Jio IPO: Moody’s समेत 5 ब्रोकरेज फर्म्स ने दी सब्सक्राइब की सलाह, जानें वैल्यूएशन और ग्रोथ पर क्या है राय

Jio IPO: Moody’s समेत 5 ब्रोकरेज फर्म्स ने दी सब्सक्राइब की सलाह, जानें वैल्यूएशन और ग्रोथ पर क्या है राय


रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अब निवेशकों के साथ-साथ ब्रोकरेज फर्म और एनालिस्ट के बीच भी पसंद किया जा रहा है. कंपनी इस इश्यू के जरिए 30,213 करोड़ रुपये तक जुटाने जा रही है. आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा गया है. इस इश्यू की खास बात यह है कि इसमें नए शेयर जारी किए जा रहे हैं और इससे मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होगा. रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इसे रिलायंस इंडस्ट्रीज की क्रेडिट स्थिति के लिए पॉजिटिव कदम बताया है.

जियो के आईपीओ को लेकर कई ब्रोकरेज फर्मों ने भी पॉजिटिव राय दी है और निवेशकों को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है. इसकी बड़ी वजह कंपनी का कस्टमर, टेलीकॉम बाजार में मजबूत स्थिति और ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे सेक्टर में विस्तार की संभावनाएं हैं. हालांकि, कारोबार की वृद्धि के साथ कंपनी के लिए निवेश खर्च, नियमों में बदलाव और नई सर्विसेस से कमाई बढ़ाने की चुनौती भी अहम रहेगी. ऐसे में आईपीओ को समझने के लिए मूडीज की राय और अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों के एनालिसिस पर नजर डालना जरूरी है.

Moody’s की राय

रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए क्रेडिट के लिहाज से पॉजिटिव है. आईपीओ से मिलने वाली रकम में से करीब 27,500 करोड़ रुपये रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इससे ब्याज का खर्च कम करने और टेलीकॉम नेटवर्क व डिजिटल सर्विसेस में भविष्य के निवेश के लिए वित्तीय गुंजाइश बढ़ाने में मदद मिलेगी.

Moody’s का अनुमान है कि अगले दो सालों में रिलायंस का एडजस्टेड नेट डेट-टू-EBITDA रेश्यो 1 से 1.2 गुना के आसपास रह सकता है, जो उसकी 3 गुना की डाउनग्रेड लीमिट से काफी नीचे है. हालांकि, एजेंसी के मुताबिक आईपीओ का बड़ा फायदा निवेश के लिए वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ना है, न कि निकट अवधि में कर्ज के रेश्यो में कोई बड़ा बदलाव. लिस्टिंग के बाद भी रिलायंस का जियो पर कंट्रोल बना रहेगा.

ब्रोकरेज फर्मों ने क्यों दी सब्सक्राइब की सलाह?

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर कई ब्रोकरेज फर्मों का रुख पॉजिटिव है. GEPL Capital, Ventura Securities, Emkay Global, Swastika Investmart और Geojit Financial Services ने इश्यू को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है.

Emkay Global: ब्रोकरेज के मुताबिक, जियो की बाजार में मजबूत स्थिति, कीमत तय करने की क्षमता, कारोबार बढ़ाने के अवसर और बेहतर प्लान रिकॉर्ड को देखते हुए आईपीओ की कीमत उचित लगती है. 5G में बड़े निवेश का दौर धीरे-धीरे कम होने से कंपनी की नकदी पैदा करने की क्षमता भी मजबूत हो सकती है.

PhilipCapital: ब्रोकरेज का मानना है कि टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी, प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU) में सुधार और नई डिजिटल सर्विसेस से आय बढ़ने की संभावना कंपनी के भविष्य के मुनाफे को सहारा दे सकती है. इसके आधार पर वैल्यूएशन बेहतर दिखाई देता है.

SBICAPS: इसके अनुसार, आईपीओ की कीमत कंपनी के आकार, कमाई में वृद्धि, तकनीकी क्षमता और लंबी अवधि में कारोबार से अधिक कमाई करने की संभावनाओं को दर्शाती है. कर्ज चुकाने से ब्याज खर्च घटने और भविष्य के निवेश के लिए वित्तीय लचीलापन बढ़ने की उम्मीद है.

जियो की तकनीक और ब्रॉडबैंड कारोबार पर नजर

SMC Global Securities ने जियो की अपनी तकनीक विकसित करने की क्षमता को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अहम बढ़त बताया है. कंपनी ने 4G, 5G, 6G, AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं. इससे नई सेवाएं विकसित करने और डिजिटल स्ट्रक्चर पर कंट्रोल बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

जून 2026 तक जियो के 53.33 करोड़ ग्राहक थे और देश के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में इसकी हिस्सेदारी करीब 60% थी. कंपनी का फोकस 2G ग्राहकों को 4G और 5G पर लाने, JioFiber और JioAirFiber के जरिए ब्रॉडबैंड कारोबार बढ़ाने और एंटरप्राइज AI सर्विसेस से कमाई बढ़ाने पर है. ओटीटी, क्लाउड स्टोरेज और गेमिंग जैसी सेवाओं को भी टेलीकॉम प्लान के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर तलाशे जा रहे हैं. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ रिलायंस के डिजिटल कारोबार को अलग मार्केट वैल्यू दिलाने और भविष्य के निवेश के लिए फंड जुटाने का मौका है.

(डिस्क्लेमर- नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)



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