Agriculture: न सफेद, न हरी… सिरोही में उग रही ऑर्गेनिक बैंगनी-पीली गोभी, बाजार में कीमत सुन चौंक जाएंगे

Agriculture: न सफेद, न हरी… सिरोही में उग रही ऑर्गेनिक बैंगनी-पीली गोभी, बाजार में कीमत सुन चौंक जाएंगे


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गोभी का ऐसा रंग पहले नहीं देखा होगा, सिरोही में जैविक तरीके से हो रही खास खेती

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Sirohi Colorful Broccoli and Cauliflower Cultivation: सिरोही जिले में किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर रंगीन सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. आमथला गांव के तपोवन में हरी ब्रोकली के साथ बैंगनी और पीली फूलगोभी की खेती की जा रही है. अगस्त-सितंबर में बुवाई के बाद दिसंबर-जनवरी में फसल तैयार हो जाती है. करीब ढाई से तीन महीने के फसल चक्र में अच्छी उपज मिलने की संभावना रहती है. रंगीन गोभी की खासियत यह है कि महानगरों में इसकी मांग के चलते बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है. हालांकि मावा जैसे रस चूसने वाले कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे बचाव के लिए तपोवन में नीम की खली और छाछ से जैविक घोल तैयार कर छिड़काव किया जाता है. यह प्रयोग किसानों के लिए कमाई के नए विकल्प के तौर पर उभर रहा है.

सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिला के आमथला गांव स्थित तपोवन में परंपरागत खेती से हटकर बैंगनी और पीली फूलगोभी जैसी नई किस्मों की खेती अन्य किसानों के लिए भी आकर्षण के केंद्र बना हुआ है. जैविक तरीकों से उगाई जा रही इन रंगीन सब्जियों से किसानों की आमदनी भी बेहतर हो सकती है. पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और उचित दाम न मिलने की चुनौती के बीच सिरोही जिले के किसानों ने सब्जियों की नई किस्मों की ओर कदम बढ़ाया है. ब्रह्माकुमारी संस्थान के तपोवन क्षेत्र में हरी ब्रॉकली के साथ अब बैंगनी और पीली फूलगोभी की खेती की जा रही है.

यह नया प्रयोग किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोल रहा है. तपोवन में पिछले करीब 3 वर्ष से कलरफुल गोभी की खेती हो रही है. ये गोभी की किस्म एक खास और पोषक तत्वों से भरपूर उन्नत किस्म की सब्जी है. सामान्य सफेद गोभी की तुलना में यह सेहत के लिए अधिक फायदेमंद मानी जाती है. तपोवन के बीके शरत भाई के अनुसार सिरोही में हरी ब्रॉकली और सफेद फूलगोभी की खेती पहले से होती थी, लेकिन बैंगनी और पीली ब्रॉकली का उत्पादन एक नया प्रयास है.

बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किसान बढ़ा सकते हैं आय

उन्होंने बताया कि बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. इस तकनीक को सीखने के लिए दूर-दराज से किसान यहां आ रहे हैं और खेती में जैविक तरीकों पर खास जोर दिया जा रहा है. शरद भाई ने बताया कि ब्रॉकली की बुवाई अगस्त और सितंबर के महीनों में की जाती है और दिसंबर-जनवरी में फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. इस फसल का चक्र करीब ढाई से तीन महीने का होता है. सीजन में करीब ढाई से तीन टन गोभी की उपज होती है. पहली तुड़ाई के बाद पौधों के नए अंकुरों से दोबारा फसल के बीज के रूप में पौधे लगाए जाते हैं.

रंगीन ब्रॉकली और फूलगोभी को बाजार में मिलती है अच्छी कीमत

रंगीन ब्रॉकली और फूलगोभी की खेती का एक फायदा इसके अच्छे दाम है. सामने गोभी के मुकाबले इसके ज्यादा दाम मिलते है. मेट्रो सिटी में इन किस्मों की अधिक मांग होने के कारण सामान्य सफेद फूलगोभी की तुलना में इनके दो से तीन गुना तक दाम मिल जाते है. वास्तविक कमाई फसल की क्वालिटी, उत्पादन और बाजार की स्थिति पर निर्भर करती है. फूलगोभी की फसल में मावा जैसे रस चूसने वाले कीटों से नुकसान का खतरा रहता है, जिससे पौधों की बढ़वार और फूलों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है. वहीं मच्छरों से बचाव करना भी पौधों की ग्रोथ को बनाए रखने के लिए जरूरी है. इसके लिए जैविक तरीके से तपोवन में ही कीटनाशक तैयार किया जाता है. जिसमें नीम की खली, छाछ आदि के मिश्रण से तैयार तरल का छिड़काव किया जाता है.



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