जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां पार्षदों के वोट से मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों की तस्वीर साफ होगी. मतदान से ठीक पहले कई निकायों में पार्षदों की बाड़ेबंदी, उनके अचानक संपर्क से बाहर होने, परिवारों को परेशान करने, धमकी देने और दबाव बनाने के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. कांग्रेस ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े 46 मामलों की शिकायतें जिला प्रशासन के सामने रखने का दावा किया है. पार्टी का आरोप है कि उसके पार्षदों को दूसरे पक्ष के प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान के लिए दबाव में लिया जा रहा है. कुछ मामलों में पुलिस तक शिकायत पहुंची है, जबकि कुछ जगह पार्षदों के परिजनों ने भी विरोध दर्ज कराया है.
संगरिया में पंजाब तक पहुंचा विवाद
सूरतगढ़ में पार्षद के लापता होने की चर्चा
जालोर में धमकी और प्रलोभन के आरोप
जालोर में जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पारासर ने कांग्रेस बोर्ड बनने का दावा किया है. उन्होंने कांग्रेस के 19 पार्षदों के एकजुट होने और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया. कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके पार्षदों और उनके परिवारों पर दूसरे पक्ष के प्रत्याशी के समर्थन में मतदान करने का दबाव बनाया जा रहा है. घरों के बाहर रेकी करने, फोन पर धमकी देने और पैसों का प्रलोभन देने जैसी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है. कांग्रेस ने इन मामलों की शिकायत जिला प्रशासन के सामने रखने की बात कही है. जालोर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी भी दी गई है. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
श्रीगंगानगर में गैंगस्टर के नाम से धमकी का आरोप
श्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति चुनाव में भी विवाद सामने आया है. निर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने आरोप लगाया कि उन्हें गैंगस्टर के नाम से फोन कर निर्दलीय उम्मीदवार संजय मुंदड़ा के पक्ष में मतदान करने के लिए धमकाया गया. हेमराज चौधरी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है. शिकायत में संजय मुंदड़ा के अलावा व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के नाम भी सामने आए हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है और कॉल तथा धमकी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है. श्रीगंगानगर में भाजपा के अजय दावड़ा और भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार संजय मुंदड़ा के बीच मुकाबला बताया गया है. ऐसे में धमकी के आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है.
अमलगढ़ क्षेत्र में कांग्रेस समर्थित पार्षदों को परेशान का आरोप
मतदान से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
निकाय चुनाव में मेयर, सभापति और चेयरमैन के पदों के लिए पार्षदों का समर्थन निर्णायक होता है. यही वजह है कि मतदान से पहले दोनों प्रमुख दलों की ओर से पार्षदों को एकजुट रखने के प्रयास तेज हुए हैं. बाड़ेबंदी इसी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन जब पार्षदों के संपर्क से बाहर होने या परिवारों पर दबाव के आरोप सामने आते हैं तो विवाद बढ़ जाता है. अब मतदान से पहले सबसे बड़ा सवाल पार्षदों की सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से मतदान करने का है. प्रशासन और पुलिस के सामने भी इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है. मतदान के बाद ही यह साफ होगा कि बाड़ेबंदी, आरोपों और राजनीतिक खींचतान के बीच किस निकाय में बोर्ड का गणित किस तरफ जाता है.