अब टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं! MLFF तकनीक से 90 की स्पीड में कटेगा टोल,
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MLFF यानी मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल वसूली की ऐसी तकनीक है, जिसमें गाड़ियों की पहचान चलते हुए की जाती है. इसके लिए हाईवे पर विशेष गैंट्री लगाई जाती हैं. इन पर कैमरे और RFID रीडर लगाए जाते हैं, जो गाड़ी के FASTag और नंबर प्लेट की पहचान करने में मदद करते हैं. इसके आधार पर टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है.इस तकनीक का उद्देश्य टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने की जरूरत कम करना और हाईवे पर यातायात को ज्यादा सुचारु बनाना है.
दिल्ली से जयपुर या किसी दूसरे शहर तक हाईवे पर सफर करते समय टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनें लोगों का समय बढ़ा देती हैं. FASTag होने के बाद भी ट्रैफिक ज्यादा होने पर गाड़ियों को इंतजार करना पड़ता है. इससे ईंधन की खपत बढ़ सकती है और प्रदूषण की समस्या भी बनी रहती है. अब मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक के जरिए टोल वसूली के इस तरीके को बदलने की कोशिश की जा रही है. इसमें गाड़ियों को टोल चुकाने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी.
क्या है MLFF तकनीक
MLFF यानी मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल वसूली की ऐसी तकनीक है, जिसमें गाड़ियों की पहचान चलते हुए की जाती है. इसके लिए हाईवे पर विशेष गैंट्री लगाई जाती हैं. इन पर कैमरे और RFID रीडर लगाए जाते हैं, जो गाड़ी के FASTag और नंबर प्लेट की पहचान करने में मदद करते हैं. इसके आधार पर टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है.इस तकनीक का उद्देश्य टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने की जरूरत कम करना और हाईवे पर यातायात को ज्यादा सुचारु बनाना है.
कुणाल जगताप ने क्या बताया
Wizpro Consultech Pvt. Ltd. के कुणाल जगताप के मुताबिक, MLFF तकनीक में गाड़ियां करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टोल पॉइंट से गुजर सकती हैं. उन्होंने बताया कि इस सिस्टम में अमेरिका की कंपनी Zebra का हाई-स्पीड रीडर इस्तेमाल किया गया है, जिसकी क्षमता एक सेकंड में करीब 1,300 टैग पढ़ने की बताई गई है.इस व्यवस्था में कैमरे और RFID रीडर मिलकर वाहन की पहचान करने में मदद करते हैं. इससे हर गाड़ी को टोल भुगतान के लिए अलग से रोकने की जरूरत कम हो सकती है.
वाहन चालकों को क्या होगा फायदा
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा सफर में लगने वाले समय को बचाना है. टोल प्लाजा पर लंबी कतारें कम होने से यात्रियों को बार-बार रुकने और इंतजार करने से राहत मिल सकती है. गाड़ियों के रुकने और दोबारा चलने की जरूरत घटने से ईंधन की खपत और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है.
कहां लागू हुई है तकनीक
कुणाल जगताप के मुताबिक, राजस्थान में शाहजहांपुर और मनोहरपुर, दक्षिण भारत में परनूर और गुजरात में दो जगहों पर MLFF तकनीक लागू की गई है. उन्होंने बताया कि सरकार इस व्यवस्था को दूसरे हाईवे पर भी लागू करने की दिशा में काम कर रही है और इसके लिए टेंडर भी आ रहे हैं.
आगे क्या बदलेगा
कुणाल बोले कि देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क बढ़ने के साथ टोल वसूली को तेज और सुविधाजनक बनाना भी जरूरी है. MLFF तकनीक इस दिशा में एक ऑप्शन है. अगर इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो टोल प्लाजा पर जाम कम करने और यात्रा का समय बचाने में मदद मिल सकती है.