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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कादीपुर स्थित सत्यनाथ मठ आश्रम में भगवान गणेश की एक अनोखी प्रतिमा विराजमान है. इस प्रतिमा में गणेश जी मूषक की जगह शेर पर सवार हैं और उनके गले में नरमुंडों की माला दिखाई देती है. उनका यह स्वरूप सामान्य गणेश प्रतिमाओं से अलग है. स्थानीय इतिहास के जानकार श्याम चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार, यह प्रतिमा सुल्तानपुर की धार्मिक विरासत का खास हिस्सा है.
उत्तर प्रदेश में कई ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं और विशेष प्रतिमाओं के लिए जाने जाते हैं. आमतौर पर भगवान गणेश को मूषक यानी चूहे की सवारी करते हुए देखा जाता है, लेकिन सुल्तानपुर में गणेश जी का एक ऐसा अद्भुत स्वरूप मौजूद है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं. यहां भगवान गणेश के गले में नरमुंडों की माला है और वे शेर पर सवार हैं. उनका यह स्वरूप सामान्य गणेश प्रतिमाओं से बिल्कुल अलग दिखाई देता है. धार्मिक आस्था और रहस्यमयी स्वरूप के कारण यह प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
कादीपुर के सत्यनाथ मठ में विराजमान हैं गणेश जी
भगवान गणेश की यह अनोखी प्रतिमा सुल्तानपुर जिले के कादीपुर स्थित सत्यनाथ मठ आश्रम में स्थापित है. यह आश्रम अपनी प्राचीन परंपराओं और धार्मिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है. यहां स्थापित गणेश जी की प्रतिमा अपने अलग स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं और धार्मिक स्थलों में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान खींचती है. प्रतिमा में भगवान गणेश शेर पर विराजमान हैं और उनके गले में नरमुंडों की माला दिखाई देती है. यह स्वरूप आमतौर पर प्रचलित गणेश प्रतिमाओं से अलग है. इसी वजह से सत्यनाथ मठ की यह प्रतिमा सुल्तानपुर की धार्मिक विरासत में विशेष स्थान रखती है.
भगवान गणेश का अघोरी स्वरूप क्यों है खास?
भगवान गणेश की इस प्रतिमा को अघोरी स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है. नरमुंडों की माला और शेर की सवारी इसे एक अलग पहचान देती है. आमतौर पर गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है, जबकि इस प्रतिमा में उनका स्वरूप तांत्रिक और अघोर परंपराओं की याद दिलाता है. हालांकि, इस विशेष प्रतिमा के निर्माण काल और इसके स्वरूप से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी की पुष्टि के लिए प्रमाणिक अभिलेखों की जरूरत है. फिर भी इसकी अनोखी बनावट इसे धार्मिक दृष्टि से जिज्ञासा का विषय बनाती है.
जानकार ने बताई प्रतिमा की विशेषता
वरिष्ठ पत्रकार और स्थानीय इतिहास के जानकार श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि कादीपुर स्थित सत्यनाथ मठ आश्रम और यहां स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा काफी अद्भुत है. उनका यह स्वरूप सामान्य रूप से देखी जाने वाली गणेश प्रतिमाओं से अलग है. सुल्तानपुर की धार्मिक विरासत में ऐसे स्थल खास महत्व रखते हैं, क्योंकि इनके साथ स्थानीय परंपराएं, आस्था और इतिहास जुड़े हुए हैं. सत्यनाथ मठ में विराजमान भगवान गणेश की यह प्रतिमा उन लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है, जो प्राचीन मंदिरों और दुर्लभ धार्मिक प्रतिमाओं के बारे में जानना चाहते हैं.