Ground Report: इस बार भी चुनाव ड्यूटी करेंगे पशु चिकित्साकर्मी, पशुपालक बोले- बीमार पशुओं का इलाज कौन करेगा?

Ground Report: इस बार भी चुनाव ड्यूटी करेंगे पशु चिकित्साकर्मी, पशुपालक बोले- बीमार पशुओं का इलाज कौन करेगा?


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Sirohi Ground Report: राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सिरोही जिले में पशु चिकित्सा विभाग के करीब 100 कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगाए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के इलाज पर असर पड़ने की आशंका है. पशुपालकों का कहना है कि चुनाव के दौरान पशु चिकित्साकर्मियों की अनुपलब्धता से बीमार पशुओं को समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो सकता है. पिछली बार चुनाव के दौरान आबूरोड के किवरली गांव में पशुपालक गणपत सिंह के पशु की समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत होने की जानकारी सामने आई थी. राष्ट्रीय पशुपालक संघ और पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ भी इस मामले में प्रशासन से मांग उठा चुके हैं. पशुपालकों ने चुनाव के दौरान पशु चिकित्सालयों में पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है.

सिरोही: आगामी पंचायत चुनाव को लेकर विभिन्न विभागों के साथ पशु चिकित्सा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को भी इस बार चुनाव ड्यूटी करनी पड़ेगी. जिले से करीब 100 चुनाव ड्यूटी में विभाग से कर्मचारियों को लगाया गया है. इनमें विभाग के तकनीकी कर्मचारी भी शामिल है. ऐसे में कई उप केंद्रों और अस्पतालों में पशु चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी आशंका है. पिछली बार के चुनाव में भी पशु चिकित्सा कर्मियों को चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने से कई पशुपालकों को समय पर पशुओं के लिए इलाज नहीं मिल पाया था. इस वजह से कुछ स्थानों पर पशुओं के मरने की भी जानकारी मिली थी.

आबूरोड के किवरली गांव में एक पशुपालक गणपत सिंह के पशु चुनाव के समय बीमार होने और पशु चिकित्साकर्मी की चुनाव ड्यूटी के दौरान पशु को समय पर उपचार नहीं मिलने से पशु की मौत हो गई थी. समस्या को लेकर लोकल 18 ने पशुपालकों से उनकी समस्या को जाना. सांतपुर गांव के पशुपालक पीराराम देवासी और वाघाराम देवासी ने बताया कि चुनाव में पशु चिकित्सा कमर्चारियों की ड्यूटी लगा दी जाती है. इससे कई पशुपालकों को अपने बीमार पशु का इलाज करवाने समेत कई कार्यों में दिक्कत होती है. पिछली बार भी चुनाव के समय इस परेशानी का सामना करना पड़ा था. उनकी सरकार से मांग है कि इस विभाग के पशु चिकित्सा से जुड़े कर्मचारियों को ड्यूटी पर ना लगाया जाए, ताकि पशुओं का इलाज किसी भी तरह प्रभावित ना हो.

पशुओं के लिए पुख्ता व्यवस्था करें विभाग और प्रशासन

राष्ट्रीय पशुपालक संघ सिरोही के जिलाध्यक्ष सवाराम देवासी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सिरोही जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया था. इसमें ज्ञापन के जरिए चुनाव के दौरान पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी. सवाराम ने बताया कि चुनाव ड्यूटी में पशु चिकित्सालयों के कर्मचारियों की नियुक्ति होने से पशुओं के इलाज की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. सिरोही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है. ऐसे में पशुओं के बीमार होने, चोट लगने या आपातकालीन उपचार की जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है.

पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ भी जता चुका विरोध

वहीं विभाग के तकनीकी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने पर राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ के सिरोही जिलाध्यक्ष शंकरलाल और जिला मंत्री गोपालकृष्ण उपाध्याय ने जिला कलक्टर से विभाग के पशुधन निरीक्षक, पशुधन प्रसार अधिकारी और वरिष्ठ पशुधन प्रसार अधिकारी पद के कार्मिकों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की थी. इसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान के 22 जून 2023 के परिपत्र का हवाला देते हुए कहा गया था कि पशु चिकित्सालयों में कार्यरत डॉक्टरों और कंपाउंडरों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने के निर्देश हैं. पशुओं में संक्रामक रोगों की रोकथाम, सघन टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और आपातकालीन उपचार जैसी सेवाएं नियमित रूप से जारी रखना जरूरी है. कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी से ये कार्य प्रभावित हो सकते हैं.



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