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बरेली शहर की पहचान में अब मशहूर झुमका भी खास स्थान बना चुका है. फिल्म मेरा साया के गीत ‘झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में’ ने बरेली और झुमके को देशभर में एक अलग पहचान दी. यही वजह है कि बरेली के प्रवेश द्वार पर स्थापित विशाल झुमका अब शहर की पहचान और आकर्षण का प्रमुख प्रतीक बन गया है. वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक पहचान को नया कलेवर दिया गया है. जिससे बरेली आने वाले लोगों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है.
बरेली: बरेली शहर की पहचान में अब मशहूर झुमका भी खास स्थान बना चुका है. फिल्म मेरा साया के गीत ‘झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में’ ने बरेली और झुमके को देशभर में एक अलग पहचान दी. यही वजह है कि बरेली के प्रवेश द्वार पर स्थापित विशाल झुमका अब शहर की पहचान और आकर्षण का प्रमुख प्रतीक बन गया है. वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक पहचान को नया कलेवर दिया गया है. जिससे बरेली आने वाले लोगों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है.
बरेली-दिल्ली हाईवे स्थित झुमका तिराहे पर लगे पुराने झुमके को जनवरी 2026 में सुंदरीकरण और नवीनीकरण के लिए उतारा गया था. इसके बाद इसकी मरम्मत, पॉलिश और सजावट का काम कराया गया. करीब दो महीने की प्रक्रिया के बाद इसे नए स्वरूप में दोबारा स्थापित किया गया. नए रूप में झुमके की चमक और डिजाइन पहले से ज्यादा आकर्षक नजर आ रही है.
2.7 क्विंटल वजन वाला झुमका लगाया गया है
करीब 2.70 क्विंटल वजन वाले इस विशाल झुमके पर विशेष पॉलिश की गई है. इसकी नक्काशी और बनावट इसे दूर से ही आकर्षक बनाती है. झुमका तिराहे के आसपास भी सुंदरीकरण कराया गया है. सफाई, ग्रिल, दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग और अन्य सजावटी कार्यों ने पूरे क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ाई है. वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि बरेली का झुमका सिर्फ एक विशाल आभूषण नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और लोकप्रिय पहचान का हिस्सा बन चुका है. फिल्मी गीत ने झुमके को बरेली से जोड़ा और समय के साथ यही झुमका शहर की पहचान, पर्यटन और ब्रांडिंग का प्रतीक बन गया. झुमका तिराहे के नए स्वरूप में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी जोड़ा गया है. यहां भगवान शिव और नंदी की प्रतिमा के साथ क्षेत्र का सुंदरीकरण किया गया है. 20 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा भी यहां आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.