नई दिल्ली (Military School vs Sainik School Difference). देश की सेवा करने का सपना देखने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के मन में अक्सर एक सवाल आता है- मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में से कौन सा बेहतर रहेगा? दोनों स्कूलों में अनुशासन, पढ़ाई, खेलकूद और पर्सनल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाता है. यहां बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनना, टीम में काम करना और जिम्मेदारी उठाना भी सिखाया जाता है.
मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में क्या अंतर है?
बच्चे का एडमिशन करवाने से पहले मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल के बीच अंतर समझने के लिए आपको इन फैक्टर्स पर गौर करना चाहिए:
| फैक्टर | मिलिट्री स्कूल | सैनिक स्कूल |
| संचालन | रक्षा मंत्रालय के अधीन | सैनिक स्कूल सोसाइटी, रक्षा मंत्रालय |
| प्रमुख संस्थान | राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS) | सैनिक स्कूलों का नेटवर्क |
| बोर्ड | सीबीएसई | सीबीएसई |
| प्रवेश परीक्षा | RMS CET | AISSEE |
| एडमिशन | मुख्य रूप से क्लास 6 और 9 | मुख्य रूप से क्लास 6 और 9 |
| लड़कियों का एडमिशन | निर्धारित सीटों और नियमों के अनुसार | निर्धारित सीटों और नियमों के अनुसार |
| फीस | श्रेणी और नियमों के अनुसार | स्कूल और श्रेणी के अनुसार |
| सेना में नौकरी | सीधे नहीं मिलती | सीधे नहीं मिलती |
ध्यान दें: दोनों संस्थानों की सीटें, पात्रता और प्रवेश नियम ऑफिशियल नोटिफिकेशन में चेक कर सकते हैं.
राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में एडमिशन कैसे मिलता है?
राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल में एडमिशन के लिए RMS Common Entrance Test (CET) देना जरूरी है. सैनिक स्कूलों में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) आयोजित है. दोनों में आम तौर पर कक्षा 6 और 9 में एडमिशन मिलता है. आवेदन, आयु सीमा, परीक्षा और चयन से जुड़े नियम समझने के लिए लेटेस्ट नोटिफिकेशन चेक करें. सैनिक स्कूल में एडमिशन के लिए NTA की वेबसाइट और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के लिए RMS नोटिफिकेशन पर नजर रखें.
मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल की फीस कितनी है?
फीस के मामले में दोनों स्कूलों की तुलना करते समय सिर्फ ट्यूशन फीस नहीं, बल्कि हॉस्टल, भोजन, यूनिफॉर्म, किताबों का खर्च और अन्य शुल्क भी जोड़ें. सैनिक स्कूल की कुल फीस स्कूल के हिसाब से काफी अलग हो सकती है. राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों में भी कैडेट की श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार फीस में अंतर होता है. रक्षा कर्मियों के बच्चों और अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए कुछ रियायतें लागू हो सकती हैं.
काम की सलाह: एडमिशन से पहले स्कूल का लेटेस्ट फीस स्ट्रक्चर और रिफंड नियम जरूर पढ़ें. पुरानी वेबसाइट या किसी दूसरे स्कूल की फीस देखकर बजट न बनाएं.
मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल के सिलेबस में क्या अंतर है?
दोनों स्कूलों में पढ़ाई CBSE सिलेबस के अनुसार होती है. अंतर मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षा के पैटर्न में है. कक्षा 6 के लिए गणित, भाषा, इंटेलिजेंस टेस्ट और सामान्य ज्ञान जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं. कक्षा 9 के एडमिशन में गणित, अंग्रेजी, विज्ञान और सोशल साइंस की तैयारी भी जरूरी होती है. AISSEE और RMS CET के प्रश्नपत्र, मार्क्स डिस्ट्रिब्यूशन और विषयों का वेटेज एक जैसा मानकर तैयारी न करें. संबंधित परीक्षा का सिलेबस अलग से डाउनलोड करें.
मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में दिनचर्या कैसी होती है?
दोनों तरह के स्कूलों में हॉस्टल, तय दिनचर्या, फिजिकल एक्टिविटीज, खेलकूद और अनुशासन को महत्व दिया जाता है. स्टूडेंट्स को समय पर उठने, अपनी जिम्मेदारियां निभाने और ग्रुप में रहने की आदत डालनी पड़ती है. हालांकि, हॉस्टल की व्यवस्था, यूनिफॉर्म, छुट्टियों और रोजाना की एक्टिविटीज के नियम स्कूल के अनुसार अलग हो सकते हैं.
इन स्कूलों में करियर स्कोप क्या है?
इन स्कूलों से पढ़ने वाले स्टूडेंट्स NDA, अन्य रक्षा प्रवेश परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में करियर बनाने की कोशिश कर सकते हैं. एनडीए के लिए आगे चलकर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, आयु, मेडिकल स्टैंडर्ड्स और चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. स्कूल का नाम अपने आप चयन की गारंटी नहीं देता.
मिलिट्री स्कूल और सैनिक स्कूल में से किसमें एडमिशन लें?
अगर आपका गोल अनुशासित रेजिडेंशियल एजुकेशन और रक्षा सेवाओं की तैयारी का है तो दोनों ऑप्शन पर विचार करें. फैसला केवल प्रतिष्ठा या फीस देखकर न करें. स्कूल की पढ़ाई, पिछले शैक्षणिक नतीजे, हॉस्टल की व्यवस्था, घर से दूरी और बच्चे की रुचि भी देखें. बच्चे को हॉस्टल में रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना भी जरूरी है.