मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर करीब 70 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. बिहार सरकार की आंतरिक जांच रिपोर्ट में वर्ष 2023 से 2026 के बीच जिले के 46 स्कूलों में कराए गए विकास कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों की बात सामने आई है. जहां एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में वास्तविक काम किए बिना भुगतान के बिल तैयार किए गए हैं. जबकि एक ही काम के लिए कई बार बिल लगाए जाने के भी आरोप हैं. ऐसे में जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा हो गया है.
46 स्कूलों के 136 वाउचर जांच के दायरे में
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक शिकायतकर्ता और लोहा पंचायत के मुखिया मनोज कुमार साहनी ने मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट और मीनापुर प्रखंडों के 46 स्कूलों की सूची जांच के लिए दी थी. इन स्कूलों से जुड़े 136 वाउचर में मरम्मत, बाउंड्री वॉल निर्माण, रंगाई-पुताई और रखरखाव जैसे कार्यों का उल्लेख किया गया था. जहां जांच समिति के अनुसार, इन कार्यों के भुगतान में कई तरह की गड़बड़ियां सामने निकलकर सामने आई.
एक ही काम के लिए कई बार बिल बनाने का आरोप
इस जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि कुछ स्कूलों के एक ही काम के लिए अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से 2-5 बार तक बिल निकाले गए हैं. वहीं, वाउचर की जांच में अलग-अलग स्कूलों के बिलों में समान राशि दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिससे मानक के आधार पर भुगतान किए जाने और वास्तविक काम की जांच नहीं करने का संदेह निकलकर सामने आ गया. जांच समिति ने यह भी पाया कि कई मामलों में काम शुरू करने से पहले जरूरी भौतिक निरीक्षण, माप पुस्तिका (एम-बुक) और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है.
5 लाख से अधिक के काम को छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप
इस रिपोर्ट के मुताबिक, जिला शिक्षा कार्यालय से 5 लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए कोई औपचारिक प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं की गई थी. इसके बजाय कुछ परियोजनाओं को कथित तौर पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर 5 लाख रुपये से कम दिखाया गया है. इससे निर्धारित प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का भी आरोप लगा है.
जहां नियमों के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम शुरू करने से पहले जरूरी भौतिक निरीक्षण और तकनीकी आकलन किया जाना चाहिए, लेकिन जांच समिति को ऐसे कई मामलों में प्रक्रियाओं के उल्लंघन निकलकर सामने आया है.
जिला शिक्षा कार्यालय पर भी उठे सवाल
इस जांच रिपोर्ट में जिला शिक्षा कार्यालय पर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया है. अतिरिक्त समाहर्ता (विभागीय जांच) की ओर से कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद कार्यालय कथित तौर पर फाइलें, वर्क ऑर्डर, एम-बुक और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका है. जहां 6 अप्रैल को जांच समिति के सदस्यों के कार्यालय पहुंचने पर भी कर्मचारियों ने फाइलें तलाशने की बात कही गई. इन दस्तावेजों के अभाव में समिति के लिए यह सत्यापित करना मुश्किल हो गया कि संबंधित कार्य वास्तव में भुगतान से पहले पूरे किए गए थे या नहीं.
शिक्षा मंत्री ने दिए जांच और कार्रवाई का आदेश
वहीं, मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में भी लाया गया था. इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की मांग उठी. फिर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मामला गंभीर है. उन्होंने बताया कि पूरी जानकारी मंगाई गई है और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मामले की गहन समीक्षा कर उचित कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, जांच रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर मामले में जवाबदेही तय करने और आगे की कार्रवाई पर नजर टिकी है. इन आरोपों की अंतिम पुष्टि और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई संबंधित विभागीय जांच तथा आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.