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रोजी-रोजगार के नए तौर-तरीके बदल गए हैं. अब चीजें काफी आधुनिक हो गई हैं. ऐसे में कई लोगों के लिए नए काम को समझना और करना मुश्किल होता है. ऐसे में लोग अपने घर-परिवार में लंबे समय से होने वाले काम धंधे को देखकर सीख जाता है और उसी में लग जाता है. छपरा में एख गांव ऐसा है जहां 80 प्रतिशत लोग एक ही तरह का काम करते हैं और इसी से अपना गुजारा करते हैं.
विशाल कुमार/छपरा: बिहार के छपरा के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों ने अपने हाथ के हुनर को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. इससे होने वाली कमाई के जरिए लोग अपना घर-परिवार चलाते हैं. छपरा के गरखा प्रखंड के बिन टोली गांव में लगभग 80% लोग बांस से तैयार होने वाला प्रोडक्ट बनाते हैं. इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पूरे देश में होती है. सबसे खास बात यह है कि बिहार में छठ महापर्व में जो दौरा उपयोग किया जाता वह भी बांस से ही बनता है. यहां के लोग दौरा भी बनाते हैं. इस दौरा डिमांड हर उस जगह पर है जहां बिहार के लोग रह रहे हैं. दिल्ली से लेकर मुंबई और बेंगलुरु सहित कई राज्यों में बड़ी संख्या में बिहार के लोग भी रहते हैं. ऐसे में छठ के समय वहां भी दौरा की खूब डिमांड रहती है. ऐसे में इन सभी जगहों से दिल्ली, मुंबई और बैंगलुरू तक के व्यापारी दौरा खरीदने छपरा तक पहुंचते हैं.
इसकी बिक्री से लोग अपने घर के बच्चों को पढ़ाते हैं और अपना जीवनयापन करते हैं. इस गांव में कुछ घर ऐसे हैं जिस घर के तीसरी-चौथी पीढ़ी के लोग दौरा बनाने का काम कर रहे हैं. यहां के अक्षयबर महतो का परिवार तीसरे पीढ़ी के रूप में छठ का दौरा तैयार करने का काम कर रहा है. यहां तैयार होने वाला दौरा पटना से लेकर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता सहित कई राज्यों में जाता है. दूर-दूर के व्यापारी खरीदारी करने के लिए पहुंचते हैं. इस गांव के लोग इसी बिजनेस से सबसे ज्यादा जुड़े हैं.
लोकल 18 से अक्षयबर महतो ने बताया कि छठ महापर्व से पहले ही इस काम से जुड़े लोग दौरा तैयार करने में जुट जाते हैं. इस गांव के सबसे ज्यादा लोग इस काम को करते हैं. यहां बांस से बने दौरा पटना से मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु सहित अन्य राज्यों में बिक्री के लिए जाते हैं.
इस काम से जुड़े अक्षयबर कहते हैं कि पूरे दिन में एक व्यक्ति तीन से चार दौरा तैयार करते हैं. एक दौरा को 150 रुपये में बेचते हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता भी यही काम करते थे और वह भी यही काम कर रहे हैं और उनका बेटा भी इसी काम में लगा है. अक्षयबर ने कहा कि अगर सरकार से सहयोग मिले तो इस बिजनेस को बड़े पैमाने पर करके आय बढ़ा सकते हैं.