सोने-चांदी का दाम आज 16 अक्टूबर को फिर चढ़ गया है. सोने का रेट MCX पर सुबह 882 रुपये उछलकर 148371 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी 2100 रुपये चढ़कर 212760 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है. चांदी की कीमतों पर फिलहाल दबाव बना हुआ है. पिछले कारोबारी सेशन में MCX पर चांदी का वायदा भाव गिरकर करीब ₹2,08,900 प्रति किलो पर आ गया. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या चांदी की कीमत दशहरा तक गिर सकती है? इसपर Shoonya के रिसर्च एनालिस्ट Deep Himanshu Shah ने जानकारी दी है.
मजबूत अमेरिकी डॉलर और भारत-अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने कीमतों को प्रभावित किया है. महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है, जिससे चांदी जैसी कीमती मेटल्स की मांग पर असर पड़ सकता है. टेक्निकल एनालिसिस के मुताबिक, चांदी के लिए ₹2,07,800 का लेवल बेहद अहम है. अगर कीमत इस स्तर से नीचे फिसलती है, तो अगला बड़ा सपोर्ट ₹1,99,200 पर मिल सकता है. वहीं, मौजूदा स्तर पर कीमतों में कुछ समय के लिए ठहराव आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
डॉलर की मजबूती और महंगाई से क्यों गिर रही है चांदी?
चांदी की कीमतों में कमजोरी के पीछे कई आर्थिक फैक्टर्स हैं. सबसे पहले, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है. चांदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में चांदी खरीदना महंगा पड़ सकता है. इससे इसकी मांग और कीमतों पर दबाव आता है.
दूसरी वजह भारत और अमेरिका में महंगाई के उम्मीद से ज्यादा आंकड़े हैं. भारत का थोक महंगाई इंडेक्स (WPI) और अमेरिका का सीपीआई डेटा (CPI) दोनों बाजार की उम्मीदों से अधिक रहे. इससे यह आशंका बढ़ी है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती करने में जल्दबाजी नहीं करेंगे. ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की संभावना से निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले ऑप्शन ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं, क्योंकि चांदी से नियमित ब्याज नहीं मिलता. इन वजहों से कीमती मेटल्स पर दबाव बना हुआ है.
₹2,07,800 का सपोर्ट क्यों है इतना अहम?
टेक्निकल चार्ट के मुताबिक, चांदी का रुझान फिलहाल कमजोर बना हुआ है. मई में ऊंचा स्तर बनाने के बाद से कीमतों में लगातार निचले स्तर देखने को मिल रहे हैं. इसके अलावा, मार्च के निचले स्तरों से कीमतों को सहारा देने वाली तेजी की ट्रेंडलाइन भी टूट गई है.
चांदी लगातार चार हफ्तों से गिर रही है और अब ₹2,07,800 प्रति किलो के अहम सपोर्ट के करीब है. सपोर्ट वह स्तर होता है, जहां कीमतों को गिरावट के दौरान खरीदारी का सहारा मिल सकता है. अगर चांदी इस स्तर को बनाए रखती है, तो कीमतों में कुछ समय तक स्थिरता या सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है. लेकिन अगर यह लेवल टूटता है, तो कीमतें गिरकर ₹1,99,200 प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं. इसलिए आने वाले कारोबारी सेशन में इस लेवल पर खास नजर रहेगी.
चार हफ्तों की गिरावट के बाद क्या संभल सकती है कीमत?
इस साल जून और जुलाई में भी चांदी की कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिली थी. उस समय गिरावट के बाद कीमतें तुरंत और नीचे जाने के बजाय कुछ दिनों तक एक सीमित दायरे में कारोबार करती रहीं. मौजूदा स्थिति में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है.
हालांकि, पिछला रुझान भविष्य में कीमतों की दिशा की गारंटी नहीं देता. इस बार भी चांदी में स्थिरता तभी मानी जा सकती है, जब कीमतें अहम सपोर्ट के आसपास टिकें और चार्ट पर मजबूती के स्पष्ट संकेत मिलें. डॉलर की चाल, महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
निवेशकों और ट्रेडर्स को क्या करना चाहिए?
मौजूदा हालात में सिर्फ कीमत गिरने के कारण चांदी खरीदने में जल्दबाजी से बचना चाहिए. बाजार का रुझान अभी कमजोर है और आर्थिक परिस्थितियां भी कीमतों के पक्ष में नहीं दिख रही हैं. ऐसे में खरीदारी से पहले कीमतों में स्थिरता या तेजी की पुष्टि का इंतजार करना बेहतर हो सकता है.
अगर चांदी ₹2,07,800 के सपोर्ट से नीचे फिसलती है, तो खरीदारी की पोजिशन रखने वाले ट्रेडर्स को रिस्क पर खास ध्यान देना चाहिए. ऐसी स्थिति में ₹1,99,200 अगला अहम लेवल होगा, जहां कीमतों को सहारा मिलने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है. दूसरी ओर, अगर चांदी मौजूदा सपोर्ट को बनाए रखती है, तो कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार संभव है.
(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)