Agri Ideas : 75 हजार लागत, 3 लाख कमाई…LLB कर रहे गोंडा के जितेंद्र ने लगाई ऐसी फसल, अबू धाबी तक सप्लाई

Agri Ideas : 75 हजार लागत, 3 लाख कमाई…LLB कर रहे गोंडा के जितेंद्र ने लगाई ऐसी फसल, अबू धाबी तक सप्लाई


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75 हजार लागत, 3 लाख कमाई…गोंडा के जितेंद्र ने लगाई ऐसी फसल, विदेश तक सप्लाई

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Jimikand ki kheti : एलएलबी कर रहे गोंडा के किसान जितेंद्र मौर्य ने तीन बीघे में जिमीकंद लगाया है. करीब 75 हजार रुपये लगात आई है. इससे उन्हें 3 लाख तक की कमाई होने की उम्मीद है. लोकल 18 से किसान जितेंद्र मौर्य बताते हैं कि वे एलएलबी के साथ खेती-किसानी भी करते हैं. जिमीकंद उगाने के लिए वे रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करते हैं. अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर खेत की गुड़ाई करनी पड़ती है. जिमीकंद की खुदाई एक साल बाद की जाती है. दीपावली के आसपास इसकी मांग अच्छी रहती है. जितेंद्र के मुताबिक, सही फसल का चुनाव, बेहतर देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की जाए, तो अच्छी कमाई पक्की है.

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गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवक ने पढ़ाई के साथ खेती को अपनी आमदनी का जरिया बनाया है. एलएलबी की पढ़ाई कर रहे जितेंद्र मौर्य तीन बीघा जमीन में जिमीकंद की खेती कर रहे हैं. उन्होंने इस खेती में करीब 75 हजार रुपये खर्च किए हैं. अब उन्हें फसल से लगभग 3 लाख रुपये की कमाई होने की उम्मीद है. हालांकि, उनकी आमदनी बाजार में जिमीकंद के भाव पर निर्भर करेगी. लोकल 18 से किसान जितेंद्र मौर्य बताते हैं कि वे एलएलबी के साथ खेती-किसानी भी करते हैं. इस समय करीब तीन बीघे में जिमीकंद की खेती कर रहे हैं. इसमें 70 से 75 हजार रुपये की लागत आई है. फसल तैयार होने के बाद उन्हें करीब 3 लाख रुपये की कमाई होने की उम्मीद है. अगर बाजार में अच्छा भाव मिलता है, तो आमदनी और बढ़ सकती है. भाव कम होने पर कमाई भी घट सकती है.

बनारस से मंगाया बीज

जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने जिमीकंद की खेती के लिए बनारस की पहाड़ी मंडी से बीज मंगवाया था. इसकी खेती में वह रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करते हैं. खेत में गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं. फसल की अच्छी बढ़वार के लिए समय-समय पर खेत की गुड़ाई भी करनी पड़ती है. जिमीकंद की खुदाई आमतौर पर लगाने के करीब एक साल बाद की जाती है. दीपावली के आसपास इसकी मांग अच्छी रहती है. ऐसे में किसान सही समय पर फसल तैयार करके बाजार में बेचें, तो उन्हें अच्छी आमदनी मिल सकती है.

कहां सीखी खेती

जितेंद्र बताते हैं कि उनके यहां की सब्जियों की सप्लाई विदेशों में भी हो रही है. कुछ महीने पहले उनके यहां और आसपास के कुछ किसानों की सब्जियां अबू धाबी भेजी गई थीं. अब जिमीकंद को भी वहां ट्रायल के लिए भेजा गया है. अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में जिमीकंद की सप्लाई भी अबू धाबी में की जा सकती है. जितेंद्र के मुताबिक, उनके परिवार में कई पीढ़ियों से खेती-किसानी होती आ रही है. उनके पिता और दादा भी खेती करते थे. इसी वजह से उन्हें बचपन से ही खेती के बारे में जानकारी मिलती रही. अब वह पढ़ाई के साथ खेती करके अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. जितेंद्र का मानना है कि युवा पढ़ाई के साथ खेती को भी अपना सकते हैं. सही फसल का चुनाव, बेहतर देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की जाए, तो अच्छी कमाई पक्की है.



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