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Bhallu Singh Gurjar Inspiring Story: करौली के भल्लू सिंह गुर्जर खुद फौजी नहीं बन सके, लेकिन अब उनकी डिफेंस एकेडमी से निकले युवा देशसेवा के लिए सेना में पहुंच रहे हैं. बचपन से सेना में जाने का सपना देखने वाले भल्लू सिंह ने एनसीसी ज्वाइन करने के बाद सेना की तीन भर्तियों में हिस्सा लिया. उन्होंने हर बार फिजिकल टेस्ट पास किया, लेकिन आंखों में कलर विजन की कमी के कारण मेडिकल टेस्ट में चयन नहीं हो सका. उम्र निकलने के बाद उन्होंने करीब छह साल पहले युवाओं को सेना भर्ती की तैयारी कराने का फैसला किया. चेतन डिफेंस एकेडमी में फिजिकल और लिखित परीक्षा की तैयारी कराई जाती है. भल्लू सिंह के अनुसार अब तक 200 से ज्यादा युवा उनकी एकेडमी से प्रशिक्षण लेकर भारतीय सेना में भर्ती हो चुके हैं. वे युवाओं को अनुशासन, निरंतर मेहनत और लिखित परीक्षा की तैयारी पर जोर देने की सलाह देते हैं.
कहते हैं कि असफलता किसी सपने का अंत नहीं होती, बल्कि कई बार वही असफलता इंसान को ऐसी राह दिखा देती है, जहां वह खुद तो मुकाम हासिल नहीं कर पाता, लेकिन दूसरों के सपनों को उड़ान देने वाला बन जाता है. करौली के युवा भल्लू सिंह गुर्जर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
बचपन से उनका सपना था कि वर्दी पहनकर देश की सेवा करनी है. सेना में भर्ती होने के लिए दिन-रात मेहनत की, एनसीसी ज्वाइन की और सी सर्टिफिकेट तक हासिल किया. सेना की तीन भर्तियों में फिजिकल टेस्ट भी पास किया, लेकिन हर बार मेडिकल में आंखों की कमी ने उनके फौजी बनने के सपने को रोक दिया. आखिरकार भर्ती की उम्र भी निकल गई और भल्लू सिंह खुद सेना में भर्ती नहीं हो सके. लेकिन उन्होंने अपनी असफलता को जिंदगी की हार नहीं माना.
जिस रास्ते पर उनकी आंखों की कमी ने उन्हें रोक दिया था, उसी रास्ते पर उन्होंने दूसरे युवाओं को आगे बढ़ाने का फैसला किया. करीब 6 साल पहले शुरू की गई उनकी डिफेंस एकेडमी से अब तक 100 से ज्यादा युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा के लिए जा चुके हैं. साथ ही सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षित करने का सिलसिला जारी है और उनकी मेहनत रंग भी ला रहा है.
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भल्लू सिंह बताते हैं कि बचपन से ही उनके मन में सेना में भर्ती होने का सपना था. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने वर्ष 2014 में एनसीसी ज्वाइन की. मेहनत के दम पर उन्हें एनसीसी में सीनियर अंडर ऑफिसर का पद भी मिला. इसके बाद वर्ष 2015 से उन्होंने भारतीय सेना की भर्तियों में शामिल होना शुरू किया. उन्होंने सेना की तीन भर्तियों में हिस्सा लिया. हर बार उन्होंने फिजिकल टेस्ट में सफलता हासिल की, लेकिन मेडिकल टेस्ट में उनकी आंखों में कलर विजन की समस्या सामने आ गई.
भल्लू सिंह के मुताबिक सेना की मेडिकल प्रक्रिया में आंखों का कलर विजन टेस्ट भी होता है. इसमें अलग-अलग रंगों के बीच छिपी हुई आकृतियां और संख्याएं पहचाननी होती है. आंखों में कलर विजन की कमी के कारण वह इस टेस्ट को पास नहीं कर पाए और तीनों बार मेडिकल में बाहर हो गए. NCC का सी सर्टिफिकेट होने और फिजिकल टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद हर बार मेडिकल में असफलता हाथ लगी. धीरे-धीरे सेना में भर्ती होने की निर्धारित उम्र भी निकल गई और उनका खुद फौजी बनने का सपना अधूरा रह गया.
लगातार असफलताओं के बावजूद भल्लू सिंह ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी असफलता को ही अपनी ताकत बनाया और सोचा कि जिस परेशानी से उन्हें गुजरना पड़ा, दूसरे युवाओं को उसका सामना न करना पड़े. इसी सोच के साथ उन्होंने करौली में डिफेंस एकेडमी शुरू करने का फैसला किया. कोरोना काल से पहले शुरू हुई चेतन डिफेंस एकेडमी में उन्होंने युवाओं को सेना भर्ती के लिए फिजिकल और लिखित परीक्षा की तैयारी करवाना शुरू किया.
भल्लू सिंह के मुताबिक पिछले 6 वर्षों में उनकी एकेडमी से प्रशिक्षण लेने वाले 200 से ज्यादा युवा भारतीय सेना में भर्ती हों चुके हैं. उनके लिए यह संख्या महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस सपने की सफलता है जिसे वह खुद पूरा नहीं कर सके.
सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए भल्लू सिंह का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है. इसके लिए निरंतर तैयारी, अनुशासन और मेहनत जरूरी है. उनका कहना है कि युवाओं को रोजाना फिजिकल के साथ-साथ लिखित परीक्षा की तैयारी भी करनी चाहिए. दौड़, शारीरिक व्यायाम और अन्य जरूरी टेस्ट की तैयारी के साथ पढ़ाई पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है.