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दुधवा नेशनल पार्क एक नवंबर से सैलानियों के लिए खुलने जा रहा है. पर्यटक बाघ, तेंदुआ, गैंडा और हिरण समेत विभिन्न वन्यजीवों के दीदार कर सकेंगे. तराई के घने जंगलों, प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मशहूर दुधवा नेशनल पार्क एक बार फिर सैलानियों के स्वागत के लिए तैयार है. एक नवंबर से दुधवा का नया पर्यटन सत्र शुरू होने जा रहा है. अगर आप भी बाघ, तेंदुआ, गैंडा, हाथी, भालू और हिरण जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना चाहते हैं तो दुधवा नेशनल पार्क की सैर की योजना बना सकते हैं.
तराई के घने जंगलों, प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मशहूर दुधवा नेशनल पार्क एक बार फिर सैलानियों के स्वागत के लिए तैयार है. एक नवंबर से दुधवा का नया पर्यटन सत्र शुरू होने जा रहा है. अगर आप भी बाघ, तेंदुआ, गैंडा, हाथी, भालू और हिरण जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना चाहते हैं तो दुधवा नेशनल पार्क की सैर की योजना बना सकते हैं.
दुधवा की पहचान केवल बाघों और गैंडों तक सीमित नहीं है. यहां फैले घने साल के जंगल, घास के विशाल मैदान, जलस्रोत और जैव विविधता प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं. जंगल में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहती है. सर्दियों की शुरुआत के साथ यहां का प्राकृतिक वातावरण और भी मनमोहक हो जाता है.
दुधवा में रॉयल बंगाल टाइगर, एक सींग वाले गैंडे, हाथी, तेंदुए, हिरणों की विभिन्न प्रजातियों और अनेक प्रकार के पक्षियों का प्राकृतिक आवास है. जंगल सफारी के दौरान पर्यटक वन क्षेत्र की सुंदरता को करीब से देख सकते हैं। हालांकि, वन्यजीवों का दिखाई देना मौसम, उनके प्राकृतिक व्यवहार और जंगल में उनकी मौजूदगी पर निर्भर करता है.
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जंगल की पगडंडियां, ऊंचे साल के पेड़, घास के मैदान और प्राकृतिक जलस्रोत सफारी के अनुभव को यादगार बनाते हैं. पक्षियों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है. यहां स्थानीय पक्षियों के साथ प्रवासी पक्षियों को देखने का अवसर मिल सकता है. कैमरे के शौकीन लोग भी प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों और पक्षियों की तस्वीरें लेने के लिए दुधवा पहुंचते हैं.
लखनऊ से दुधवा नेशनल पार्क घूमने आना चाहते हैं तो सड़क मार्ग से यात्रा कर सकते हैं. लखनऊ से लखीमपुर खीरी होते हुए दुधवा क्षेत्र तक पहुंचने के लिए बस और निजी वाहन का विकल्प उपलब्ध रहता है. यात्रा की योजना बनाने से पहले बस के मार्ग, समय और दुधवा तक पहुंचने वाले अंतिम साधन की जानकारी जरूर कर लें. सीधे दुधवा तक बस सेवा उपलब्ध होने से दुधवा नेशनल पार्क आने वाली सैलानियों को सहूलियत मिलती है. दुधवा नेशनल पार्क उन लोगों के लिए खास जगह है जो शहर की भीड़भाड़ से दूर प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय बिताना चाहते हैं. बच्चों और युवाओं के लिए भी यह यात्रा वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरण के महत्व को समझने का अच्छा अवसर बन सकती है. 1 नवंबर से सैलानियों के लिए दुधवा नेशनल पार्क खोल दिया जाएगा वन्य जीव दीदार कर सकेंगे.
भारत में कुल आठ प्रजातियों के हिरण पाए जाते हैं, जिनमें से पांच प्रजातियां दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में मौजूद हैं. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग यहां वन्यजीवों के दीदार के लिए पहुंचते हैं. दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में बारहसिंगा पाया जाता है. यह एक सुंदर हिरण की प्रजाति है. बारहसिंगा अपने नाम के लिए जाना जाता है बारहसिंगा के आमतौर पर 10 से 14 सींग होती है.
दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली बार गिद्धों की सात प्रजातियां देखी गई हैं. भारत में गिद्धों की केवल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से सात प्रजातियों का एक साथ दुधवा नेशनल पार्क में देखा जाना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है. जिन प्रजातियों के गिद्ध देखे गए, उनमें इंडियन वल्चर, व्हाइट रम्प्ड वल्चर, स्लेंडर बिल्ड वल्चर, हिमालयन वल्चर, सिनेरियस वल्चर, यूरेशियन ग्रिफॉन और रेड हेडेड वल्चर शामिल हैं.