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Kota Aisi Wale Ganesh Ji Temple: कोटा के दादाबाड़ी में स्थित 100 साल पुराने ‘ऐसी वाले गणेश जी’ मंदिर में धोबड़े के पेड़ पर लाल पेन से चिट्ठी बांधकर मन्नत मांगने की अनोखी परंपरा है. भक्त सादे कागज पर अपनी इच्छा लिखकर धागे के साथ पेड़ पर बांधते हैं. मान्यताओं के अनुसार, यहां अर्जी लगाने से युवाओं को सरकारी नौकरी, डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक पदों पर सफलता मिलती है. साथ ही विवाह और व्यापार की अड़चनें दूर होती हैं. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में भोग लगाकर आभार व्यक्त करते हैं.
कोटा: राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा न केवल कोचिंग संस्थानों के लिए बल्कि अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारी परंपराओं के लिए भी पूरे देश में विशेष पहचान रखती है. कोटा शहर के प्रसिद्ध दादाबाड़ी क्षेत्र में स्थित लगभग 100 साल पुराना ‘सिद्धि विनायक मंदिर’, जिसे स्थानीय लोग और श्रद्धालु प्यार से ‘ऐसी वाले गणेश जी’ के नाम से जानते हैं, लाखों भक्तों की अगाध आस्था और विश्वास का एक बड़ा केंद्र है. इस मंदिर में वर्षों से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए एक बेहद अनोखी और प्राचीन परंपरा निभाई जा रही है, जो इसे अन्य गणेश मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाती है.
इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी और खास विशेषता परिसर में स्थित एक पवित्र धोबड़े का पेड़ है. यहां के स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की ऐसी अटूट मान्यता है कि इस पवित्र पेड़ में ही साक्षात विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश विराजमान हैं. इस धोबड़े के पेड़ को गणपति महाराज का प्रत्यक्ष सिंहासन माना जाता है. मंदिर के पुजारी कमलकांत गौतम बताते हैं कि इस पेड़ के प्रति लोगों की बेहद गहरी श्रद्धा जुड़ी हुई है. शहरभर से आने वाले भक्त अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या, करियर की चिंता और जीवन की विभिन्न इच्छाओं को लेकर इस पवित्र वृक्ष के सामने पहुंचते हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
लाल पेन और लच्छे से चिट्ठी बांधने की अनोखी प्रक्रिया
इस मंदिर में मन्नत मांगने और भगवान के समक्ष अपनी अर्जी लगाने की प्रक्रिया बेहद सरल, पवित्र और अनूठी है. यहां आने वाले भक्त सबसे पहले मंदिर परिसर में बैठकर एक सादे कागज पर लाल पेन की मदद से अपनी मनोकामना लिखते हैं. इसके बाद भगवान श्री गणेश का ध्यान करते हुए और उनसे सच्चे मन से प्रार्थना करते हुए, एक लच्छा (पूजा का पवित्र धागा या मौली) लेते हैं और उस चिट्ठी को धोबड़े के पेड़ के पीछे पूरी श्रद्धा के साथ बांध देते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस तरह धागे से बंधी चिट्ठी के माध्यम से गणेश जी अपने भक्तों की सच्ची भावनाओं और प्रार्थनाओं को तुरंत स्वीकार करते हैं और उनके सभी रुके हुए कार्य सिद्ध कर देते हैं.
विद्यार्थियों की सफलता, सरकारी नौकरी और चमत्कारिक कहानियां
शिक्षा नगरी कोटा होने के कारण इस मंदिर में सबसे अधिक संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी और युवा दर्शन करने पहुंचते हैं. इस मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारिक बातें और सफलता की कहानियां सामने आई हैं. कई लोगों का दृढ़ विश्वास है कि यहां धोबड़े के पेड़ पर चिट्ठी बांधने के बाद उनकी सालों पुरानी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं. कई युवा परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी नौकरियों में चयनित हुए हैं, तो कोई डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, अध्यापक और बड़े-बड़े प्रशासनिक पदों पर नियुक्त हुआ है. इसके अतिरिक्त शादी-विवाह से जुड़ी अड़चनें दूर होने, व्यापार में वृद्धि होने, बच्चों की पढ़ाई में मन लगने और संतान प्राप्ति जैसी अनेक मनोकामनाएं भी यहां पूरी होती हैं.
मन्नत पूरी होने पर भोग और रसोई की परंपरा
जब श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों की मांगी गई मन्नतें पूरी हो जाती हैं, तो वे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में दोबारा भगवान का धन्यवाद करने आते हैं. मन्नत पूरी होने की अपार खुशी में कई भक्त मंदिर में रसोई करवाकर भोग लगाते हैं और प्रसाद वितरण करते हैं, तो कई लोग दान-दक्षिणा देकर अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हैं. कोटा का यह प्रसिद्ध सिद्धि विनायक मंदिर आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद, विश्वास और सफलता का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है.