किलर ड्रोन स्वार्म और फाइटर जेट साथ भरेंगे उड़ान, वायुसेना ने पेश किया रोडमैप, रेस में 100 से ज्यादा कंपनियां

किलर ड्रोन स्वार्म और फाइटर जेट साथ भरेंगे उड़ान, वायुसेना ने पेश किया रोडमैप, रेस में 100 से ज्यादा कंपनियां


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एयरफोर्स का नया वार प्लान: किलर ड्रोन स्वार्म और फाइटर जेट साथ भरेंगे उड़ान

Agency:एजेंसियां

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भारतीय वायुसेना ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में डिफेंस इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के साथ अहम बैठक की. इसमें 16 अलग-अलग ड्रोन सिस्टम्स का रोडमैप सामने रखा गया है. एयर मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी ने कहा कि सेना को ड्रोन तकनीक में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना होगा. वायुसेना अब फाइटर जेट्स के साथ ड्रोन स्वार्म उड़ाने की तैयारी में है.

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वायुसेना ने 16 तरह के घातक ड्रोन का मेगा रोडमैप किया पेश. (AI Generated Image)

नई दिल्ली: भविष्य के हवाई अभियानों में मानवरहित और ऑटोमेटेड प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं. इसी आधुनिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारतीय वायुसेना ने अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है. वायुसेना ने मानवरहित और ऑटोनॉमस प्रणालियों को लेकर अपना लंबा रोडमैप देश के डिफेंस सेक्टर के सामने रख दिया है. इस पूरे प्लान में 16 प्रकार के आधुनिक ड्रोन सिस्टम शामिल हैं. इन सभी सिस्टम्स को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष बैठक में रक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ 100 से ज्यादा उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए. वायुसेना का मकसद देश के भीतर ही आधुनिक तकनीक तैयार करना है. एयरफोर्स अब पारंपरिक लड़ाकू विमानों के साथ ड्रोन की ताकत को जोड़कर आसमान में अभेद्य दीवार खड़ी करना चाहती है.

वायुसेना के 16 ड्रोन सिस्टम को किन चार श्रेणियों में बांटा गया है?

आधुनिक युद्ध में सिर्फ पारंपरिक फाइटर जेट्स के भरोसे जंग नहीं लड़ी जा सकती. यही वजह है कि वायुसेना ने अपनी प्राथमिकताओं का दायरा बहुत बड़ा कर दिया है. वायुसेना के नए रोडमैप में 16 तरह के अलग-अलग सिस्टम्स को चिन्हित किया गया है. इन्हें रणनीतिक और अभियानगत के अलावा सामरिक और कम लागत वाली प्रणालियों में बांटा गया है.

यह रोडमैप असल में 14 सितंबर 2026 को पोखरण में हुए ड्रोनाथॉन कार्यक्रम का अगला चरण है. अब इस पूरी रूपरेखा को एक बुकलेट के जरिए स्टार्टअप्स और एमएसएमई तक औपचारिक तौर पर पहुंचाया गया है. इसके जरिए देश के युवा इनोवेटर्स को सीधे यह समझाया गया है कि वायुसेना को आने वाले दिनों में किस तरह के हथियारों और गैजेट्स की जरूरत पड़ने वाली है.

भारतीय वायुसेना ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इंडस्ट्री आउटरीच प्रोग्राम आयोजित किया. (Photo : Ministry of Defence)

मानवरहित विमानों और फाइटर जेट्स की जोड़ी कैसे बदलेगी जंग का रुख?

भविष्य के अभियानों में मानवयुक्त और मानवरहित विमान एक साथ मिलकर हमला बोलेंगे. एयरफोर्स की योजना ऐसे नेटवर्क वाले सिस्टम तैयार करने की है, जहां लड़ाकू विमान ड्रोन के झुंड को सीधे निर्देश दे सकें. इससे सीमा पार बैठे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित किया जा सकेगा.

विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग जगत को बताया गया कि वायुसेना को स्वदेशी प्रोपल्शन और ऑटोनॉमस सॉफ्टवेयर की तुरंत जरूरत है. अगर यह तकनीक देश में बनेगी, तो किसी भी विदेशी सप्लायर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे किसी भी आपात स्थिति में हथियारों की सप्लाई लाइन कभी बाधित नहीं होगी.
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