अजब-गजब परंपरा! दशहरा पर पान खिलाना जरूरी, युद्ध पर विजय से जुड़ी है मान्यता

अजब-गजब परंपरा! दशहरा पर पान खिलाना जरूरी, युद्ध पर विजय से जुड़ी है मान्यता


सागर. भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी यानी दशहरा पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. कहीं रावण दहन किया जाता है, तो कहीं पर 9 दिन तक आराधना करने के बाद देवी प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है. व्रत अनुष्ठान से आराधना करने वाले लोग भी परायण करते हैं लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में विजयादशमी को लेकर एक अजब-गजब परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है और आज भी इसमें जरा भी कमी नहीं आई है.

बुंदेलखंड में दशहरे पर राम-राम का अभिवादन करने और एक दूसरे को पान खिलाने की परंपरा है. इस दिन पनवाड़ियों की दुकान पर सामान्य दिनों की अपेक्षा तीन से चार गुना अधिक भीड़ दिखाई देती है. सुबह से लेकर देर रात तक पान खाने-खिलाने का सिलसिला चलता रहता है. लोग आते हैं, मीठा या अन्य पान लगवाते हैं, कोई दुकान पर ही राम-राम करके सामने वाले को पान खिला देता है, तो कोई पैक करवाकर घर ले जाता है. कोई अपने दोस्तों को, तो कोई अपने परिजनों के लिए मीठा पान लेकर जाता है.

सागर की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध दुकान बनारसी पान भंडार के संचालक भोले बनारसी ने लोकल 18 से कहा कि बुंदेलखंड में दशहरे पर पान खाना विजय उत्सव का प्रतीक माना गया है, इसलिए लोग एक-दूसरे से दशहरे की राम-राम करते हैं, उनको पान खिलाते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है. दशहरे के दिन वे लोग भी पान खाने के लिए आते हैं, जो सालभर कभी पान नहीं खाते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि दशहरा वाले दिन उनके पास बांग्ला पत्ता, मीठा पत्ता, बनारसी पत्ता, मसाला वाला पान, सादा पान और दशहरा स्पेशल पान मिलता है. सुबह 7 बजे से दुकानदारी शुरू होती है और रात 11 बजे तक दुकान खुली रहती है. इस दौरान इतनी भीड़ आती है कि दो लोग पान बनाते हैं, तो भी कम पड़ जाते हैं. पान खाने वाले ज्यादा रहते हैं.

उन्होंने कहा कि दशहरा स्पेशल पान की बात करें, तो इसके लिए मनपसंद पान के पत्ते के में चूना और कत्था लगाया जाता है. इसके अलावा गुलकंद, नारियल का बूरा, सौंफ, इलायची, मीठी सुपारी या सुपारी के विकल्प, टूटी-फ्रूटी, चेरी, चॉकलेट सॉस, चांदी का वर्क का इस्तेमाल किया जाता है. इस तरह से एक बेहद ही टेस्टी और दिल खुश कर देने वाला पान तैयार हो जाता है.



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