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Dehradun Kumhar Mandi Diwali Shopping: दिवाली पर देहरादून की कुम्हार मंडी में मिट्टी के बर्तनों का नया अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है. इस बार बाजार में सिर्फ दीये ही नहीं, बल्कि मिट्टी की वॉटर बॉटल, कुकर, कढ़ाई, हांडी और डिजाइनर कप-प्लेट के सेट भी मिल रहे हैं. इनकी कीमत 300 से 1000 रुपये तक है. कुम्हार विष्णु प्रजापति के मुताबिक, आधुनिक डिजाइन और पारंपरिक कारीगरी से तैयार इन बर्तनों की मांग बढ़ रही है. लोग इन्हें अपने घर के लिए खरीदने के साथ दिवाली पर गिफ्ट देने के लिए भी पसंद कर रहे हैं. जानिए देहरादून में कहां मिल रहे हैं मिट्टी के ये खास बर्तन और क्या है इनकी कीमत.
देहरादून में इस बार दीपावली के पावन अवसर पर परंपरा और आधुनिकता का एक बेहद अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. आज के इस एडवांस्ड जमाने में हमारी पुरानी और प्राचीन परंपराएं पूरी तरह से एक नए और आकर्षक रूप में वापस लौट आई हैं. इस त्योहारी सीजन में केवल पारंपरिक दीये ही नहीं बल्कि आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढले हुए मिट्टी के बर्तन भी बाजार में सबका दिल जीत रहे हैं. लोगों के बीच इन उन्नत उत्पादों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है और हर कोई इन्हें खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है.
बाजार में इस समय पारंपरिक बर्तनों की जगह नए जमाने के स्टाइल वाले मिट्टी के बर्तन धूम मचा रहे हैं. आकर्षक वॉटर बॉटल्स और मिट्टी की कढ़ाई से लेकर सुंदर कप-प्लेट, कटोरी और चम्मच के नए-नए डिजाइनदार सेट्स खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं. देहरादून की प्रसिद्ध कुम्हार मंडी में मिट्टी के कुकवेयर, हांडी, कुकर और कुकिंग पॉट्स जैसे आधुनिक प्रोडक्ट्स आसानी से मिल रहे हैं. इन सभी डिजाइनर उत्पादों की शुरुआती कीमत लगभग 300 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक तय की गई है जो ग्राहकों को खूब भा रही है.
कुम्हार मंडी के कुशल कुम्हार विष्णु प्रजापति ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि लोग अब मिट्टी के सामान को लेकर काफी उत्साहित हैं .उन्होंने कहा कि मिट्टी की सौंधी खुशबू और सेहत से भरपूर गुणों को आधुनिक फिनिशिंग व बेहतरीन नक्काशी के साथ जोड़कर तैयार किया जा रहा है. बाजार में इन बर्तनों की जबरदस्त डिमांड को देखते हुए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि ग्राहकों की हर जरूरत को समय पर पूरा किया जा सके. इस त्योहारी सीजन में ये बर्तन रसोई और डायनिंग टेबल को एक बेहद रॉयल और एथनिक लुक देते हैं.
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आज के इस आधुनिक दौर में लोग प्लास्टिक और स्टील के बर्तनों को छोड़कर तेजी से मिट्टी के बर्तनों को अपना रहे हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण रसोईघरों में एक बार फिर से माटी के बर्तनों की वापसी हो रही है. दीवाली के इस पावन अवसर पर अपने घर को सजाने और मेहमानों का शानदार तरीके से स्वागत करने के लिए ये बर्तन एक बेहतरीन विकल्प बन चुके हैं. बाजारों में इनकी लगातार बढ़ती हुई मांग इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि लोग अब अपनी प्राचीन संस्कृति की तरफ दोबारा लौट रहे हैं.
परंपरा और आधुनिकता का यह सुंदर संगम इस त्योहार पर हमारे घरों को प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक ऊर्जा से पूरी तरह भर रहा है. देहरादून के स्थानीय कारीगरों के हुनर को इस नई बदलाव और आधुनिक डिजाइनिंग के जरिए एक बहुत बड़ी वैश्विक पहचान मिल रही है. विष्णु प्रजापति और अन्य स्थानीय कुम्हारों का मानना है कि यदि इस तरह की डिमांड बनी रही तो पारंपरिक कला का भविष्य हमेशा सुरक्षित रहेगा. लोग अपने घरों के उत्सव को खास बनाने के लिए इन डिजाइनर और ईको-फ्रेंडली बर्तनों की एडवांस बुकिंग भी करवा रहे हैं.
दीपावली के इस खास मौके पर केवल सजावट ही नहीं बल्कि खानपान के लिए भी मिट्टी के बर्तनों की मांग आसमान छू रही है. लोग अपने परिवार के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए मिट्टी के कुकर और हांडी में खाना पकाना पसंद कर रहे हैं. इन बर्तनों में बना खाना न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है. देहरादून के बाजारों में इन उत्पादों की भारी डिमांड ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिकता के इस युग में भी हमारी मिट्टी की सौंधी खुशबू लोगों की पहली पसंद बनी हुई है.
दीपावली के पावन पर्व पर उपहार देने के चलन में भी अब मिट्टी के आधुनिक सेट एक नया और शानदार ट्रेंड बनकर उभर रहे हैं. लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों को स्टील या कांच के तोहफे देने के बजाय मिट्टी के डिजाइनर डिनर सेट और खूबसूरत वॉटर बॉटल गिफ्ट कर रहे हैं. यह पर्यावरण के अनुकूल और बेहद ईको-फ्रेंडली विकल्प समाज में एक बहुत ही सकारात्मक संदेश दे रहा है.बाजार में इन खास गिफ्ट पैक्स की भारी मांग ने स्थानीय कुम्हारों के चेहरों पर एक नई खुशी और उत्साह भर दिया है .
इस तरह देहरादून में परंपरा का यह मॉडर्न अवतार दीपावली के इस त्योहार को हर लिहाज से और भी अधिक खास और यादगार बना रहा है. मिट्टी के बर्तनों की आधुनिक बाजार में लगातार बढ़ती हुई यह डिमांड इस बात का संकेत है कि हमारी पुरानी संस्कृति कभी पुरानी नहीं हो सकती. स्थानीय कारीगरों की मेहनत और आधुनिक तकनीक का यह मेल आने वाले समय में हस्तशिल्प उद्योग को एक नई ऊंचाई पर लेकर जाएगा. हर घर में इन सुंदर और सेहतमंद बर्तनों की गूंज यह बताती है कि हमारी असली जड़ें आज भी हमारी माटी से ही जुड़ी हुई हैं.