‘एंजेल पायल’ नाम की महिला ने ब‍िछाया था जाल, फंसाए कर्मचारी, विशाखापट्टनम नौसेना जासूसी मामले में बड़ा खुलासा

‘एंजेल पायल’ नाम की महिला ने ब‍िछाया था जाल, फंसाए कर्मचारी, विशाखापट्टनम नौसेना जासूसी मामले में बड़ा खुलासा


आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम नौसेना डॉकयार्ड से जुड़ी कथित जासूसी साजिश मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. आज करीब 16 साल पहले 2010 में इंटरनेट पर वायरल हुए ‘एंजेल प्रिया’ कैटफिशिंग केस की तरह ही यहां भी ‘एंजेल पायल’ नाम की एक महिला ने जाल बिछाया था. उसने फेसबुक अकाउंट बनाकर नौसेना में काम करने वाले दो कर्मचारियों को एक-दूसरे से मिलवाया और भारत की संवेदनशील रक्षा जानकारी पाकिस्तान से जुड़े ऑपरेटिव्स तक पहुंचाई.

इस मामले में आंध्र प्रदेश काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) सेल ने गुरुवार को दो और लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके नाम बोंगु रवि (30) और कदरी श्रीनिवास (31) हैं. दोनों ही टीडी इंजीनियरिंग कंपनी के कर्मचारी हैं और विशाखापट्टनम नौसेना डॉकयार्ड से जुड़े रहे हैं. अभी तक इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या चार हो गई है.

कैसे हुआ खेल?

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक जांचकर्ताओं ने बताया, ‘एंजेल पायल’ नाम की एक अज्ञात महिला ने फेसबुक पर अकाउंट बनाकर जाल दोनों कर्मचारियों को एक-दूसरे से परिचित कराया था. उसने नौसेना डॉकयार्ड से जुड़े रहे इन दोनों युवकों के सामने दावा किया कि वह दुबई स्थित एक शिपिंग कंपनी में काम करती है, जो जहाजों और क्रू के लिए विश्वव्यापी लॉजिस्टिक्स संभालती है. उसने रवि और श्रीनिवास को भरोसे में ले लिया. दरअसल दोनों ही एक ही कंपनी में काम करते थे, लेकिन अलग-अलग जगहों पर तैनात थे. इसलिए वे सिर्फ फेसबुक मैसेंजर के जरिए संपर्क में रहते थे.

जांच में सामने आया कि श्रीनिवास ने कथित तौर पर रवि को पैसे के लालच में नौसेना डॉकयार्ड में मौजूद जहाजों और पनडुब्बियों की संख्या जैसी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए उकसाया. दोनों ने महिला के बड़े पैसे देने के वादे पर विश्वास कर लिया और डॉकयार्ड की जानकारी लीक कर दी. भारतीय सेना का यह इलाका बेहद संवेदनशील और प्रतिबंधित रक्षा क्षेत्र है. लिहाजा महिला को एफआईआर में ए-2 के रूप में नामजद किया गया है.

श्रीनिवास को दुबई से सऊदी अरब से बुलाया
श्रीनिवास अक्टूबर के पहले सप्ताह में सऊदी अरब चला गया था. पुलिस ने उसे वापस लाने की तमाम कोशिशें की. आखिरकार दबाव में आकर वह 11 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुंचा. विशाखापट्टनम सिटी पुलिस और सीआई सेल के अधिकारी हवाई अड्डे पर उसका इंतजार कर रहे थे. उन्हें हिरासत में लेकर विशाखापट्टनम ले जाया गया.

6 अक्टूबर को सीआई सेल ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था. एजेंसी ने पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पीआईओ) को संवेदनशील रक्षा जानकारी पहुंचाने वाले मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए इन्हें पकड़ा था. हालांकि अभी भी मॉड्यूल में कम से कम 18 संदिग्ध हैं, जिनमें 13 नौसेना से जुड़े बताए जा रहे हैं.

ऑपरेशन फायरवॉल 2026 में बनीं 12 टीमें
इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ नाम दिया गया है. इसे 1 अक्टूबर को शुरू किया गया. 12 टीमें आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात की गईं.

पाकिस्तानी महिलाएं दे रहीं अंजाम
जांचकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर नौसेना डॉकयार्ड से जुड़े कर्मियों से दोस्ती करती हैं. उन्हें पैसे का लालच दिया जाता है और कुछ मामलों में ब्लैकमेल भी किया जाता है.

कब सामने आया मामला
इस मामले में पहली एफआईआर 2 सितंबर को विजयवाड़ा के काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी. दूसरी एफआईआर 12 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के मल्कापुरम पुलिस स्टेशन में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत दर्ज की गई. उसी दिन रवि, श्रीनिवास और अज्ञात महिला के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई.

इससे पहले गिरफ्तार किए गए प्रदीप मुखर्जी ने कथित तौर पर एक पीआईओ के लिए व्हाट्सऐप अकाउंट एक्टिवेट करने के लिए ओटीपी साझा किया और संवेदनशील जानकारी दी थी. दूसरा आरोपी अन्नाम साई वरप्रसाद नौसेना अधिकारियों को गाड़ी चलाने वाला कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर था. उसने भी पैसे के बदले जानकारी साझा की थी. दोनों को विजयवाड़ा अदालत ने 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.



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