सुप्रीम कोर्ट के वकील से बने सूबेदार, अब छतरपुर में ट्रैफिक पार्क और हेलमेट बैंक से बदल रहे यातायात की तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट के वकील से बने सूबेदार, अब छतरपुर में ट्रैफिक पार्क और हेलमेट बैंक से बदल रहे यातायात की तस्वीर


Traffic Inspector Brahaspati Saket Success Story: मप्र के छतरपुर जिले के यातायात प्रभारी ब्रहस्पति कुमार साकेत जिनका सपना सुप्रीम कोर्ट में वकालत करना था. इसके लिए उन्होंने दिल्ली से एलएलएम की पढ़ाई भी की. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस भी की. हालांकि, पिता जी के देहांत के बाद उन्हें पुलिस में सूबेदार की नौकरी करनी पड़ी. लेकिन अपनी मेहनत से उन्होंने मप्र के कई जिलों की यातायात व्यवस्था को सुगम बना दिया है. इसके लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है. उन्होंने छतरपुर में यातायात को आसान और सुगम बनाने के लिए उन्होंने ट्रैफिक पार्क और हेलमेट बैंक जैसे नवाचार भी किए हैं.‌

छतरपुर यातायात प्रभारी(ट्रैफिक इंस्पेक्टर) बृहस्पति कुमार साकेत बताते हैं कि वह मप्र के रीवा शहर के रहने वाले हैं. हालांकि, उनकी पढ़ाई भोपाल और दिल्ली जैसे महानगरों में हुई. वह पुलिस सर्विसेस में कभी नहीं जाना था. क्योंकि पिताजी पहले से मप्र पुलिस में आईपीएस अधिकारी थे. लेकिन दुर्भाग्यवश उनका कर्तव्य निर्वहन के दौरान निधन हो गया. जिसके बाद मप्र शासन द्वारा मुझे पुलिस सेवा में अनुकंपा नियुक्ति के तहत सूबेदार पद पर साल 2012 में नियुक्त किया गया.

सुप्रीम कोर्ट में की प्रैक्टिस
बृहस्पति कुमार बताते हैं कि उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल से बीए एलएलबी ओनर्स किया है. साथ ही इंडियन लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली से एलएलएम किया है. सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस भी की है. उनका फोकस सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करना ही था.

पिता के कहने पर सिविल सेवा परीक्षा तैयारी की
लेकिन पिता जी चाहते थे कि उनका बेटा भी सिविल सर्विसेस ज्वाइन करे. जिसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की प्रैक्टिस छोड़ दिल्ली के मुखर्जी नगर में 1 साल तक पूरी लगन और मेहनत से तैयारी की. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2011 के इंटरव्यू तक भी पहुंचे. लेकिन दुर्भाग्यवश उनका फाइनल सेलेक्शन नहीं हो सका. उन्होंने दूसरी बार तैयारी शुरू की. लेकिन तैयारी के दौरान ही पिता जी का देहांत हो गया. पिताजी के देहांत के बाद उन्हें मप्र पुलिस विभाग में सूबेदार पद पर अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी ज्वाइन करनी पड़ी. उनकी जर्नी आगे बढ़ने की बजाय रिवर्स हो गई.

पुलिस विभाग की नौकरी नहीं थी पसंद
नौकरी के दौरान उन्हें लगता था कि इस नौकरी में वह कहां फंस गए? ये नौकरी शूट नहीं करती है. इतनी पढ़ाई करने के बाद और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने के बाद सूबेदार ही बनना था तो फिर इतनी पढ़ाई की जरूरत ही क्या थी? हालांकि, उस दौरान सबसे ज्यादा सपोर्ट उनकी मां ने किया. मां पुलिस विभाग से वाकिफ थीं. वह कहती थीं कि पुलिस विभाग में धीरे-धीरे समझ बढ़ेगी और फिर इसी में ढल जाओगे. पुलिस विभाग में ये अच्छा पद है,  काम करोगे तो सम्मान प्राप्त करोगे. मां की ये बातें आज भी उनके मन में हैं.

