ADC in Indian Army Rank Eligibility: क्या एडीसी बनने के लिए ‘मेजर’ होना जरूरी है? जानिए इस खास पद के चौंकाने वाले नियम

ADC in Indian Army Rank Eligibility: क्या एडीसी बनने के लिए ‘मेजर’ होना जरूरी है? जानिए इस खास पद के चौंकाने वाले नियम


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ADC in Indian Army Rank Eligibility: क्या भारतीय सेना में सिर्फ ‘मेजर’ रैंक के अधिकारी ही राष्ट्रपति के एडीसी बन सकते हैं? सेना के इस प्रतिष्ठित पद पर चयन के नियम क्या हैं? ऋषभ सिंह संब्याल और नव्या शेखावत के रेफरेंस से समझिए एडीसी बनने की गाइडलाइंस.

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ADC in Indian Army Rank Eligibility: राष्ट्रपति के एडीसी की चयन प्रक्रिया बहुत कठोर है

नई दिल्ली (ADC in Indian Army Rank Eligibility). सभी विशेष कार्यक्रमों में महामहिम राष्ट्रपति के साथ बेहद अनुशासित और वर्दीधारी अधिकारी साए की तरह चलते हुए नजर आते हैं. उन्हें देखकर मन में कई सवाल उठते हैं. इन खास अधिकारियों को एडीसी यानी Aide-de-Camp कहा जाता है. आम तौर पर लोगों को भ्रम रहता है कि इस बेहद जिम्मेदारी वाले पद पर सिर्फ ‘मेजर’ रैंक के सैन्य अधिकारी ही नियुक्त हो सकते हैं. आम लोगों को अक्सर लगता है कि यह पद केवल इसी खास रैंक के लिए आरक्षित है.

क्या सेना में एडीसी बनने के लिए ‘मेजर’ होना ही एकमात्र पैमाना है या इसके पीछे कोई और दिलचस्प चयन प्रक्रिया है? अब सैन्य सेवाओं में तेजी से बदलाव आ रहा है और महिलाओं की भूमिका भी हर मोर्चे पर मिसाल कायम कर रही है. जानिए राष्ट्रपति का एडीसी बनने की असली योग्यता क्या होती है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल और मौजूदा एडीसी नव्या शेखावत के उदाहरणों के जरिए समझिए इस पद से जुड़ी हर डिटेल.

क्या सिर्फ मेजर रैंक के अधिकारी ही ADC बन सकते हैं?

एडीसी बनने के लिए केवल ‘मेजर’ होना जरूरी नहीं है. हालांकि, सैन्य परंपराओं और प्रोटोकॉल के मुताबिक एडीसी के पद पर तैनात होने वाले अधिकारी आमतौर पर सेना के कैप्टन, मेजर या लेफ्टिनेंट कर्नल (या नौसेना और वायुसेना में इसके समकक्ष) रैंक के अधिकारी होते हैं. चयन का आधार निश्चित रैंक नहीं, बल्कि अधिकारी का असाधारण सर्विस रिकॉर्ड, अनुशासित वर्क स्टाइल, शारीरिक और मानसिक क्षमता और उच्चाधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन की स्किल है. सेना के नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति के एडीसी या राज्यपाल के ADC के लिए रैंक के पैमाने अलग हो सकते हैं. इसमें कैप्टन और लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारी भी चुने जाते हैं.

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल और नव्या शेखावत का रेफरेंस

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल अपनी बेहतरीन कार्यकुशलता और सैन्य कौशल के दम पर एडीसी के पद तक पहुंचे. लोगों के मन में धारणा बैठ गई कि यह पद सिर्फ मेजर के लिए है. एडीसी नव्या शेखावत के उदाहरण से समझ सकते हैं कि अब महिला अधिकारी भी इस प्रतिष्ठित भूमिका में अपनी सेवाएं दे रही हैं. विभिन्न सैन्य समारोहों और वीवीआईपी दौरों के दौरान महिला सैन्य अधिकारियों (कैप्टन या अन्य युवा रैंक की अधिकारियों) ने भी ADC के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है. यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जेंडर या केवल ‘मेजर’ रैंक की बाध्यता जैसी कोई कठोर दीवार इस पद के आड़े नहीं आती है.

एडीसी का चयन कैसे होता है और क्या हैं जिम्मेदारियां?

एडीसी का पद केवल रुतबे का नहीं, बल्कि भारी जिम्मेदारी और अटूट निष्ठा का प्रतीक होता है.

  • चयन प्रक्रिया: इस पद के लिए सेना के अंदर से ही सबसे बेहतरीन और अनुशासित अधिकारियों को चुना जाता है. इसके लिए लंबी और कठोर प्रक्रिया होती है. अधिकारी को उसके पास्ट रिकॉर्ड, ड्रिल, कमांडिंग अफसर के रिकमंडेशन और इंटरव्यू से परखा जाता है.
  • मुख्य कार्य: एडीसी का मुख्य काम राष्ट्रपति, राज्यपाल या सेना के टॉप कमांडर को उनके आधिकारिक दौरों, सुरक्षा और प्रशासनिक बैठकों में असिस्ट करना होता है. वे साए की तरह उनके साथ रहते हैं और हर प्रोटोकॉल का बारीकी से पालन कराते हैं.

एडीसी पद से जुड़े अनसुने और रोचक तथ्य

कम ही लोग जानते हैं कि एडीसी का पद ब्रिटिश काल की सैन्य परंपराओं से चला आ रहा है. इसे आज भी भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने सर्वोच्च सम्मान के साथ सहेजकर रखा है. एडीसी अपनी यूनिट से डेपुटेशन पर कुछ सालों के लिए वीवीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए आते हैं. इस दौरान उन्हें देश के सर्वोच्च नेतृत्व के साथ काम करने का अनुभव मिलता है. यह पद इस बात का उदाहरण है कि भारतीय सेना में तरक्की और प्रतिष्ठा का आधार सिर्फ उम्र या अनुभव नहीं, बल्कि काबिलियत और राष्ट्र के प्रति समर्पण है.



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