8 साल पहले भी ऐसे ही जला था फ्रांस, क्या था येलो वेस्ट आंदोलन जो बन गया था मैक्रों की मुसीबत

8 साल पहले भी ऐसे ही जला था फ्रांस, क्या था येलो वेस्ट आंदोलन जो बन गया था मैक्रों की मुसीबत


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फ्रांस जल रहा है. छात्रों की ओर से स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के लिए शुरू किए गए इस प्रदर्शन में अब ट्रेड यूनियनें भी कूद आई हैं. धीरे-धीरे यह 8 साल पहले फ्रांस में हुए येलो वेस्ट आंदोलन की तरह बनता जा रहा है. उस समय हुए उन हिंसक प्रदर्शनों की वजह से मैंक्रो सरकार मुश्किल में आ गई थी.

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फ्रांस में 8 साल पहले येलो वेस्ट प्रोटेस्ट हुआ था जो फ्रांस के इतिहास का सबसे लंबा प्रदर्शन माना जाता है. (फोटो-AP)

फ्रांस में छात्रों आंदोलन अब 2018 के येलो वेस्ट आंदोलन की तरह हिंसक होता जा रहा है. रविवार को पेरिस ही नहीं बल्कि लियोन मार्सिले और लिमोज सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की. कई दुकानों में लूटपाट भी की गई. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक इस प्रदर्शन में 6 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इनमें छात्रों के साथ ट्रेड यूनियनें और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग भी शामिल हैं. तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में तकरीबन 2400 लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस आंदोलन ने एक बार फिर आठ साल पुराने येलो वेस्ट आंदोलन की यादें ताजा कर दी हैं जिसने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सरकार को मुश्किल में डाल दिया था.

येलो वेस्ट फ्रांस का ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन था जो आधिकतारक तौर पर तकरीबन 589 दिन तक चला था. 17 नवंबर 2018 से शुरू हुआ यह आंदोलन 1 साल 7 महीने और 11 दिन बाद 28 जून 2020 को समाप्त हुआ था. प्रदर्शनकारी हर शनिवार को सड़कों पर उतरते थे. फ्रांस के इतिहास में यह भयंकर स्तर की हिंसा, तोड़फोड़ व खूनी झड़पों वाला आंदोलन बना था, जिसने फ्रांस की कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था.

क्या था येलो वेस्ट आंदोलन?

17 नवंबर 2018 को ईंधन की बढ़ती कीमतों और टैक्स के विरोध में इस प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी. धीरे-धीरे ये सरकार की नीतियों, महंगाई और असमानता के खिलाफ असंतोष का प्रतीक बन गया था. दरअसल उस समय सरकार ने डीजल और पेट्रोल में टैक्स की बढ़ोतरी की थी. सरकार का तर्क था की पर्यावरण संरक्षण के नाम पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इसका सीधा सा बोझ उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें काम पर जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने समेत अन्य रोजमर्रा के कामों के लिए अपनी कार का इस्तेमाल करना पड़ता है. धीरे-घीरे यह विरोध ईंधन तक सीमित नहीं रहा. इसमें मध्यम आय वाले, कामगार और छोटे शहरों वाले लोग शामिल हुए और प्रदर्शन बड़ा हो गया.

आंदोलन का नाम येलो वेस्ट कैसे पड़ा?

फ्रांस में वाहन चालकों के लिए अपनी गाड़ी में हाई विजिबिलटी रिफ्लेक्टिव जैकेट रखना अनिवार्य है. ऐसा इसलिए कि अगर कार कहीं खराब हो जाती है या कोई आपात स्थिति होती है तो वाहन चालक दूर से दिखाई दे जाए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार का विरोध करने के दौरान ये पीले कलर की यही जैकेट पहनी हुईं थीं. इसीलिए इस आंदोलन का नाम येलो वेस्ट हो गया. यह किसी ट्रेड यूनियन या नेता की ओर से बुलाया गया आंदोलन नहीं था. ये आम लोगों का प्रदर्शन था, जिसमें ऐसा कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता था जो येलो वेस्ट पहने हो.

कैसे हिंसक हो गया था वो प्रदर्शन?

2018 में जब ये प्रदर्शन शुरू हुआ तो शुरुआत सड़क और राजमार्गों पर जाम लगाने के साथ हुई थी. धीरे-धीरे आंदोलन फैलता गया. जब प्रदर्शनकारियों की मांगें नहीं मानी गईं तो 1 दिसंबर 2018 को आंदोलनकारी हिंसक हो गए. आर्क डी ट्रायम्फ के आसपास भीषण हिंसा से इसकी शुरुआत हुई. धीरे-धीरे देश भर में प्रदर्शन होने लगे. वाहनों में आगजनी की गई. पुलिस बैरिकेडिंग्स को आग के हवाले किया गया. तोड़फोड़ और लूटपाट हुई. आखिरकार सरकार ने ईंधन टैक्स में प्रस्तावित बढ़ोतरी को वापस ले लिया. हालांकि तब तक आंदोलन का दायरा काफी बढ़ चुका था.

अब क्यों याद याला येलो वेस्ट आंदोलन

फ्रांस में हो रहे हालिया आंदोलन में पीली जैकटें तो नहीं हैं, लेकिन सरकार के प्रति असंतोष बहुत है. इस प्रदर्शन की शुरुआत शिक्षकों की कमी और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर था, लेकिन अब ये देशव्यापी होता जा रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब आंदोलन में ट्रेड यूनियनें और येलो वेस्ट आंदोलन के समर्थक भी शामिल हो गए हैं. अब मांगों में ईंधन की बढ़ती कीमतें, कामगारों के लिए बेहतर वेतन, पेंशन आदि की मांगें भी शामिल हो गई हैं. सोशल मीडिया ने इसे और तेज कर दिया है. फ्रांस के अखबार Le Monde की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर तेजी से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की जा रही है.



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