मुलाकात, दोस्ती प्यार में बदली
जिले के उड़लगांव निवासी 32 वर्षीय नवीन परिहार पिछले करीब 11 साल से दुबई में काम कर रहे हैं. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई रवाईखाल क्षेत्र से पूरी की. बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का एक साल का कोर्स किया, और रोजगार की तलाश में विदेश चले गए. इसी दौरान उनकी मुलाकात थाईलैंड निवासी 27 वर्षीय मोरियां से हुई. मोरियां पेशे से शेफ हैं. दोनों ने करीब दो साल तक एक साथ काम किया. साथ काम करते हुए दोनों के बीच बातचीत और मेलजोल बढ़ा. अंग्रेजी भाषा के माध्यम से एक-दूसरे को समझते हुए उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. इसके बाद दोनों ने जीवनभर साथ रहने का फैसला किया.
हल्द्वानी में कुमाऊंनी परंपराओं के साथ विवाह
नवीन और मोरियां ने अपने विवाह के लिए उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को चुना. नवीन का पैतृक गांव उड़लगांव में होने और परिवार व विदेश से आए मेहमानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हल्द्वानी में विवाह आयोजित किया गया. नवीन की बहन के घर देवलचौड़ में विजयदशमी के दिन कुमाऊंनी पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न कराया.
इस शादी में थाईलैंड से मोरियां के पिता, भाई और भाभी भी शामिल हुए. विदेशी मेहमानों ने भारतीय विवाह परंपराओं को करीब से देखा और पारिवारिक समारोह का हिस्सा बने. कुमाऊंनी रीति-रिवाज मोरियां के लिए नए थे, लेकिन उन्होंने उत्साह के साथ रस्मों में भाग लिया. विवाह की परंपराओं और उनके अर्थ को समझाने के लिए अंग्रेजी अनुवादक की मदद ली गई. दोनों परिवारों की मौजूदगी में संपन्न हुए इस विवाह ने दो अलग-अलग संस्कृतियों को एक रिश्ते में जोड़ दिया.
अब गांव में होगा नवदंपती का स्वागत
हल्द्वानी में विवाह संपन्न होने के बाद नवीन अपने परिवार के साथ दुल्हन मोरियां को लेकर घर पहुंचे. अब उड़लगांव में नवदंपती के स्वागत और पारिवारिक पार्टी को लेकर उत्साह है. स्थानीय स्तर पर इस शादी को दो संस्कृतियों के मिलन के रूप में देखा जा रहा है. दुबई में शुरू हुआ रिश्ता अब उत्तराखंड के पहाड़ों तक पहुंच गया है. नवीन और मोरियां की यह कहानी बताती है कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच भी आपसी समझ, दोस्ती और विश्वास से जीवनभर का रिश्ता बनाया जा सकता है.