Jaishankar-Marco Rubio Terrorism: इशारों-इशारों में जयशंकर ने रुबियो को समझा दिया न आतंकवाद सहेंगे न गुनहगारों छोड़ेंगे, तिलमिला जाएगा पाकिस्तान


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Jaishankar-Marco Rubio Terrorism: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका-भारत की डील के लिए मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की नीति आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा हमारा अधिकार है अपने सहयोगियों से भी भारत सख्त रुख की अपेक्षा रखता है.

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इशारों-इशारों में जयशंकर ने रुबियो को समझा दिया, आतंकियों को नहीं छोड़ेगा भारतZoom

आतंकवाद के खिलाफ नहीं झुकेगा भारत. (फोटो: Reuters)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है. उन्होंने अमेरिका से भी आतंकवाद के प्रति सख्त रुख बनाए रखने की अपेक्षा जताई. इस मौके पर जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से मुंबई के ताज होटल स्थित 26/11 आतंकी हमले के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने की सराहना की.

मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में आयोजित ‘फ्रीडम 250’ रिसेप्शन में जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों और बदलते वैश्विक परिदृश्य पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे. जयशंकर ने कहा कि 26/11 स्मारक पर रुबियो का श्रद्धांजलि देना मुंबई और पूरे भारत के लिए सम्मान की बात है.

आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं 

उन्होंने आतंकवादी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का भी स्वागत किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा भारत की नीति का अहम हिस्सा है और इस मुद्दे पर किसी तरह की नरमी स्वीकार्य नहीं है. विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है. ऐसे में प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रहा है. उन्होंने जोर दिया कि भारत और अमेरिका को अपने साझा हितों का विस्तार करना चाहिए, ताकि दोनों देशों के रिश्ते अधिक मजबूत हो सकें.

पाकिस्तान की छाती पर लोटेंगे सांप 

जयशंकर ने इससे पहले अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान भी साफ किया था कि अगर भारत-अमेरिका के बीच आगे सहयोग जारी रहता है, तो जरूरी है कि वो उसकी आतंकवाद के प्रति प्रतिबद्धता को समझे. ये बयान इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पिछले एक साल से अमेरिका का रुख पाकिस्तान को लेकर काफी नरम हुआ है, जबकि आतंकवाद के मामले में भारत के साथ उसके रिश्ते बिगड़े हैं. फिलहाल तो इसी मामले को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता भी बंद है.

भारत-अमेरिका के ऐतिहासिक संबंध 

जयशंकर के मुताबिक व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं. नियमित बातचीत और साझा प्राथमिकताओं पर सहमति दोनों देशों के लिए नए रास्ते खोल सकती है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना भी दोनों देशों का महत्वपूर्ण साझा उद्देश्य है. भारत-अमेरिका संबंधों के ऐतिहासिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिकों ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया था. आजादी के बाद बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा और तकनीक में अमेरिकी सहयोग ने भारत के विकास में योगदान दिया. वहीं, भारतीय प्रतिभाओं ने अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद दोनों देशों की साझेदारी लगातार व्यापक हुई है.



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