हिंदी भाषा बनी थी समस्या
वह बताते हैं कि नौकरी के दौरान मुझे समस्याएं थीं. सबसे बड़ी समस्या हिंदी भाषा को लेकर भी थी. क्योंकि मुझे हिंदी भाषा नहीं आती थी. उनकी पूरी पढ़ाई बड़े शहरों में रहकर इंग्लिश मीडियम से थी. वहीं पुलिस की नौकरी में सूबेदार के तौर पर हिंदी लिखना, लोगों से बातचीत करना. ये उनके लिए दिक्कत ही थी. वह बताते हैं कि मेरे पहले गुरू आरआई(रक्षित निरीक्षक) थे, जिनके साथ वह अंडर ट्रेनी थे. उन्होंने मेरी इस समस्या का समाधान बताया. उन्होंने ओबी(आर्डरली बुक)में हर दिन पुलिस विभाग की क्रियाकलाप को 2 घंटे लिखने को कहा. मैंने ऐसा करीब 12 महीने तक किया. हर दिन शाम को 2 घंटे रजिस्टर में दिनभर की क्रियाकलाप लिखता. इस तरह मैंने पुलिस विभाग की लेखन और बोलचाल वाली हिंदी सीखी.

ऐसे रही नौकरी की सफल जर्नी
बृहस्पति कुमार बताते हैं कि मेरी पहली पोस्टिंग होशंगाबाद में हुई. वहां अतिक्रमण और रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा फोकस किया था. साल 2014 में पहली बार चौराहों पर माइक सिस्टम लगाए थे. होशंगाबाद में 3 साल की सेवा के बाद रायसेन में यातायात प्रभारी के तौर पर सेवाएं दीं. इसके बाद अनूपपुर जिले में पोस्टिंग हुई.

सूबेदार से बनें रक्षित निरीक्षक
वह बताते हैं कि अनूपपुर ट्रैफिक के लिए डिस्टर्ब जिला था. मैंने पहली बार ट्रैफिक वार्डन सिस्टम शुरू किया. युवाओं को प्रेरित करके ट्रैफिक वार्डन बनाया. अनूपपुर जिले में ही रक्षित निरीक्षक(RI) का चार्ज मिला था. इसके बाद छतरपुर जिले में भी रक्षित निरीक्षक(RI) के तौर पर बड़ामलहरा विधानसभा उपचुनाव के दौरान 1 साल काम करने का मौका मिला. छतरपुर में एक साल के छोटे से टेन्योर के बाद निवाड़ी जिले में आरआई(रक्षित निरीक्षक) रहा. साथ ही यातायात प्रभारी भी बनाया गया था. निवाड़ी के बाद फरवरी 2024 में छतरपुर जिले में यातायात प्रभारी के तौर पर ज्वाइन किया. छतरपुर में 2 साल 6 महीने से यातायात व्यवस्था देख रहा हूं.

ट्रैफिक पार्क और हेलमेट बैंक की सुविधा
छतरपुर में यातायात को आसान और सुगम बनाने के लिए उन्होंने ट्रैफिक पार्क और हेलमेट बैंक जैसे नवाचार भी किए हैं. मोडिफाइड साइलेंसर बाईक चालकों पर कार्रवाई की है. साथ ही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ब्लैक और रेड स्पॉट्स चिन्हित किए हैं जिससे सड़क दुर्घटनाओं पर कमी आई. छतरपुर यातायात थाना को आईएसओ सर्टिफिकेट भी मिला है. बता दें, सभी नवाचार और जागरूकता अभियान एवं सड़क हादसो पर नियंत्रण से जिला छतरपुर में 30 प्रतिशत सड़क हादसो एंड मृत्यृ दर में कमी प्राप्त हुई है.



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