ऋषिकेश: ऋषिकेश का राम झूला आज शहर की पहचान बन चुका है. इसके आसपास का बाजार भी दिनभर लोगों की आवाजाही से भरा रहता है. लेकिन करीब 50 साल पहले यहां का नजारा आज से बिल्कुल अलग था. न इतनी भीड़ होती थी, न दुकानों की लंबी कतार और न ही बाजार तक पहुंचने के लिए आज जैसी पक्की और चौड़ी सड़कें थीं. पुराने लोग बताते हैं कि उस समय राम झूला के आसपास का इलाका काफी शांत और खुला हुआ था. कुछ ही दुकानें थीं, जहां स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले यात्रियों की जरूरत का सामान मिल जाता था.
स्थानीय निवासी राम नाथ ने लोकल 18 को बताया कि करीब 50 साल पहले राम झूला के आसपास का बाजार आज की तरह फैला हुआ नहीं था. दुकानें बहुत कम थीं और इलाके में रहने वाले लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे. बाहर से आने वाले लोग काफी दूर तक पैदल ही चलते थे, क्योंकि उस समय आज जैसी पक्की और चौड़ी सड़कें नहीं थीं. बाजार के आसपास का इलाका भी काफी खुला हुआ था.
गिनी-चुनी दुकानें थीं, लोग एक-दूसरे को जानते थे
राम नाथ बताते हैं कि लोग जरूरत का सामान खरीदते, मंदिर जाते और फिर आराम से वापस लौट जाते थे. कई जगह रास्ते कच्चे हुआ करते थे. आज राम झूला के आसपास जहां हर तरफ दुकानें और लोगों की आवाजाही दिखाई देती है, उस समय वहां ऐसा माहौल नहीं था. दुकानदारों और ग्राहकों के बीच भी सिर्फ सामान खरीदने-बेचने का रिश्ता नहीं था. बाहर से आने वाले कई लोग दुकानों पर बैठकर बातचीत भी किया करते थे. बाजार छोटा जरूर था, लेकिन उस समय भी उसकी अपनी अलग पहचान थी.
बाजार में नहीं थी ज्यादा भागदौड़
स्थानीय निवासी और दुकानदार रवि कुमार ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि करीब 50 साल पहले राम झूला के आसपास का माहौल काफी सुकून भरा रहता था. बाजार में कुछ ही दुकानें थीं. पूजा-पाठ का सामान, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा की जरूरत का सामान इन दुकानों पर मिल जाता था. बाहर से आने वाले यात्री भी स्थानीय दुकानों पर रुकते थे.
रवि कुमार के मुताबिक, उस समय आज जैसी भागदौड़ नहीं थी. लोग धीरे-धीरे चलते थे और बाजार में बैठकर बातचीत करने का भी समय होता था. राम झूला तक पहुंचना भी आज जितना आसान नहीं था. आसपास की सड़कें और रास्ते धीरे-धीरे विकसित हो रहे थे. कई जगह आने-जाने के लिए पैदल रास्तों का ही सहारा था.
कम गाड़ियां, कम शोर और शाम को अलग रौनक
उस दौर में गाड़ियों की आवाजाही भी आज के मुकाबले काफी कम थी. इसी वजह से बाजार में शोर कम रहता था और पूरा इलाका ज्यादा शांत महसूस होता था. शाम के समय भी यहां की रौनक अलग तरह की होती थी. दुकानें कम थीं, लेकिन लोगों की आवाजाही बनी रहती थी. आज राम झूला के आसपास बाजार काफी फैल चुका है और यहां दिनभर स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले लोग भी नजर आते हैं. करीब 50 साल पहले यही इलाका कम दुकानों, कच्चे रास्तों और शांत माहौल के लिए जाना जाता था.