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जौनपुर के ऐतिहासिक शाही पुल के ठीक बगल में कभी तिल्ली के तेल और चमेली के तेल की दुकानों की खूब धूम हुआ करती थी. यहां तैयार होने वाले तेल की मांग दूर-दूर तक थी. लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि कभी मशहूर रहे इस कारोबार की रौनक धीरे-धीरे कम होती जा रही है. शाही पुल के आसपास तेल की दुकानों की पहचान केवल कारोबार तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जौनपुर की पुरानी परंपरा का हिस्सा भी थीं. लोग यहां शुद्ध तिल्ली का तेल और खुशबूदार चमेली का तेल खरीदने आते थे. समय बदला तो बाजार में पैकिंग वाले तेल और बड़े ब्रांडों की भरमार हो गई. इसका असर पुश्तैनी दुकानों पर साफ दिखाई देने लगा है.
जौनपुर: समय के साथ लोगों की पसंद बदल रही है. बाजार में नए-नए ब्रांड आ रहे हैं और लोग उन्हीं की ओर आकर्षित हो रहे हैं. इसका असर अब उन पारंपरिक कारोबारों पर भी पड़ रहा है, जिनकी कभी देश-दुनिया में अलग पहचान हुआ करती थी. जौनपुर के ऐतिहासिक शाही पुल के ठीक बगल में कभी तिल्ली के तेल और चमेली के तेल की दुकानों की खूब धूम हुआ करती थी. यहां तैयार होने वाले तेल की मांग दूर-दूर तक थी. लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि कभी मशहूर रहे इस कारोबार की रौनक धीरे-धीरे कम होती जा रही है.
शाही पुल के आसपास तेल की दुकानों की पहचान केवल कारोबार तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह जौनपुर की पुरानी परंपरा का हिस्सा भी थीं. लोग यहां शुद्ध तिल्ली का तेल और खुशबूदार चमेली का तेल खरीदने आते थे. समय बदला तो बाजार में पैकिंग वाले तेल और बड़े ब्रांडों की भरमार हो गई. इसका असर पुश्तैनी दुकानों पर साफ दिखाई देने लगा है.
चौथी पीढ़ी से जैद इस कारोबार से जुड़े
इस पारंपरिक कारोबार से जुड़े चौथी पीढ़ी के जैद अली बताते हैं कि पहले तिल्ली और चमेली के तेल की काफी मांग हुआ करती थी. लोग स्थानीय दुकानों पर भरोसा करते थे और पारंपरिक तरीके से तैयार तेल खरीदना पसंद करते थे. अब लोगों की पसंद बदल रही है. वे ब्रांड और आकर्षक पैकिंग देखकर सामान खरीदने लगे हैं. ऐसे में वर्षों से चले आ रहे पारंपरिक कारोबार को आगे बढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है.
जैद अली ने बताया कि पारंपरिक चीजों को भूलने का असर केवल दुकानदारों पर नहीं पड़ रहा, बल्कि इससे पुरानी विरासत भी धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रही है. जिस कारोबार को उनके पूर्वजों ने मेहनत से खड़ा किया था, उसे बचाए रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है.
ऐसे तैयार करते हैं तिल का तेल
तिल्ली का तेल बनाने के लिए सबसे पहले तिल को साफ किया जाता है. इसके बाद उसे पारंपरिक तेल निकालने वाली मशीन या घानी में डालकर धीरे-धीरे पेरा जाता है. इस प्रक्रिया में तिल से तेल निकलता है, जिसे छानकर अलग किया जाता है. पारंपरिक तरीके से तेल निकालने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं. चमेली के तेल को तैयार करने की प्रक्रिया अलग होती है, जिसमें फूलों की खुशबू को तेल में उतारने के लिए विशेष विधियों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसकी वास्तविक विधि इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और निर्माण के तरीके पर निर्भर करती है.
जैद अली का कहना है कि आज बाजार में बड़े ब्रांडों का प्रभाव बढ़ गया है. लोग अक्सर उन्हीं उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी पैकिंग आकर्षक होती है और जिनका प्रचार अधिक किया जाता है. ऐसे में पारंपरिक दुकानों को अपनी जगह बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. जौनपुर के शाही पुल के पास कभी गुलजार रहने वाली तेल की दुकान अब बदलते समय की कहानी बयां कर रही हैं. जरूरत इस बात की है कि स्थानीय उत्पादों की पहचान, उनकी गुणवत्ता और पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी जौनपुर के इस पुराने कारोबार से परिचित रह सकें.