Last Updated:
अमेठी राज महल और रियासत की अलग कहानी है. 1857 की क्रांति में जो राजमहल और रियासत अंग्रेजों का कब्जा हुआ करती थी उसे राजा ने अंग्रेजों से छुड़ा लिया और युद्ध के जरिए अंग्रेजों को परास्त कर दिया गया. आज अमेठी का ऐतिहासिक राजमहल अमेठी में मौजूद है जो धरोहर के रूप में जाना जाता है. अमेठी में इसे भूपति भवन के रूप में जाना जाता है. यह महल अपनी नक्काशी अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है महल को बनाने में लखनौरी ईटों का इस्तेमाल किया गया था. आज भी यह महल बिना किसी आंतरिक खर्च और बिना मरम्मत के पुराना ऐतिहासिक महल जैसा चमचमा रहा है इसकी बनावट आज भी चर्चा का केंद्र रहती है.
अमेठी जिले में कई प्राचीन धरोहर आज भी मौजूद हैं जो अंग्रेजों के समय में कभी चर्चा का केंद्र हुआ करती थी अमेठी में इस धरोहर में शामिल है राजा का राजमहल. जिसका निर्माण सैकड़ो वर्ष पूर्व हुआ था वह राजमहल आज भी चमचमा रहा है और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में जाना जाता है.
1893 ईस्वी में इस राज महल की स्थापना कराई गई या राज महल ऐतिहासिक होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी चर्चा का केंद्र है. कई राजाओं ने इस राजमहल पर राज किया और आज भी यह धरोहर के रूप में जाना जाता है. राजा गुरु दत्त सिंह ने 1893 ईस्वी में इस राज महल की स्थापना कराई थी उस समय यह महल चर्चा का केंद्र था.
1857 की क्रांति में अमेठी में इस राजमहल और किले पर अंग्रेजी ब्रिगेडियर और हुकूमत ने कब्जा करने के लिए चारों तरफ से महल को घेर लिया था, लेकिन अमेठी के राजा ने उस समय अंग्रेजों से युद्ध लड़कर इस राज महल को मुक्त और अंग्रेजों को परास्त किया था इसका भी एक रोचक इतिहास इस राजमहल का है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
यह महल अमेठी में बहुत ही चर्चित है. अमेठी में इसे भूपति भवन के रूप में जाना जाता है. यह महल अपनी नक्काशी अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है महल को बनाने में लखनौरी ईटों का इस्तेमाल किया गया था. आज भी यह महल बिना किसी आंतरिक खर्च और बिना मरम्मत के पुराना ऐतिहासिक महल जैसा चमचमा रहा है इसकी बनावट आज भी चर्चा का केंद्र रहती है.
अमेठी के ऐतिहासिक राज महल पर राजा गुरु दत्त सिंह राजा विश्वेश्वर सिंह राजा लाल माधव सिंह राजा रंणजय सिंह राजा भगवान बक्श सिंह सहित अलग-अलग राजाओं ने राज किया और वर्तमान समय में इस राज परिवार और महल के उत्तराधिकारी के रूप में अमेठी महाराज डॉक्टर संजय सिंह प्रमुख हैं.
महाराज सोंढ देव ने 966 ईस्वी में अमेठी राजवंश और रियासत की स्थापना की थी और यह महल काफी दूरी में बना हुआ है और इस राजमहल पर उस समय बेहतर नक्काशी के साथ-साथ कई ऐतिहासिक दीवारें जो वास्तुकला और धरोहर के रूप में जानी जाती हैं वह तैयार की गई थी यह राजमहल अमेठी के रामनगर में स्थापित है जो आज भी लोगों के लिए चर्चा का केंद्र बिंदु है.