Last Updated:
Crude Oil Price : अ सप्लाई चेन में अचानक आए व्यवधान और प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमत में आग दी है. आने वाले दिनों में तेल की किल्लत बढ़ने की आशंका के चलते खरीदार आक्रामक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं.
क्रूड का रेट लगातार चढ रहा है.
नई दिल्ली. कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिला है. शनिवार को एक बार तो ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार $110 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया. सप्लाई में तत्काल राहत मिलने की उम्मीदें धूमिल होने से तेल का रेट चढ़ा है. हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार सऊदी पर हमले करने और रूस और यूक्रेन द्वारा भी लगातार एक-दूसरे के ऊर्जा संयंत्रों और रिफाइनरियों को निशाना बनाने से अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है.
आज 17, अगस्त को सुबह 6:35 बजे ब्रेंट क्रूड 3.77 फीसदी की तेजी के साथ 109.69 डॉलर प्रति बैरल कारोबार रहा था. अमेरिकी क्रूड का भाव भी करीब चार फीसदी चढ़कर 101.84 डॉलर बैरल हो गया. अंतराष्ट्ररीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के महंगा होने का खतरा मंडराने लगा है. अगर कच्चे तेल के दाम यूं ही बढ़ते रहे तो सरकारी तेल विपणन कंपनियों का घाटा बढ़ेगा और उनके सामने तेल का रेट बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं होगा.
क्यों उछला कच्चा तेल
ईरान समर्थित हूती विद्रोही लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों और रिफाइनरियों पर जवाबी हमले कर रहे हैं, जिससे उत्पादन और लॉजिस्टिक्स सीधे तौर पर बाधित हुआ है. सप्लाई संकट को और गहरा करने में अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम की भी बड़ी भूमिका रही है. शुक्रवार को अमेरिकी सांसदों ने एक ऐसा विधेयक पेश किया, जिसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मॉस्को के बीच हुए समझौते को रोकना है. इस समझौते के तहत रूस को कई सौ मिलियन बैरल डीजल बाजार में जारी करना था. अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इस सौदे से मिलने वाले धन का इस्तेमाल रूस अपनी युद्ध गतिविधियों के लिए कर सकता है.
रियाजान रिफाइनरी पर हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भले ही यह दोहराया हो कि मॉस्को डीजल आपूर्ति की अपनी प्रतिबद्धता निभाएगा, लेकिन जमीनी हालात अलग कहानी बयां कर रहे हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, हाल ही में रूस की प्रमुख रियाजान तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ, जिसके बाद वहां परिचालन पूरी तरह ठप करना पड़ा. काला सागर में बढ़ते तनाव और लगातार होते हमलों ने यह आशंका पुख्ता कर दी है कि रूस के साथ डीजल आपूर्ति समझौता शायद ही धरातल पर उतर पाए.