50 रुपये की पकड़ी नौकरी, लगातार फ्लॉप के बाद 1 रोल से हिला डाला था बॉलीवुड, बदल डाली हीरो की घिसी-पिटी परिभाषा

50 रुपये की पकड़ी नौकरी, लगातार फ्लॉप के बाद 1 रोल से हिला डाला था बॉलीवुड, बदल डाली हीरो की घिसी-पिटी परिभाषा


Last Updated:

शम्मी कपूर भले पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे, मगर उन्हें शुरू में काफी स्ट्रगल करना पड़ा था. उन्होंने 50 रुपये महीने की तनख्वाह पर जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था. उन्होंने शुरुआती फ्लॉप के बाद हिंदी सिनेमा में खास मुकाम हासिल किया. शम्मी कपूर ने फिल्म ‘जीवन ज्योति’ से डेब्यू किया था, जिसके करीब 4 साल बाद फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ रिलीज हुई, जिसने उनका करियर चमका दिया. उन्होंने हीरो की बनी बनाई इमेज से हटकर किरदार निभाए.

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर शम्मी कपूर हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे, जिन्होंने हीरो की पुरानी इमेज को बदलकर रख दिया. उनका स्टाइल दूसरे अभिनेताओं से काफी अलग था. हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्हें शुरुआती करियर में लगातार स्ट्रगल करना पड़ा.
(फोटो साभार: IMDb)

एक समय ऐसा भी था, जब शम्मी अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के थिएटर में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे और उन्हें महीने के सिर्फ 50 रुपए मिलते थे. बाद में यही कलाकार हिंदी सिनेमा के सबसे अलग और लोकप्रिय सितारों में शामिल हुआ.
(फोटो साभार: IMDb)

शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था. उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था. वह मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे और राज कपूर और शशि कपूर के भाई थे. उनके परिवार का फिल्मों और थिएटर से गहरा रिश्ता था. शम्मी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1948 में पिता की थिएटर कंपनी पृथ्वी थिएटर्स में काम शुरू किया. यहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया. शुरुआत में उन्हें 50 रुपए महीने मिलते थे और 1952 में थिएटर छोड़ते समय उनका वेतन 300 रुपए हो चुका था. (फोटो साभार: IMDb)

Add News18 as
Preferred Source on Google

शम्मी कपूर ने थिएटर में काम करने के बाद फिल्मों की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने साल 1953 में आई फिल्म ‘जीवन ज्योति’ से बतौर हीरो अपना फिल्मी सफर शुरू किया. इसके बाद ‘रेल का डिब्बा’, ‘लैला मजनू’, ‘ठोकर’ और ‘शमा परवाना’ जैसी फिल्मों में नजर आए, लेकिन इन फिल्मों से उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी. शुरुआती दौर में उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाईं. ऐसे में उनके लिए अपनी अलग पहचान बनाना बड़ी चुनौती थी.
(फोटो साभार: IMDb)

शम्मी कपूर के करियर में बड़ा बदलाव 1957 में आई फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ से आया. फिल्म से उन्हें एक नए तरह के रोमांटिक हीरो के रूप में पहचान मिलने लगी. इसके बाद 1959 में आई ‘दिल देके देखो’ ने उनकी लोकप्रियता में इजाफा किया. साल 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुई. इस फिल्म में उनका जोशीला अंदाज और ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ गाने में उनका डांस दर्शकों के बीच खूब पसंद किया गया.
(फोटो साभार: IMDb)

फिल्म से जुड़ा उनका ‘याहू’ वाला अंदाज उनकी पहचान बन गया. शम्मी कपूर ने ‘प्रोफेसर’, ‘कश्मीर की कली’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘जानवर’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ और ‘ब्रह्मचारी’ जैसी फिल्मों में काम किया और 1960 के दशक के बड़े सितारों में शामिल हो गए. (फोटो साभार: IMDb)

शम्मी कपूर 1968 में ‘ब्रह्मचारी’ के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड दिया गया. साल 1982 में फिल्म ‘विधाता’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. 1995 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
(फोटो साभार: IMDb)

शम्मी कपूर ने बाद में अहम भूमिकाओं के बजाय सपोर्टिंग रोल निभाने शुरू कर दिए. उन्होंने ‘प्रेम रोग’, ‘हीरो’, ‘विधाता’ और रणबीर कपूर स्टारर ‘रॉकस्टार’ जैसी फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. वे नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी काम करते रहे. 14 अगस्त 2011 को 79 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.
(फोटो साभार: IMDb)

लेटेस्ट कॉमर्स डील्स, खास डिस्काउंट और बेहतरीन शॉपिंग ऑफर देखने के लिए कंपेयर इंड‍ियादेखें.



Source link