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Gaya News: गया के ANMMCH में शव की पहचान को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई. परिजनों को उनके स्वजन बिगन दास की जगह दूसरे व्यक्ति का शव सौंप दिया गया. वहीं बिगन दास के शव को लावारिस समझकर दाह संस्कार के लिए भेज दिया गया. इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और थाने में शिकायत दर्ज कराई.
गया के मेडिकल कॉलेज में लापरवाही.
गयाः बिहार के गया जिले में अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई. पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को उनके स्वजन की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का शव सौंप दिया गया. इधर, जिस शव को लावारिस समझा गया, उसका श्मशान घाट पर दाह संस्कार कर दिया गया. जब तक गलती का पता चला, तब तक शव का करीब 75 फीसदी दाह संस्कार हो चुका था. मामला अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (ANMMCH) का है.
घटना के बाद अस्पताल से लेकर श्मशान घाट तक हंगामा मच गया. मामले में मृतक के परिजनों ने मगध मेडिकल थाने में अस्पताल कर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत दी है. मृतक बिगन दास गुरारू थाना क्षेत्र के वर्मा गांव के रहने वाले थे. परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया था.
लावारिस शव समझकर कर दिया अंतिम संस्कार
शुक्रवार को ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान रात करीब आठ बजे उनकी मौत हो गई. अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को बताया कि शव का पोस्टमार्टम शनिवार को किया जाएगा. शनिवार सुबह शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया. आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद पहचान की सही प्रक्रिया पूरी किए बिना परिजनों को किसी दूसरे शव को सौंप दिया गया. बताया गया कि पोस्टमार्टम हाउस में अलग-अलग मामलों के करीब तीन शव रखे थे. इनमें रेलवे की ओर से मिला एक लावारिस शव भी शामिल था. इसी शव का सरकारी स्तर पर अंतिम संस्कार किया जाना था.
जांच के बाद होगी कार्रवाई
आरोप है कि अस्पताल के दो कर्मचारियों ने लावारिस शव की जगह सड़क हादसे में मारे गए बिगन दास के शव को श्मशान घाट पहुंचा दिया. वहां शव का करीब 75 फीसदी दाह संस्कार भी हो गया. बाद में अस्पताल प्रशासन और परिजनों को अपनी गलती का पता चला. एक अस्पताल कर्मी ने भी माना कि पोस्टमार्टम के बाद दो से तीन शव एक साथ रखे थे और सभी सफेद कपड़े में लिपटे थे. इसी दौरान पहचान में गलती हो गई. ANMMCH की प्राध्यापिका सह प्राचार्य डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद शव की सही पहचान करके ही परिजनों को सौंपने का नियम है. शव सौंपते समय एक जिम्मेदार कर्मचारी की मौजूदगी भी अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है. मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.