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करवा चौथ पूजा सुबह या शाम को? जानें उपवास के नियम, पतियों के लिए खास बात
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Karwa Chauth 2026 Niyam: करवा चौथ व्रत अश्विन कृष्ण चतुर्थी तिथि को रखते हैं. इसमें सुहागन महिलाएं पति के लिए व्रत रखती हैं. इसमें पूजा सुबह होती है या शाम को? इस व्रत में फल, दूध ग्रहण कर सकते हैं या नहीं? व्रत कब से कब तक रखते हैं? आपको पहली बार करवा चौथ व्रत रखना है तो जान लें इसके 9 नियम.
करवा चौथ व्रत के नियम क्या हैं? (Photo: AI)
Karwa Chauth 2026 Niyam: करवा चौथ का व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए रखती हैं. इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. करवा चौथ के दिन सूर्योदय से व्रत प्रारंभ होता है और चंद्रोदय के बाद पारण से खत्म होता है. कुछ स्थानों पर करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक होता है. जिनको पहली बार करवा चौथ का व्रत रखना है तो उनको व्रत और पूजा के नियमों के बारे में जानना चाहिए. जैसे करवा चौथ की पूजा दिन में होगी या शाम को? निर्जला व्रत में फल खा सकते हैं? आइए जानते हैं करवा चौथ के नियमों के बारे में.
करवा चौथ के नियम
- आपको पहली बार करवा चौथ का व्रत रखना है तो आप जान लें कि इसमें माता गौरी, गणेश जी और भगवान शिव की पूजा करते हैं. मां गौरी अखंड सौभाग्यवती हैं, उनकी कृपा से ही आपको सौभाग्य की प्राप्ति होगी.
- करवा चौथ व्रत 12 घंटे से अधिक समय का होता है. इसका व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखते हैं.
- व्रत के समय में जल ग्रहण नहीं करते हैं, इस वजह से यह निर्जला उपवास होता है. 12 से 13 घंटे तक यानि जब तक चंद्रमा की पूजा करके अर्घ्य न दे दिया जाए, तब तक पानी नहीं पीते हैं.
- कुछ लोगों का सवाल होता है कि व्रत में जल नहीं पीना है तो क्या फल आदि खा सकते हैं? जब जल का सेवन वर्जित है तो फिर फल, दूध या अन्य चीजें ग्रहण करने का सवाल ही नहीं है. इसमें आपको कुछ नहीं खाना है.
- पति के लिए आप निर्जला व्रत रख रही हैं तो इस दिन पति को भी चाहिए कि वो आपका साथ दें. वे भी उपवास रखें या सात्विक आहर का पालन करें.यह भी पढ़ें: Karwa Chauth 2026 Date: करवा चौथ कब है? 13 घंटे 46 मिनट का होगा निर्जला व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त, अर्घ्य देने का समय, पारण
- यदि आप बीमार हैं या गर्भवती हैं तो आपके लिए व्रत के नियमों में छूट है. आप फल, जल, दूध आदि ग्रहण करके व्रत रखें. ऐसा करने से आपके मन में दोष लगने का अपराध बोध हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है. ईश्वर भाव के भूखे हैं, न कि आपकी विधियों के. ऐसी विधियां इसलिए बनाई गई हैं कि कलियुग में सतयुग या त्रेतायुग जैसा तप नहीं कर सकते हैं, तो एक दिन कठिन व्रत और नियम से पुण्य लाभ प्राप्त कर सकें.
- व्रत को शुरू करने से पहले सरगी खाने की परंपरा है. करवा चौथ को आप सूर्योदय से पहले फल, दही, पोहा आदि खा लें. नारियल, चाय या कॉफी पीनी है तो पी लें. उसके बाद सूर्योदय से आपका निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा.
- करवा चौथ की पूजा शाम के समय में करते हैं. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल प्रारंभ होता है, उस समय मां गौरी, गणेश जी और भगवान शिव की पूजा होगी.
- चंद्रोदय के समय व्रती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य दें. उसके बाद ही जीवनसाथी के हाथों जल ग्रहण करके पारण करें. जिनके यहां अगले दिन सूर्योदय बाद पारण होता है, वे उस अनुसार ही करें.