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Saharanpur News: सहारनपुर निवासी आदित्य त्यागी ने रिटायरमेंट के बाद घर पर आराम नहीं किया, बल्कि एक ऐसा काम शुरू किया, जिससे उनकी अच्छी कमाई हो रही है. उन्होंने दीपावली के दृष्टिगत गणेश और लक्ष्मी जी की मूरत तैयार की है. यह कोई आम मूरत नहीं है, बल्कि पूजा पाठ करने के बाद आसानी से खाद में तब्दील हो जाएगी.
सहारनपुर: अक्सर लोग रिटायर्ड होने के बाद अपनी फैमिली के साथ टाइम बिताना पसंद करते हैं, लेकिन सहारनपुर के रहने वाले आदित्य त्यागी जो की फॉरेस्ट रेंजर के पद से रिटायर्ड है और रिटायर होने के बाद भी गोबर को सैकड़ों रुपए किलो के हिसाब से बेचकर लाखों रुपए कमा रहे हैं. आदित्य त्यागी जो अपनी देसी गायों के गोबर से विभिन्न तरह के प्रोडक्ट बनाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने दीपावली के दृष्टिगत गणेश और लक्ष्मी जी की मूरत तैयार की है. यह कोई आम मूरत नहीं है, बल्कि पूजा पाठ करने के बाद आसानी से खाद में तब्दील हो जाएगी.
आदित्य त्यागी के द्वारा तैयार यह लक्ष्मी और गणेश की मूरत ऑफलाइन और ऑनलाइन खूब बिक रही है, जिसकी कीमत ₹200 से ढाई सौ रुपए है. आदित्य त्यागी न केवल रिटायर्ड होने के बाद गोबर को बेचकर लाखों कमा रहे हैं, बल्कि अपने साथ-साथ 7 से 8 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर इंसान चाहे तो वेस्ट समझा जाने वाले पदार्थ से भी लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं. उसी कड़ी में आदित्य त्यागी ने गाय के गोबर से विभिन्न तरह के प्रोडक्ट बनाने का यह काम शुरू किया, जो आज फल-फूल रहा है.
फॉरेस्ट रेंजर से रिटायर्ड आदित्य गोबर
आदित्य त्यागी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि इस बार हम गोबर के लक्ष्मी और गणेश तैयार कर रहे हैं. हमने मार्केट में देखा कि प्लास्टिक पेरिस और केमिकल के लक्ष्मी गणेश की मूरत आ रही है और दीपावली पर पूजा करने के बाद उनको कहां पर रखे उसकी समस्या रहती है. अगर कहीं उनको डालकर आते हैं तो वहां पर भी पड़े रहते हैं और गलते नहीं है. हम गोबर से बहुत सारी चीजें बना रहे हैं, तो हमने सोचा कि क्यों ना हम लक्ष्मी-गणेश भी बनाएं. अब हमने लक्ष्मी और गणेश बनाने शुरू कर दिए.
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां करते हैं तैयार
रिटायर्ड आदित्य ने बताया कि मैं देहरादून से 2015 में रिटायर्ड हुआ था और उसके बाद मैंने सोचा कि खाली नहीं बैठना, कुछ ना कुछ जरूर करना है और मैं कुछ ना कुछ करता रहा और उसी काम से मैं आज काफी आगे बढ़ गया हूं. लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को तैयार करने में गोबर का पाउडर, मैदा, लकड़ी और मुल्तानी मिट्टी मिलाकर इन मूर्तियों को तैयार कर रहे हैं. इसकी डिमांड काफी अच्छी आ रही है.
जयपुर से आ रहे हैं ऑर्डर
उन्होंने कहा कि जब मैंने पहले थोड़ी बनाई थी, तब मुझको दिल्ली से फोन आया. उन्होंने मेरी साइट पर मूर्तियों को देखा था, तो मैं उनसे बात की और उन्होंने दीपावली पर अपने दोस्तों को देने के लिए मुझे 100 गणेश मूर्ति कपल ऑर्डर किया. इसके बाद 50 ऑर्डर जयपुर से मुझे आए और ऑफलाइन भी यहां से आर्डर आ रहे हैं.
आदित्य ने बताया कि हमारे द्वारा लक्ष्मी गणेश का जोड़ा ₹200 में दिया जा रहा है. एक मूर्ति कई हाथों से होकर गुजरती है और हमारी बहन-बेटियां इनको बनाने में लगी हुई है. मूर्ति बनाने में कई दिन का समय लगता है. पहले उसको बनाया जाता है. फिर 2 से 3 दिन छांव में सुखाया जाता है, फिर धूप में सुखाया जाता है और उसके बाद उन पर पेंटिंग की जाती है.