Ratna Singh CJP, CJP protest: लखनऊ में पढ़ाई, फिर बनीं वकील…कौन हैं CJP की रत्ना सिंह, जिन्हें साथ लेकर सफाई देने उतरे दीपके?

Ratna Singh CJP, CJP protest: लखनऊ में पढ़ाई, फिर बनीं वकील…कौन हैं CJP की रत्ना सिंह, जिन्हें साथ लेकर सफाई देने उतरे दीपके?


Who is Ratna Singh CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके गुरुवार देर रात जब प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे तो उनके साथ एक महिला चेहरा भी मौजूद था. यह थीं सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर विवाद बढ़ने के बाद दीपके ने रत्ना सिंह के साथ सामने आकर संगठन का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि उनकी मांग सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त को बदलने की है. इस घटनाक्रम के बाद रत्ना सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. आखिर लखनऊ में स्कूल की पढ़ाई करने वाली रत्ना सिंह कौन हैं? उन्होंने कहां से कानून की पढ़ाई की और पत्रकारिता से वकालत तक कैसे पहुंचीं? आइए जानते हैं उनका अब तक का सफर.

विवाद बढ़ा तो रत्ना सिंह के साथ सामने आए दीपके

दरअसल गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में सीजेपी और अन्य संगठनों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी. इसमें वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन को लेकर बयान दिया. उन्होंने कहा कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और यह उसी की लड़ाई है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. भाजपा ने इस मुद्दे पर सीजेपी को घेरना शुरू कर दिया.मामला बढ़ता देख सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देर रात एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस बार उनके साथ संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह मौजूद थीं. दीपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी का उद्देश्य सरकार बदलना नहीं है. उनकी मांग केवल मुख्य चुनाव आयुक्त को बदलने की है.इस पूरे घटनाक्रम में रत्ना सिंह की मौजूदगी ने भी ध्यान खींचा. वह सीजेपी की उन प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं जो संगठन के कानूनी मामलों को संभालने के साथ सार्वजनिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती हैं.

कौन हैं रत्ना सिंह, लखनऊ से क्या है नाता?

रत्ना सिंह पेशे से वकील हैं और फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. उनका शैक्षणिक संबंध उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से रहा है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS)एल्डिको से की थी.उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रत्ना सिंह ने साल 2002 से 2013 के बीच इसी स्कूल से पढ़ाई की.स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद रत्ना सिंह ने कानून के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. आगे चलकर उन्होंने पत्रकारिता में भी काम किया और फिर वकालत के पेशे से जुड़ गईं.

हासिल की कानून की डिग्री

लखनऊ से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रत्ना सिंह ने एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. यहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की और साल 2020 में अपनी लॉ की डिग्री पूरी की.कानून की पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उनका जुड़ाव कानूनी मामलों तथा पत्रकारिता से भी रहा. उन्होंने अदालतों से जुड़ी खबरों और कानूनी विषयों पर काम किया. इसी अनुभव के साथ उन्होंने आगे वकालत के क्षेत्र में अपना करियर बढ़ाया.

वकील बनने से पहले पत्रकारिता में भी किया काम

रत्ना सिंह के करियर की एक खास बात यह है कि वह वकालत के साथ पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं. उन्होंने लीगल जर्नलिस्ट के तौर पर काम किया है.वह कई मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ी रही हैं. इस दौरान उन्होंने अदालतों में चलने वाले मामलों, कानूनी फैसलों और कानून से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रिपोर्टिंग की.पत्रकारिता के इस अनुभव के बाद वह वकालत में सक्रिय हुईं. फिलहाल वह दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत करती हैं. इसके साथ ही सीजेपी के कानूनी मामलों में भी उनकी अहम भूमिका है.

अभिजीत दीपके से क्या है रत्ना सिंह का कनेक्शन?

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और रत्ना सिंह का संबंध संगठन के कामकाज से जुड़ा है. रत्ना सिंह सीजेपी की कोर टीम का हिस्सा हैं और दीपके की प्रमुख सहयोगियों में गिनी जाती हैं.सीजेपी के गठन के बाद से ही वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रही हैं. खासकर छात्र आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और कानूनी विवादों से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका रही है.दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान भी रत्ना सिंह सक्रिय नजर आई थीं. मीडिया से बातचीत, आंदोलन से जुड़े कानूनी मुद्दों और संगठन की रणनीति में उनकी भागीदारी रही है.सीजेपी का कहना रहा है कि उसका संचालन किसी एक व्यक्ति के बजाय सामूहिक नेतृत्व के जरिए होता है. इस टीम में अभिजीत दीपके के अलावा सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह जैसे नाम शामिल हैं.

सीजेपी में क्या जिम्मेदारी संभाल रही हैं रत्ना सिंह?

रत्ना सिंह फिलहाल सीजेपी की लीगल हेड हैं. संगठन से जुड़े कानूनी मामलों को देखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है.छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और कानूनी अधिकारों से जुड़े सवाल उठते रहे हैं. ऐसे मामलों में संगठन की कानूनी रणनीति तैयार करने और जरूरी कानूनी कदम उठाने में रत्ना सिंह की भूमिका रहती है.इसके अलावा वह सीजेपी की सार्वजनिक गतिविधियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी नजर आती हैं. गुरुवार देर रात दीपके के साथ उनकी मौजूदगी इसी सक्रिय भूमिका का एक उदाहरण है.

10 अक्टूबर को पुलिस हिरासत से आई थीं चर्चा में

यह पहली बार नहीं है जब रत्ना सिंह किसी विवाद या आंदोलन के कारण चर्चा में आई हैं. इससे पहले 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था.इस कार्रवाई को लेकर सीजेपी ने सवाल उठाए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रत्ना सिंह ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था हालांकि उस समय अदालत ने उनकी अर्जी जरूरी कानूनी शर्तें पूरी नहीं होने के आधार पर स्वीकार नहीं की थी. इस घटनाक्रम के बाद रत्ना सिंह की कानूनी लड़ाई और संगठन में उनकी भूमिका चर्चा में रही.

जान से मारने की धमकी मिलने का भी दावा

रत्ना सिंह जुलाई 2026 में भी सुर्खियों में आई थीं. उस समय उन्होंने जान से मारने की धमकियां मिलने की बात कही थी.30 जुलाई 2026 के आसपास रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए धमकियां मिलने का दावा किया था. यह मामला उस समय सामने आया था जब सीजेपी नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों को लेकर सक्रिय थी हालांकि धमकियां किसने दी थीं और उनके पीछे क्या वजह थी इसकी जानकारी से नहीं है.



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