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China Gold Buying : चीन 23 महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है. चीन का गोल्ड रिजर्व अब 2410 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. यूक्रेन पर हमले के तुरंत बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के लगभग 300 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया था. इससे चीन ने सबक लिया है और सोने पर दांव लगाना शुरू कर दिया है.
बीजिंग का इरादा उस वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता कम करने का है, जिसमें अमेरिका का काफी प्रभाव है. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. पिछले कुछ समय से दुनियाभर के सेंट्रल बैंक सोना खरीद रहे हैं. लेकिन, चीन जिस तरह से सोने के पीछे पागल हुआ है, उससे पूरी दुनिया हैरान है. चीन का केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC), पिछले लगभग दो साल से लगातार सोने की आक्रामक खरीदारी में जुटा हुआ है. सितंबर महीने में ही ड्रैगन ने करीब 23 टन सोना अपनी तिजोरी में जोड़ लिया. यह लगातार 23वां महीना था जब चीनी केंद्रीय बैंक सोने का शुद्ध खरीदार रहा है. अब चीन का कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,410 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.
समाचार एजेंसी आईएएनएस ने नाइल पोस्ट में प्रकाशित एक आर्टिकल के हवाले से बताया है कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, पश्चिमी देशों की सरकारों द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किए जाने से बीजिंग ने सबक लिया है. विदेशों में रखी डॉलर और यूरो वाली संपत्तियां बैन की चपेट में आ सकती हैं. इसके विपरीत, देश के भीतर रखा गया सोना किसी विदेशी जारीकर्ता की देनदारी के दायरे में नहीं आता और इस तरह के प्रतिबंधों का उस पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम होती है.
क्या डॉलर का इस्तेमाल बंद करने की तैयारी में है चीन
नहीं, चीन द्वारा सोने की भारी खरीदारी का मतलब यह नहीं है कि चीन डॉलर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की तैयारी कर रहा है, बल्कि बीजिंग का इरादा उस वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता कम करने का है, जिसमें वाशिंगटन और उसके सहयोगियों का काफी प्रभाव है.
केवल चीन ही सोने की खरीदारी नहीं कर रहा, बल्कि कई अन्य देश भी हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने जुलाई में 23 टन और अगस्त में लगभग 39 टन गोल्ड की शुद्ध खरीदारी की है. यह दिखाता है कि गोल्ड को देश एक अधिक बहुध्रुवीय मौद्रिक प्रणाली और अपने निवेश में विविधता लाने के एक साधन के रूप में देख रहे हैं.