Khandwa: निहत्था रावण…9 सिर भी नहीं थे, नाराज लोगों ने पुतले के कपड़े फाड़े और तोड़फोड़ के बाद लगा दी आग

Khandwa: निहत्था रावण…9 सिर भी नहीं थे, नाराज लोगों ने पुतले के कपड़े फाड़े और तोड़फोड़ के बाद लगा दी आग


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Khandwa News: खंडवा के छनेरा में दशहरे पर रावण दहन कार्यक्रम के दौरान भारी हंगामा हो गया. रावण के पुतले में दस सिर न होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और तोड़फोड़ कर दी गई. नगर परिषद सीएमओ ने सफाई में ई-टेंडर प्रक्रिया और स्थानीय ठेकेदार को 35 हजार का ऑर्डर देने की बात कही है.

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खंडवा में नाराज लोगों ने रावण के पुतले में की तोड़फोड़.

खंडवा: जिले में दशहरे पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम विवादों में घिर गया है. छनेरा स्थित स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जमकर हंगामा हुआ. यहां रावण के पुतले का स्वरूप सही नहीं था और उसमें दस सिर भी नहीं बनाए गए थे. इस अव्यवस्था को देखकर मौके पर मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क गया.

मंच से उठे भ्रष्टाचार के आरोप
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने मंच से ही अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने आयोजन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका जताई. साथ ही उन्होंने नगर परिषद द्वारा किए जाने वाले भुगतान की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई. विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि रावण दहन की औपचारिक शुरुआत से पहले ही उपद्रव शुरू हो गया. नाराज लोगों ने रावण के पुतले में जमकर तोड़फोड़ की और उसके कपड़े तक फाड़ दिए. स्थिति बिगड़ने के कारण आयोजक रावण का केवल आधा धड़ ही जला सके.

हिंदू महासभा ने बनाई दूरी
हंगामा बढ़ने के बाद अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है. संगठन ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया. इसमें स्पष्ट किया गया कि इस कार्यक्रम के आयोजन से उनका किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है.

नगर परिषद सीएमओ ने दी सफाई
पुतले के स्वरूप और अव्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर नगर परिषद के सीएमओ ने अपनी सफाई पेश की है. सीएमओ ने बताया कि रावण निर्माण की प्रक्रिया नियमानुसार शुरू की गई थी. इसके लिए कार्यक्रम से 15 दिन पहले ई-टेंडर जारी किया गया था, लेकिन कोई भी ठेकेदार सामने नहीं आया.

जब दशहरे में केवल तीन दिन शेष रह गए, तब खंडवा के एक ठेकेदार को वर्क ऑर्डर दिया गया. हालांकि, बारिश के कारण तैयार किया जा रहा पुतला पूरी तरह गीला हो गया और खराब हो गया. इसके बाद नगर परिषद ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाई. स्थानीय ठेकेदार नित्तू से 35 हजार रुपए में दो रावण बनवाने की बात तय हुई. हालांकि, कम समय मिलने के कारण पुतले अपेक्षित स्वरूप में तैयार नहीं हो पाए.

जांच को लेकर उठे सवाल
दशहरे जैसे बड़े और पारंपरिक आयोजन में पुतलों की खराब गुणवत्ता और अव्यवस्था ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि इन तैयारियों की अंतिम जिम्मेदारी किसकी थी और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी.



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