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लोग आमतौर पर जानवरों को इंसानों से कमतर आंकते हैं. यही वजह है कि लोग अपने खाने के बाद बचे हुए खाने को जानवरों के लिए डाल देते हैं. इस खाने को जानवर खा तो लेते हैं लेकिन, इससे वह बीमार हो जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि जानवरों को वही खाना खिलाएं जो उनकी सेहत के लिए लाभदायक है.
पटना: बहुत से इंसान ऐसे हैं जो इंसानी जीवन में पशु-पक्षियों, जानवरों और पेड़-पौधों के महत्व को समझते हैं. इस समय लोग जगह-जगह भंडारा कर रहे हैं. इस दौरान लोगों का काफी खाना पूड़ी-सब्जी आदि बच जाता है. लोग इस बची हुई पूड़ी-सब्जी को जानवरों को खिलाकर पुण्य कमाने के बारे में सोचते हैं. आपकी यह सोच जानवरों की सेहत के लिए भारी तकलीफ भरा हो सकता है और आप पुण्य की जगह पाप के भागीदार बन सकते हैं. इसलिए किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में व्यवहारिक और वैज्ञानिक जानकारी जरूर इकट्ठा कर लें. पशुओं को क्या खिलाएं और क्या खिलाने से बचना चाहिए इस बारे में एक्सपर्ट डॉ. दुष्यंत यादव ने जरूरी जानकारी और सलाह दी है.
भंडारे का बचा खाना पशुओं के लिए क्यों बन सकता है परेशानी
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुष्यन्त यादव ने बताया कि अक्सर त्योहारों के बाद बचा हुआ भोजन सीधे पशुओं के सामने डाल दिया जाता है. पशु स्वाद के कारण इसे अधिक मात्रा में खा लेते हैं. समस्या तब बढ़ती है, जब उनकी सामान्य खुराक से अलग भोजन अचानक बड़ी मात्रा में उनके पेट में पहुंच जाती है. डॉ. दुष्यंत यादव ने किसान भाइयों और पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं को प्रसाद खिलाएं, लेकिन उन्हें भरपेट पूड़ी, चावल या सब्जियां न दें. प्रसाद का उद्देश्य थोड़ी मात्रा में भोजन देना होना चाहिए, न कि पशुओं को बचा हुआ खाना खिलाकर उनका पेट भरना.
रूमेन का संतुलन बिगड़ने से बढ़ सकती है परेशानी
उन्होंने आगे बताया कि गाय और भैंस जैसे पशुओं का पाचन तंत्र सामान्य भोजन को पचाने के लिए विशेष रूप से विकसित होता है. इनके पेट के एक महत्वपूर्ण हिस्से को रूमेन कहा जाता है, जहां सूक्ष्मजीव भोजन को पचाने में मदद करते हैं.
डॉ. दुष्यन्त यादव यादव की मानें तो जरूरत से ज्यादा पूड़ी और अन्य पका हुआ भोजन खाने से पाचन तंत्र का संतुलन प्रभावित हो सकता है. इससे पेट में गैस बनने, पेट फूलने और एसिडोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, खराब या दूषित बासी भोजन से भी पशुओं की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है. खासकर पूड़ी जैसे तेल युक्त खाद्य पदार्थों को सामान्य चारे की जगह अधिक मात्रा में खिलाने से बचना चाहिए. पशुओं को क्या और कितना खिलाना है, इस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.
दिवाली में पटाखों से भी पशुओं को बचाने की अपील
डॉ. दुष्यंत यादव ने आगामी त्योहारों को देखते हुए पशुओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया है. दिवाली के दौरान पटाखों की तेज आवाज, धुआं और चिंगारियां पशुओं के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. ऐसे में पटाखे जलाते समय पशुओं और पशुबाड़े को सुरक्षित दूरी पर रखना चाहिए. उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि त्योहारों के दौरान पशुओं के खानपान के साथ-साथ उनके आसपास के माहौल का भी ध्यान रखें, ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो.
पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
पशुओं को त्योहारों का प्रसाद देना हो, तो बहुत कम मात्रा में दें. जिस तरह से इंसानों को प्रसाद थोड़ी मात्रा में देते हैं उसी तरह से जानवरों को भी प्रसाद थोड़ी मात्रा में ही दें. फफूंद लगे या दूषित भोजन से बचें और उनके नियमित आहार में अचानक बदलाव न करें. अगर पशु का पेट असामान्य रूप से फूलने लगे, वह बेचैन दिखाई दे या खाना बंद कर दे, तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक की मदद लें.