Last Updated:
Success Story: प्रॉपर्टी का पारिवारिक कारोबार छोड़ अजय सिंह ने शिक्षा का रास्ता चुना. वे दिल्ली कौशल विश्वविद्यालय में रोबोटिक्स के प्रोफेसर हैं. उन्होंने भारत के पहले ड्राइवरलेस रोबोटिक कंट्रोलर का सफल निर्माण किया. उनके इस रिसर्च प्रोजेक्ट को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के जर्नल में जगह मिली. जिससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली.
नई दिल्लीः आमतौर पर परिवार का माहौल और पुश्तैनी पेशा ही इंसान के करियर की दिशा तय करता है लेकिन कुछ लोग अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लीक से हटकर रास्ता चुनते हैं. प्रोफेसर अजय सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनके परिवार में ज्यादातर लोग प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े थे लेकिन उन्होंने शिक्षा जगत में अपना करियर बनाया और अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत के दम पर एक खास मुकाम हासिल किया. आज उनकी पहचान सिर्फ शिक्षा जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी तक उन्होंने नाम रोशन किया है.
आखिर प्रॉपर्टी के कारोबार वाले परिवार से निकलकर उन्होंने शिक्षा की दुनिया में यह मुकाम कैसे हासिल किया यही जानने के लिए जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनका जन्म आगरा में हुआ था. परिवार में पिता के साथ ही सभी का कारोबार जमीन जायदाद का था. परिवार में नौकरी का कोई माहौल ही नहीं था. जब उनकी पहली नौकरी बिजली विभाग में लगी तो सब ने कहा नौकरी क्यों करना जब जमीन का काम है, लेकिन उन्होंने कहा नहीं उन्हें नौकरी ही करनी है वह भी सरकारी लेकिन बिजली विभाग की नौकरी उन्हें बहुत ज्यादा पसंद नहीं आई. तब उन्होंने शिक्षा जगत में जाने का ही फैसला किया.
रोबोटिक इंडस्ट्री में काम करने वाले भारत के पहले प्रोफेसर
प्रोफेसर अजय सिंह सिंघोली वर्तमान में दिल्ली की दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय में रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन डीन कंसलटेंसी विभाग में कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि यह यूनिवर्सिटी डिफेंस रोबोटिक पर काम करना चाह रही है जिसमें वह पूरा सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने अपना सफर बताते हुए कहा कि आगरा की दयालबाग यूनिवर्सिटी से उन्होंने बीटेक किया. उसके बाद एमटेक किया. फिर पीएचडी करने के लिए गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी आ गए. जहां पर उन्होंने एडवांस मैन्युफैक्चरिंग एंड रोबोटिक्स में पीएचडी किया. 2002 में वह असिस्टेंट प्रोफेसर बने.
इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वूमेन में ही उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी की. इस यूनिवर्सिटी में उन्होंने एडवांस ऑटोमेशन मैकेनिकल एंड रोबोटिक्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की स्थापना की. वहां पर कई हाइटेक लैब भी बनाई जो आज तक वहां पर चल रही है. ट्रेंनिंग प्लेसमेंट सेल भी उन्होंने बनाया जिसके जरिए बड़ी-बड़ी कंपनी वहां पर आने लगी थी. बच्चों को अच्छे सैलरी पैकेज पर नौकरी मिलने लगी थी. फिर उन्होंने इसी के साथ ही अपनी रिसर्च शुरू की. आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर उन्होंने एडवांस ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स में अपने रिसर्च की. 2014 में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए दिल्ली सरकार का एक इंजीनियरिंग कॉलेज है जिसे जीबी पंत कहते हैं वहां पर इनका चयन हुआ. वहां पर वह एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर तैनात हुए. वहां पर भी उन्होंने ऑटोमेशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में ही काम किया.
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के जनरल में छपा उनका प्रोजेक्ट
प्रोफेसर अजय सिंह ने बताया कि 2016 में मिनिस्ट्री ऑफ एचआरडी ने उन्हें एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बैंकाक एक साल के लिए भेजा था. जहां पर दुनिया भर के प्रोफेसर आए हुए थे. यह संस्थान दुनिया का जाना माना संस्थान है. भारत के वह पहले प्रोफेसर थे जो वहां पर उस वक्त गए थे. वहां पर रोबोटिक ऑटोमेशन पर ही काफी रिसर्च की गई. इसके बाद एक प्रोजेक्ट पर उन्होंने काम किया जिसका नाम ऑटोनॉमस रोबोटिक्स था. इसकी फंडिंग डिपार्मेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने की थी जिसमें बिना ड्राइवर के एक कंट्रोलर बनाना था. उस कंट्रोलर सिस्टम को बनाकर सफलतापूर्वक जमा किया गया था. उस वक्त यह ऐसा पहला कंट्रोलर था जो बिना ड्राइवर के कार चलाने की क्षमता रखता था. इस पेपर को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की जनरल ने अपने यहां पहले पेज पर ‘रोबोटिका’ को पब्लिश किया था. पहले पेज पर डिवाइस की फोटो के साथ पूरी जानकारी दी गई थी. ऐसा पहली बार हुआ था जब भारत के किसी प्रोजेक्ट को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के जनरल के पहले पेज पर पब्लिश किया हो. इसी से उन्हें एक बड़ी पहचान मिली थी.