Houthi-Saudi Arabia: हूतियों के सस्ते ड्रोन उड़ा रहे हैं सऊदी के डिफेंस सिस्टम की धज्जियां एयरपोर्ट-तेल ठिकानों पर हमलों से हड़कंप फ्रांस आया सामने

Houthi-Saudi Arabia: हूतियों के सस्ते ड्रोन उड़ा रहे हैं सऊदी के डिफेंस सिस्टम की धज्जियां एयरपोर्ट-तेल ठिकानों पर हमलों से हड़कंप फ्रांस आया सामने


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Saudi Arabia-Houthi Conflict: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच चल रही लड़ाई अब धीरे-धीरे बड़ा रूप लेती जा रही है. स्थिति ये है कि सऊदी के महंगे-महंगे एयर डिफेंस सिस्टम हूतियों के सस्ते ड्रोन के आगे पस्त हो रहे हैं. एयरपोर्ट के लेकर ऑयल रिफायनरी तक पर हमले हो रहे हैं और ऐसी स्थिति में फ्रांस, सऊदी के तेल ठिकानों को बचाने के लिए सामने आया है.

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सऊदी अरब-हूतियों के बीच बढ़ा संघर्ष.

रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है. कम लागत वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के जरिए किए जा रहे हमलों ने सऊदी अरब की आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, तेल प्रतिष्ठानों और दूसरे अहम ठिकानों को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अक्टूबर में रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 17 लोगों की मौत और 333 लोगों के घायल होने की जानकारी दी है.

एयरपोर्ट और तेल ठिकाने बने निशाना

हूती विद्रोहियों ने अक्टूबर की शुरुआत से सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले तेज किए हैं. रियाद के अलावा अबहा एयरपोर्ट और देश के पूर्वी हिस्से में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा सामने आया है. इन घटनाओं के बाद उड़ानों पर असर पड़ा और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी. अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर संभावित हमलों को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को देश के किसी भी एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने से पहले विशेष अनुमति लेने को कहा गया. रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से रोके जाने और जेद्दा तथा दम्माम में उड़ानों में देरी और रद्द होने की भी जानकारी दी गई.

हूतियों के पास है अगले 5 साल तक का बारूदी स्टॉक. (सांकेतिक तस्वीर)

सस्ते ड्रोन से महंगी रक्षा प्रणाली पर दबाव

सऊदी अरब के पास आधुनिक हथियार और पैट्रियट जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियां हैं. इसके बावजूद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का पता लगाना तथा उन्हें समय रहते रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. इस रणनीति में हूती विद्रोही अपेक्षाकृत सस्ते हथियारों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उन्हें रोकने के लिए महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ सकती हैं. लगातार हमलों से रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, विशाल क्षेत्र में महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा करना और एक साथ कई दिशाओं से आने वाले खतरों को रोकना आसान नहीं है.

यमन में भी तेज हुई सैन्य कार्रवाई

संघर्ष अब सऊदी अरब की सीमाओं तक सीमित नहीं है. यमन के दक्षिणी शहर अदन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के राष्ट्रपति भवन परिसर अल-मआशिक पर हूती विद्रोहियों ने मिसाइल हमला किया. यमनी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में पांच लोगों की मौत हुई और 16 लोग घायल हुए. प्रधानमंत्री शाया अल-जिंदानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित बताए गए. हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि परिसर में सऊदी सेना का संचालन केंद्र था. दूसरी ओर यमन की सरकार ने हमले को आतंकवादी कार्रवाई बताया और हूती नियंत्रण से पूरे देश को मुक्त कराने तक सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही. ताइज क्षेत्र में भी हूती ठिकानों पर हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं.

सऊदी अरब पर हूती लड़ाकों ने किया अटैक.

फ्रांस ने बढ़ाई सैन्य मदद, सऊदी अरब ने दी चेतावनी

सऊदी अरब ने हूती हमलों को युद्ध अपराध बताते हुए कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए सभी वैध कदम उठाएगा. सऊदी उप विदेश मंत्री वलीद अलखुरैजी ने आरोप लगाया कि हमलों में नागरिक, आर्थिक और हवाई अड्डों से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया जा रहा है. इस बीच, फ्रांस ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सैन्य संसाधन भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फाव्रू ने बताया कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लागू किया जा रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पहले लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह की सुरक्षा में मदद देने की घोषणा की थी. हालांकि भेजे गए सैन्य उपकरणों की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.

क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा

इस संघर्ष का असर अब हवाई यातायात, तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर पड़ रहा है. लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय है. दोनों पक्ष अपने सैन्य अभियानों को उचित ठहरा रहे हैं और पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे. ऐसे में आशंका है कि सऊदी अरब और यमन का यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल सकता है. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती हमलों को रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव को और बढ़ने से रोकने की है.



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