इनाम मिलना था.. 3 करोड़ की रिश्वत का लगा आरोप, बालाघाट की कमान संभालेंगे IAS आदित्य सिंह, जानें पूरी कहानी

इनाम मिलना था.. 3 करोड़ की रिश्वत का लगा आरोप, बालाघाट की कमान संभालेंगे IAS आदित्य सिंह, जानें पूरी कहानी


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Story of IAS officer Aditya Singh: बालाघाट कलेक्टर IAS मृणाल मीना का ट्रांसफर होने के बाद 2017 बैच के IAS कुमार सत्यम ने बालाघाट की कमान संभाली है. आदित्य सिंह इससे पहले करीब आठ महीने तक भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग में संचालक के पद पर सेवाएं दे रहे थे. आइये जानते हैं कौन हैं कुमार सत्यम?

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मध्य प्रदेश के बालाघाट में बीते तीन महीनों के भीतर तीसरे कलेक्टर ने कमान संभाली है. अगस्त के महीने में ही IAS मृणाल मीना का ट्रांसफर हुआ था. इसके बाद 2017 बैच के IAS कुमार सत्यम ने बालाघाट की कमान संभाली थी. महज 72 दिन नौकरी के बाद उनका ट्रांसफर हरदा कर दिया गया. लेकिन जैसे ही उनकी जॉइनिंग हुई, उसके कुछ दिन बाद ही बैगा समुदाय से आने वाले बच्चों की मौतों का सिलसिला तेज हो गया. इसके बाद से बालाघाट का माहौल गर्म रहा.

प्रशासन पर न सिर्फ लापरवाही के बल्कि मौतों के आंकड़ों को छिपाने का भी आरोप लगा. जब प्रशासन के रिकॉर्ड में आठ मौतों थी, तब क्षेत्रीय विधायक संजय उइके ने 19 मौतों का दावा किया. वक्त बीतता गया लेकिन बच्चों की मौतें नहीं रुकी. ऐसे में नेताओं के दौरे भी शुरू हुए. ऐसे में एसपी-कलेक्टर पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोप भी लगे. हालांकि, ये अब सस्पेंस है कि आखिर कुमार सत्यम के ट्रांसफर की असल वजह क्या है. अब उनकी जगह 2014 बैच के IAS आदित्य सिंह ने बालाघाट में कार्यभार संभाला है.

बालाघाट कलेक्टर सत्यम सिंह इससे पहले करीब आठ महीने तक भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग में संचालक के पद पर सेवाएं दे रहे थे. इस पोस्टिंग को लूप लाइन के तौर पर देखा गया. दरअसल, इससे पहले उन पर तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का भी आरोप लगा था. उस समय वह अशोकनगर में कलेक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे थे. अब आठ महीने लूप लाइन में रहने के बाद वह बालाघाट कलेक्टर के तौर पर मैदान पर वापसी हुई है.

बोले शासन की नीति के विरुद्ध काम होगा तो सख्त कार्रवाई होगी
बालाघाट कलेक्टर सत्यम सिंह ने मीडिया से परिचय संवाद कार्यक्रम में कहा कि नदी और खनिज मामले में उल्लंघन होगा, तो शासन के निर्देश के आधार पर कार्रवाई होगी. इसके अलावा बैगा बच्चों की मौतों के मामले में कहा कि आगे ऐसी कोई घटनाएं न हो इसके लिए मॉनिटरिंग तेज की जाएगी. साथ ही चावल घोटाले जैसे मामले अगर सामने आएंगे, तो उन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी.

जनसुनवाई को असरदार बनाने पर होगा जोर
बालाघाट कलेक्टर सत्यम सिंह ने कहा कि बालाघाट काफी बड़ा जिला है. ऐसे में यहां पर आदिवासी अंचल हो या दक्षिण बालाघाट न्याय की आस में सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर बालाघाट आते हैं. ऐसे में ग्रामीण की समस्या का त्वरित निराकरण हो इस पर ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने कहा अशोक नगर में सैकड़ों लोग आते थे. ऐसे में ग्रामीणों को निराशा न हो इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा. इसके अलावा शहर की बुनियादी समस्याओं को भी दुरुस्त करने की भी बात कही.

जिस दिन सम्मान मिलने वाला था उसी दिन लगा गंभीर आरोप
आदित्य सिंह जनवरी 2026 में उस समय चर्चा में आए थे, जब निर्वाचन कार्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए उनके सम्मान की घोषणा हुई थी. उसी दिन आदित्य सिंह पर कथित तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. मामला आनंदपुर ट्रस्ट की जमीन से जुड़ा था. इसकी कथित शिकायत के बाद तुरंत बाद सरकार ने उन्हें हटाकर भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग में संचालक (लूप लाइन) बनाकर भेज दिया था; हालांकि, ट्रस्ट ने बाद में इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था. अब इसी ‘8 महीने के प्रशासनिक वनवास’ के बाद, उन्हें बालाघाट कलेक्टर के तौर जिम्मेदारी मिली है.

जानिए कौन आदित्य सिंह
बालाघाट कलेक्टर आदित्य सिंह एमपी कैडर के 2014 बैच के आईएएस अफसर है. वह मूल रूप से रीवा के रहने वाले है. उनका जन्म आठ मार्च 1990 को हुआ था. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रीवा में पूरी की. इसके बाद वह 10वीं के बाद ही राजस्थान के कोटा चले गए. इसके बाद उन्होंने IIT रुड़की से पेपर टेक्नोलॉजी में बी. टेक की डिग्री हासिल की.



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