मंदिर-मंदिर भटके 12 साल, तब जाकर पैदा हुए 2 लड़के, अब ग्वालियर हादसा दे गया जिंदगी भर का गम

मंदिर-मंदिर भटके 12 साल, तब जाकर पैदा हुए 2 लड़के, अब ग्वालियर हादसा दे गया जिंदगी भर का गम


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ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई. तेज रफ्तार ट्रक श्रद्धालुओं और सड़क किनारे लगी दुकानों को रौंदते हुए मंदिर के पुराने प्रवेश द्वार के पास पलट गया. यह हादसा ग्वालियर के रहने वाले विद्याराम त्यागी को जिंदगी भर का गम दे गया. हादसे में उनके परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई, जिसमें उनके दो बेटे भी शामिल थे.

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ग्वालियर हादसे ने उजाड़ा परिवार

ग्वालियर के शीतला माता रोड पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे बड़ा हादसा हो गया. जब एक ट्रक नो एंट्री में घुस गया. इसके बाद वह मंदिर की दीवार से टकरा गया, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा-व्यवस्था में बड़ी चूक थी. बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पीड़ित परिवारों से मिले. ग्वालियर हादसे में विद्याराम त्यागी का परिवार पूरी तरह से उजाड़ दिया. इसमें उनके परिवार के तीन लोगों को छीन लिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद विद्याराम त्यागी ने 12 सालों तक मंदिर-मंदिर घूमकर बच्चे के लिए प्रार्थना की. जिससे उनके घर में संतान हो जाए. इसके लिए उन्होंने खूब पूजा-पाठ किया. बाद में भगवान उनसे प्रसन्न भी हुए और वह दो बेटों और एक बेटी के पिता बने. लेकिन उस समय उन पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जब उनके बेटे अमन और लव की ग्वालियर हादसे में मौत हो गई. इसके बाद से ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. अब उनके घर का चिराग छिन गया है.

चाचा के साथ मंदिर गए थे बच्चे
15 के अमन और 13 साल के लव अपने चाचा अशोक के साथ शीतला माता मंदिर गए थे. बताया जा रहा है कि बच्चों की काफी जिद के बाद चाचा उन्हें मंदिर ले गए थे. हादसे में चाचा की भी मौत हो चुकी है. विद्याराम त्यागी मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले हैं. लेकिन वह पिछले काफी दिनों से ग्वालियर में ही रह रहे थे.

एक साथ उठी तीन अर्थियां
अमन और लव उनके लिए सिर्फ बेटे नहीं थे, बल्कि उनकी काफी प्रार्थनाओं का फल थे. परिवार ने बच्चों को काफी मेहनत से पाला था और उन्हें पाने के लिए 12 साल तक लंबा इंतजार किया था. अमन और लव के चाचा एक फैक्ट्री में मजदूरी करते थे और वह अपने भतीजों से काफी प्यार करते थे. रिश्तेदार और परिजन तीनों के शव को जौरा ले गए. एक ही घर से तीन अर्थियां उठते देख रिश्तेदार और ग्रामीण गहरे सदमे में आ गए.



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