बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए जानें कोर और एलाइड सब्जेक्ट का कंफ्यूजन, एक्सपर्ट ने दी जानकारी

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए जानें कोर और एलाइड सब्जेक्ट का कंफ्यूजन, एक्सपर्ट ने दी जानकारी


पटना: बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में विषयों की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से कंफ्यूजन बना हुआ है. कई अभ्यर्थियों को लगता है कि अगर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में एक ही विषय नहीं रहा, तो वे असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे. हालांकि, इस विषय पर पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और इस बहाली प्रक्रिया को करीब से समझने वाले एक्सपर्ट डॉ अखिलेश कुमार ने अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कोर सब्जेक्ट और एलाइड सब्जेक्ट के अंतर को समझने की सलाह दी है.

क्या ग्रेजुएशन और पीजी में एक ही विषय होना जरूरी है?
उन्होंने बताया कि हर विषय के लिए ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में एक ही विषय होना अनिवार्य मान लेना सही नहीं है. पात्रता का निर्धारण संबंधित भर्ती के विज्ञापन और नियमावली में दिए गए प्रावधानों के आधार पर किया जाता है. ऐसे में अभ्यर्थियों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विषय की निर्धारित योग्यता को ध्यान से पढ़ना चाहिए. असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में एक ही विषय होना अनिवार्य है? डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि इसका जवाब संबंधित विषय के कोर या एलाइड सब्जेक्ट होने पर निर्भर कर सकता है.

अगर किसी अभ्यर्थी ने संबंधित विषय में ही पोस्ट ग्रेजुएशन किया है, तो केवल इस आधार पर उसे अपात्र नहीं माना जा सकता कि उसके ग्रेजुएशन में कोई दूसरा विषय था. हालांकि, अंतिम पात्रता संबंधित भर्ती के आधिकारिक नियमों और विज्ञापन में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही तय होगी.

क्या होता है कोर सब्जेक्ट और एलाइड सब्जेक्ट?
इस पूरे मामले को समझने के लिए कोर सब्जेक्ट और एलाइड सब्जेक्ट के बीच अंतर जानना जरूरी है. कोर सब्जेक्ट की बात करें तो यह वह मुख्य विषय होता है, जिसमें अभ्यर्थी ने पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. उदाहरण के तौर पर एमए हिंदी, एमए इतिहास, एमए राजनीति विज्ञान और एमए अंग्रेजी को उनके संबंधित मुख्य विषयों के रूप में समझा जा सकता है.

एलाइड सब्जेक्ट
ये ऐसे विषय होते हैं, जिन्हें संबंधित मुख्य विषय से जुड़ा हुआ या उसके अंतर्गत निर्धारित वैकल्पिक विषय माना जाता है. इनकी स्वीकार्यता संबंधित भर्ती की नियमावली में दिए गए विषयवार प्रावधानों पर निर्भर करती है. डॉ अखिलेश कुमार ने बताया कि अलग अलग विषयों के लिए एलाइड सब्जेक्ट की अलग-अलग सूची निर्धारित हो सकती है. इसलिए सभी विषयों पर एक ही नियम लागू मानना अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

हिंदी विषय से समझिए पात्रता का पूरा उदाहरण
कोर और एलाइड सब्जेक्ट के अंतर को हिंदी विषय के उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार हिंदी के साथ भाषा विज्ञान, अनुवाद विज्ञान और लोक साहित्य जैसे विषयों को संबंधित नियमावली में एलाइड सब्जेक्ट के रूप में शामिल किया जा सकता है. इसी तरह, इतिहास विषय के अंतर्गत M.A. in Medieval & Modern Indian History, M.A. in Medieval & Modern History, M.A. in Modern History, M.A. in Indian History and Culture, M.A. in History and Indian Culture, M.A. in Composite History, M.A. in History & Heritage Management तथा M.A. in History (Traditional) जैसे सब्जेक्ट एलाइड सब्जेक्ट हो सकते हैं.

भर्ती का विज्ञापन और नियमावली जरूर पढ़ें
डॉ. अखिलेश कुमार ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अधूरी जानकारियों या दूसरे अभ्यर्थियों की बातों के आधार पर अपनी पात्रता का फैसला न करें. बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग की ओर से जारी संबंधित भर्ती के विज्ञापन और नियमावली को ध्यान से पढ़ना जरूरी है. उन्होंने हाल में हुई संविदा आधारित बहाली के नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभ्यर्थी संबंधित नियमावली देखकर विषयवार पात्रता की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.



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