Why Marco Rubio Choose Jamnagar। Marco Rubio Jamnagar Visit Reason। पिछली बार दिल्‍ली-आगरा गए, इस बार मुंबई-जामनगर क्‍यों? रूबियो ने बताई वजह


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पिछली बार दिल्‍ली-आगरा गए, इस बार मुंबई-जामनगर क्‍यों? रूबियो ने बताई वजह

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दिल्ली छोड़कर मुंबई और जामनगर का दौरा करने की वजह बताई. नेटवर्क18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश को समझने के लिए केवल राजधानी जाना काफी नहीं है. मुंबई को भारत की आर्थिक धड़कन बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार बढ़ाने के लिए यहां आना जरूरी था और भारत-अमेरिका रिश्तों की मजबूती के लिए ऐसे दौरे आगे भी होते रहेंगे.

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मार्को रूबियो ने मुंबई और जामनगर जाने के सवाल पर जवाब दिया.

नई दिल्‍ली. जब भी कोई बड़ा विदेशी नेता भारत के दौरे पर आता है, तो आमतौर पर प्रोटोकॉल के मुताबिक सबसे पहला पड़ाव देश की राजधानी दिल्ली ही होती है. लेकिन अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो ने इस बार पूरा का पूरा गेम ही बदल दिया. पिछले दौरे पर राजधानी में आने के बाद ताजमहल का दीदार करने वाले रूबियो इस बार दिल्ली को पूरी तरह स्किप करके सीधे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंचे हैं और उनका अगला पड़ाव गुजरात का जामनगर है. नेटवर्क18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जब एडिटर इन चीफ राहुल जोशी ने उनसे इस अनकन्वेंशनल रूट के बारे में पूछा, तो रूबियो ने बिना किसी लाग-लपेट के भारत-अमेरिका व्यापार और आर्थिक रणनीतियों का पूरा खाका सामने रख दिया.

‘यूएस को समझना है तो सिर्फ वाशिंगटन जाने से काम नहीं चलता’
मार्को रूबियो ने अपने इस फैसले को समझाते हुए एक बेहद दिलचस्प तर्क दिया. उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश को किसी एक शहर या राजधानी में बैठकर नहीं समझा जा सकता. रूबियो बोले, “अगर किसी को अमेरिका को सही मायने में समझना और देखना है, तो वह सिर्फ वाशिंगटन डीसी जाकर पूरा अमेरिका नहीं समझ सकता. उसे साउथ, वेस्ट कोस्ट, न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे शहरों का चक्कर भी लगाना पड़ेगा. ठीक वैसे ही, मैं अपनी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के टर्म में पूरे भारत को देखने का दावा तो नहीं करता, लेकिन इतने बड़े देश के अलग-अलग क्षेत्रों को गहराई से समझना बेहद जरूरी है.”

भारत का फाइनेंशियल हार्ट और बिजनेस का लाइफब्लड
मुंबई को अपनी विजिट का मुख्य सेंटर बनाने पर रूबियो ने कहा कि यह शहर भारत का वित्तीय दिल और आत्मा है. यही वह जगह है जहां से वे तमाम बड़ी भारतीय कंपनियां ऑपरेट करती हैं जो अमेरिका में भारी इन्वेस्टमेंट कर रही हैं या जिनके साथ अमेरिका अपना ट्रेड और बिजनेस रिलेशन और बढ़ाना चाहता है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और भारत के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह एक बेहद मजबूत आर्थिक साझेदारी है, जिसके लिए मुंबई आना सबसे लॉजिकल फैसला था.

‘हम भारत उतनी बार नहीं आते, जितनी जरूरत है’
रूबियो ने बताया कि जब अमेरिकी मीडिया ने उनसे सवाल किया कि वे दिल्ली छोड़कर दूसरे शहरों में क्यों जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की अहमियत को देखते हुए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जितना भारत आता है, वह भी कम है. उन्होंने जानकारी दी कि हाल के दिनों में अमेरिकी अटॉर्नी जनरल, कॉमर्स सेक्रेटरी और एक बड़ा कांग्रेसनल डेलीगेशन भारत का दौरा कर चुका है. यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा बल्कि आर्थिक और व्यापारिक मोर्चे को मजबूत करने के लिए ऐसे दौरे आगे भी लगातार जारी रहेंगे.



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