कीवी, सेब, शहद और वाइन सस्‍ती… भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील लागू तो भारतीयों को क्‍या होगा फायदा?

कीवी, सेब, शहद और वाइन सस्‍ती… भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील लागू तो भारतीयों को क्‍या होगा फायदा?


भारत और न्यूजीलैंड के बीच अप्रैल में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया था और 20 अक्‍टूबर यानी आज से यह समझौता लागू हो गया है. इसके तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने सामान बेचने पर 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री यानी बिना इंपोर्ट ड्यूटी के कारोबार करने की सुविधा मिलेगी. वहीं, न्यूजीलैंड के कारोबारियों को भी कम टैक्स के साथ भारत के बड़े बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा.

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘आज से भारत के साथ हमारा FTA लागू हो गया है. अब न्यूजीलैंड के कारोबारी कम टैरिफ के साथ एक अरब से ज्यादा नए ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे. इससे रोजगार बढ़ेगा, लोगों की सैलरी में इजाफा होगा और न्यूजीलैंड के समुदायों में ज्यादा पैसा आएगा.’

भारत-न्यूजीलैंड FTA में क्या है?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लागू हुए इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में अपने सामान बेचने पर 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री सुविधा मिलेगी. पहले भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले सामान पर औसतन 2.2 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी. वहीं, कपड़ा और चमड़े जैसे कुछ उत्पादों पर यह ड्यूटी 10 फीसदी तक थी. लेकिन अब भारत के सभी 8,284 निर्यात उत्पादों पर टैरिफ शून्य हो जाएगा. दूसरी तरफ, भारत आने वाले न्यूजीलैंड के 95 फीसदी निर्यात उत्पादों को भी टैरिफ में छूट मिलेगी. समझौता पूरी तरह लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के भारत भेजे जाने वाले मौजूदा निर्यात का 95 फीसदी हिस्सा या तो पूरी तरह टैरिफ-फ्री हो जाएगा या उस पर लगने वाले टैक्स में बड़ी कटौती होगी. दोनों देशों के नेताओं के मुताबिक, इस समझौते से भारत और न्यूजीलैंड के बीच कारोबार बढ़कर 2030 तक करीब 7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर था. सिर्फ व्‍यापारी ही नहीं,

ब‍िजनेस के साथ छात्रों को भी म‍िलेगा फायदा
इस समझौते से भारतीय छात्रों के लिए न्यूजीलैंड में पढ़ाई और पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसर भी आसान होंगे. भारतीय छात्रों की संख्या पर लगी तय सीमा हट जाएगी. पढ़ाई के दौरान उन्हें हर हफ्ते कम से कम 20 घंटे काम करने की सुविधा मिलेगी. पढ़ाई पूरी करने के बाद भी काम करने के ज्यादा अवसर मिलेंगे. साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) में बैचलर या मास्टर डिग्री करने वाले भारतीय छात्रों को तीन साल तक और डॉक्टरेट यानी PhD करने वालों को चार साल तक काम करने का अवसर मिल सकेगा. इससे छात्रों को अपने कौशल को बेहतर बनाने और विदेश में करियर बनाने में मदद मिलेगी.

डील लागू होने से कौन-कौनसी चीजें सस्ती होंगी?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौता लागू होने के बाद कुछ आयातित सामान सस्ते हो सकते हैं. खासतौर पर न्यूजीलैंड से आने वाले कुछ खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है. जैसे कीवी फल, ज‍िसपर अभी 33 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. लेकिन नए समझौते के तहत शुरुआत में 6,250 टन की तय मात्रा तक कीवी फल पर यह ड्यूटी खत्म हो जाएगी. अगले छह साल में इस सीमा को बढ़ाकर 15,000 टन कर दिया जाएगा. इससे भारत में न्यूजीलैंड के कीवी फल सस्ते हो सकते हैं. इसके अलावा न्यूजीलैंड से आने वाले ताजा या फ्रोजन भेड़ के मांस पर अब बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य होगी. इससे भारतीय बाजार में इसकी कीमत कम हो सकती है.

सेब-शहद भी होगा सस्‍ता
न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर फिलहाल 50 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. नए समझौते के तहत शुरुआती तौर पर 32,500 टन सेब के आयात पर यह ड्यूटी घटाकर 25 फीसदी कर दी गई है. अगले छह साल में इस तय सीमा को बढ़ाकर 45,000 टन किया जाएगा. न्यूजीलैंड का मानुका शहद भी इस समझौते में शामिल है. फिलहाल इस पर 66 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. समझौते के तहत तय शर्तों के साथ पांच साल में इस ड्यूटी में 75 फीसदी की कटौती की जाएगी. इसके अलावा, एक तय कीमत के दायरे में 200 टन शहद के आयात के लिए अलग से कोटा रखा गया है.

लकड़ी और उसके प्रोडक्‍ट
न्यूजीलैंड से आने वाले लकड़ी और लकड़ी से जुड़े 95 फीसदी से ज्यादा उत्पाद अब बिना इंपोर्ट ड्यूटी के भारत आ सकेंगे. इससे इनकी कीमतें कम होने की संभावना है. इसके अलावा इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड की वाइन पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को धीरे-धीरे घटाया जाएगा. भारत में अभी वाइन के आयात पर 150 फीसदी तक ड्यूटी लगती है. समझौते के तहत वाइन की कीमत के आधार पर इसे घटाकर 25 या 50 फीसदी तक किया जाएगा. हालांकि, जिस वाइन की कीमत 750 मिलीलीटर की बोतल के लिए 5 डॉलर से कम होगी, उस पर पहले की तरह 150 फीसदी ड्यूटी लगती रहेगी. इसके अलावा, कई औद्योगिक उत्पादों पर भी अगले 10 साल में इंपोर्ट ड्यूटी खत्म हो जाएगी.

भारत ने किन उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है?
भारत ने अपनी करीब 30 फीसदी टैरिफ श्रेणियों को इस समझौते में शामिल नहीं किया है. इनमें कृषि और डेयरी से जुड़े कई संवेदनशील उत्पाद शामिल हैं. इनमें दूध और दूध से बने उत्पाद, खाने के तेल, चीनी, प्याज जैसी सब्जियां और दालें शामिल हैं. इसके अलावा, रत्न एवं आभूषण और धातु जैसे कुछ क्षेत्रों को भी संरक्षण दिया गया है. इसका मतलब है कि इन उत्पादों पर भारत अपनी मौजूदा आयात शुल्क नीति जारी रख सकता है. इससे भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों को विदेशी उत्पादों से होने वाली प्रतिस्पर्धा से बचाने में मदद मिलेगी.

कुल मिलाकर, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा. वहीं, न्यूजीलैंड के कारोबारियों को भारत में अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे. हालांकि, भारतीय ग्राहकों को सामान सस्ता मिलने का फायदा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आयात शुल्क में कटौती का कितना लाभ कंपनियां ग्राहकों तक पहुंचाती हैं.



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